रायपुर । मकान या फिर जमीन के किराए को लेकर बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य सरकार अब एक नया रेंट कंट्रोल एक्ट लाने जा रही है। इसके तहत एक ट्रिब्यूनल का गठन होगा। यह ट्रिब्यूनल रेंट (किराए) से जुड़े प्रदेशभर के उन सारे मामलों को सुनेगा, जो सालों से सिविल कोर्ट में पेंडिंग हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें एक्ट को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाने को मंजूरी दी गई है।
नए रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत बनने वाले इस ट्रिब्यूनल में सिविल कोर्ट में होने वाले फैसलों को भी चुनौती दी जा सकेगी। यह एक सब-ज्यूडिशियल संस्था होगी, जिसके पास हाईकोर्ट के बराबर शक्तियां होगी। इस दौरान ट्रिब्यूनल के फैसले को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में ही चैलेंज किया जा सकेगा। बता दें कि प्रदेश में हाल ही में इस कानून को लेकर राज्य सरकार ने अध्यादेश जारी किया था। जिसे अमल पर तेजी से कार्रवाई भी चल रही है। दैनिक भास्कर ने सरकार द्वारा एक्ट में किए जाने वाले इस बदलाव की खबर 23 अगस्त को ही प्रकाशित की थी।
इन शहरों की स्टडी कर बनाया कानून
प्रदेश में रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल के गठन से पहले राज्य सरकार ने उसके स्वरूप को लेकर दिल्ली और तमिलनाडु के ट्रिब्यूनल की भी स्टडी की। इस दौरान उनके काम-काज के स्वरूप और अधिकारों की भी जानकारी ली गई। देश में रेंट कंट्रोल को लेकर गठित किए गए ट्रिब्यूनलों में सबसे पुराना ट्रिब्यूनल दिल्ली और तमिलनाडु का ही है।
ऐसा होगा स्वरूप
एक अध्यक्ष होगा, जो जिला जज के समकक्ष होगा, साथ ही इसके तीन सदस्य भी होंगे। जो विधिक, सामाजिक और प्रशासनिक आदि क्षेत्रों से जुड़े होंगे। राज्य शासन ने इसके लिए कार्यालयीन सेटअप को भी मंजूरी दे दी है, जिसमें करीब 28 कर्मचारी होंगे।
कैबिनेट में और भी फैसले
वेटनरी डॉक्टरों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ी, अब 65 साल तक करेंगे नौकरी राज्य सरकार ने वेटनरी डॉक्टरों के रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाने का फैसला लिया है, जो अब 62 से बढ़कर 65 साल होगी। डॉक्टरों की कमी का हवाला देते हुए कैबिनेट ने मंगलवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही इस प्रस्ताव को शीतकालीन सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा। प्रदेश में वेटनरी डॉक्टरों की संख्या मौजूदा समय में करीब आठ सौ है। वहीं इसके करीब 250 पद खाली भी पड़े है। इसके अलावा कैबिनेट में अनुपूरक बजट को भी मंजूरी दी गई है।
अभी ये है स्थिति
अभी मकान या जमीन के किराए से जुड़े विवादों का निपटारा सिविल कोर्ट में होता है। यहां सभी तरह के मामले सुने जाते है। ऐसे में कोर्ट की लंबी पेंडेंसी के चक्कर में रेंट कंट्रोल से जुड़े मामले भी अटके रहते हैं। इनका सालों तक निपटारा नहीं हो पाता। बता दें कि अभी तक रेंट कंट्रोल से जुड़े मामलों को सुनवाई के लिए जिला स्तर पर ही एक अधिकारी नियुक्त किया जाता है, जिसके फैसले को पहले सेशन और बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।