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एम्स ने नया फार्मूला खोजा, जांच के बाद नदारद मरीजों का हाल लेते हैं मोबाइल पर

7 वर्ष पहले
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रायपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में एक बार जांच करवाने के बाद दोबारा इलाज के लिए नहीं आने वाले मरीजों को डाक्टर खुद इलाज करवाने के लिए बुलाते हैं। मरीजों के मोबाइल पर कॉल कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली जाती है। उसके बाद उन्हें कहा जाता है कि आपको जांच करवाने के लिए पिछले हफ्ते आना था। आप आईए, तभी आपकी तबीयम पूरी तरह ठीक होगी। डाक्टरों का फोन आने के बाद मरीज अपने इलाज के प्रति लापरवाही छोड़कर जांच के लिए आते हैं।

एम्स के डाक्टरों का मकसद भी यही है। हालांकि फोन कॉल केवल गंभीर या ऐसी बीमारी जिसका इलाज लंबे समय तक किया जाना है, उन्हीं मरीजों को किया जाता है। साधारण सर्दी-जुकाम के मरीजों को कॉल नहीं किया जाता। मरीज के रजिस्ट्रेशन और उनके पहले चेकअप से ही डाक्टरों को उनकी बीमारी के बारे में स्पष्ट हो जाता है। उसके बाद डाक्टर चेकअप करते समय मरीज का पता और उनका मोबाइल नंबर अपनी डायरी में दर्ज कर लेते हैं। खासतौर पर डायबिटिक के मरीजों का फालोअप अनिवार्य रूप से किया जा रहा है।

160 बेड का अस्पताल, ओपीडी में 700 से ज्यादा मरीज : एम्स में इसी साल 27 फरवरी को 160 बेड का अस्पताल शुरू हुआ है। ओपीडी पिछले साल 5 जून से शुरू हुई है। अब ओपीडी में प्रतिदिन 700 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। आयुष पीएमआर बिल्डिंग में ओपीडी चल रही है। यहां सभी विभाग के डॉक्टरों के लिए कक्ष है। ट्रामा बिल्डिंग में एक हाल में डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे, इससे मरीजों की प्राइवेसी भंग होने का खतरा रहता था।

सीटी स्कैन की सुविधा जल्द : एम्स में मरीजों को सीटी स्कैन जांच की सुविधा जल्द मिलेगी। इसका स्टालेशन किया जा रहा है। दो महीने में स्टालेशन पूरा होने की संभावना है। ऑपरेशन थिएटर का काम भी अंतिम चरण में चल रहा है। ओटी में मशीन स्थापित होते ही सर्जिकल मरीजों को भर्ती किया जाएगा। मरीजों को 63 फीसदी छूट पर जेनेरिक दवा उपलब्ध कराई जा रही है।

कॉलेज व अस्पताल में खुला कैंटीन : मरीजों व मेडिकल स्टूडेंट की सुविधा के लिए कॉलेज व अस्पताल में कैंटीन खोला गया है। यहां उचित दर पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
बेहद सलीके से बात
एम्स के डॉक्टर मरीजों को कॉल करने के बाद बेहद सलीके से बात करते हैं। उन्हें डांटा नहीं जाता कि वे इलाज करवाने के लिए क्यों नहीं आ रहे है, बल्कि यह पूछा जाता है कि उनकी तबीयत कैसी है। उसके बाद दवाओं के बारे में जानकारी लेने के बाद पूछा जाता है कि आप चेकअप करवाने के लिए क्यों नहीं आ रहे हैं। उसके बाद मरीज से अस्पताल नहीं आने की समस्या भी पूछी जाती है। डाक्टरों ने बताया कि कुछ मरीजों को इस तरह फोन करने से वे आश्चर्यचकित रह गए। इस तरह फोन कर हालचाल जानने की जिम्मेदारी केवल फेमिली डॉक्टर ही निभाते हैं।

लंबे समय पर इलाज चलने वाले मरीजों से उनका हाल-चाल पूछा जा रहा है। इससे मरीजों के इलाज में सुविधा होती है।
- डॉ. अजय दानी, मेडिकल अधीक्षक एम्स