पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

एम्स में पढ़ाई से ज्यादा खाने की फीस, छात्र खफा

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रायपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पढ़ाई से ज्यादा भोजन की फीस वसूलने से बवाल मचा हुआ है। संस्थान की सालाना फीस ढाई हजार है, लेकिन तीन टाइम के भोजन के एवज में छह हजार सात सौ रुपए लिए जा रहे हैं। इसके विरोध में छात्र खुलकर सामने आ गए हैं। रविवार को निरीक्षण के लिए पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव संदीप नायक से मिलकर उनके सामने प्रबंधन की शिकायत की।
हालांकि, छात्रों ने एक माह से अपने स्तर पर ही भोजन की व्यवस्था कर ली है। उन्होंने खुद ही किसी निजी मेस संचालक से संपर्क किया और उसके जरिये हॉस्टल में भोजन मंगा रहे हैं। इसके बाद उन पर दबाव डाला जा रहा है कि वे एम्स प्रबंधन द्वारा नियुक्त किए गए मेस वाले से ही खाना मंगाएं। छात्र इसके खिलाफ हैं। इसे लेकर छात्र और प्रबंधन में ठनी हुई है। छात्रों पर कई तरह से दबाव डालने की शिकायत है।
रविवार को छात्रों को भोजन ही नहीं मिला। इस बारे में भी छात्रों का आरोप है कि उन्हें जो मेस वाला भोजन सप्लाई कर रहा है, उस पर भी दबाव डाला गया है। इस वजह से उसने रविवार को खाना नहीं भेजा। छात्र इस बात से बेहद नाराज हो गए। इसी दौरान उन्हें पता चला कि एम्स का निरीक्षण करने के लिए संयुक्त सचिव श्री नायक आए हैं। छात्रों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंच गया। छात्र इससे पहले कई आला अफसरों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को चिट्ठी भी लिख चुके हैं। उन्होंने सारे शिकायत पत्र संयुक्त सचिव को सौंप दिए।
छह माह का एडवांस मांगने से बात बिगड़ी
अगस्त में जब शिक्षण सत्र शुरू हुआ, तब छात्र नए-नए थे। उन्हें जो भी कहा गया, उन्होंने उसका पालन किया। उनसे हर माह 6700 वसूल किए गए। पिछले माह ठेका खत्म होने के बाद ठेकेदार ने छह माह का एडवांस मांगा। इससे बात बिगड़ी। छात्रों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि एक तो उनसे ज्यादा पैसे लिए जा रहे हैं, ऊपर से एक मुश्त मांगे जा रहे हैं। आरोप है कि उन पर प्रबंधन से भी दबाव डाला गया। इसके बाद भी छात्रों ने बात नहीं मानी। खुद मेस की व्यवस्था कर ली। पर विवाद खत्म न हुआ।
कितने पैसे लिए गए मैं नहीं जानता
॥मेस का ठेका समाप्त हो चुका है। छात्रों ने खुद ही अपने स्तर पर भोजन सप्लाई करने वाले का चयन किया है। पूर्व में छात्रों से मेस का कितना पैसा लिया जा रहा था, इसकी जानकारी नहीं है।
गौरी शंकर झा, प्रशासक एम्स