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आयुष्मान यूनिट सात साल रही बंद सालभर पहले खुली, इलाज नहीं

7 वर्ष पहले
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रायपुर. राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अंबेडकर अस्पताल एक तरह सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल बनने की कोशिश में लगा है, तो दूसरी ओर इस अस्पताल की मेन बिल्डिंग में एंडोस्कोपिक सर्जरी के लिए करीब एक दशक पहले शुरू की गई करीब 13 करोड़ रुपए की आयुष्मान एंडोस्कोपी यूनिट में अब तक एक भी सर्जरी नहीं हो सकी है।

कई बार इस यूनिट को सरकार स्तर पर चालू करने की कोशिशें हुईं। आखिरी प्रयास जुलाई 2012 में हुआ, जब इस यूनिट को साफ-सफाई के बाद अस्पताल प्रबंधन को सौंप दिया गया। लेकिन अस्पताल प्रबंधन पिछले एक साल से इस यूनिट में सर्जरी की सुविधा नहीं दे सका है। ऑपरेशन थिएटर व मशीनें कल्चर जांच के बाद चार विभागों को सौंपी गई हैं, लेकिन किसी विभाग ने इसका इस्तेमाल ही शुरू नहीं किया है।

एंडोस्कोपी सर्जरी की आसान प्रक्रिया है और अंबेडकर अस्पताल को 13 करोड़ की यूनिट इसीलिए दी गई थी ताकि मरीजों को ऑपरेशन में वह सुविधाएं दी जा सकें, जो केवल निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों में ही उपलब्ध हैं। इस यूनिट में जनरल सर्जरी से लेकर आर्थोपेडिक्स (अस्थि), गायनिक (स्त्रीरोग) और नाक-कान-गला (ईएनटी) से जुड़ी बीमारियों का ऑपरेशन एंडोस्कोपी से किया जाना है।

इससे मरीजों को खतरा भी कम रहता है, डाक्टरों का भी समय बचता है। जिस वक्त यूनिट चालू की गई, तभी कुछ डाक्टरों को एंडोस्कोपिक सर्जरी की खास ट्रेनिंग दी गई थी। अभी हालात ऐसे हैं कि ऑपरेशन थियेटर के लिए चार विभागों को दिन आवंटित हो गए, आयुष्मान के लिए प्रभारी, स्टाफ नर्स व वार्ड ब्वाय की पोस्टिंग कर दी गई, इस यूनिट को अस्पताल को वार्ड 27 के रूप में नया नाम दिया गया, लेकिन अब तक इसे चालू नहीं किया जा सका।

एक साल रोका पीडब्ल्यूडी ने

अंबेडकर अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान यूनिट सात साल बाद खोली थी। इसकी साफ-सफाई कराई गई। इसके बाद सीपेज व फॉल्स सीलिंग तथा छोटी-मोटी मरम्मत का काम पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने दिसंबर-2010 में पीडब्ल्यूडी को इस काम के लिए 41 लाख रुपए का चेक दिया था। लेकिन पीडब्ल्यूडी महकमा पैसे लेकर बैठ गया। दिसंबर 2011 में मेडिकल कॉलेज में हुई स्वशासी समिति की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने आयुष्मान यूनिट को मार्च तक शुरू करने के निर्देश दिए थे। पीडब्ल्यूडी ने काम शुरू किया, लेकिन यह रफ्तार नहीं पकड़ सका। जुलाई 2012 में स्वास्थ्य मंत्री ने 15 दिनों में यूनिट शुरू करने के निर्देश दिए थे। इस डेडलाइन को भी करीब डेढ़ साल बीत गए, लेकिन काम पूरा नहीं किया जा सका।

चीरा नहीं एक छेद से ऑपरेशन

विशेषज्ञों के अनुसार एंडोस्कोपी पद्धति से ऑपरेशन करने के लिए चीरा नहीं लगाना पड़ता। शरीर में एक या जरूरत पडऩे पर ज्यादा छेद कर आपरेशन हो जाता है। इससे मरीजों को खतरा कम रहता है। खून कम निकलता है, इसलिए हालात नहीं बिगड़ते। सबसे खास बात ये है कि जिस मरीज की एंडोस्कोपी सर्जरी हो, उसे ज्यादा दिन अस्पताल में नहीं रहना पड़ता।

इन्हें विशेष ट्रेनिंग
नाम विभाग पद
डॉ. आभा सिंह गायनिक एचओडी
डॉ. तृप्ति नागरिया गायनिक प्रोफेसर
डॉ. हंसा बंजारा ईएनटी एसो. प्रोफेसर
डॉ. सुनील रामनानी ईएनटी असि. प्रोफेसर
डॉ. पंकज लूका सर्जरी एचओडी
डॉ. राजेंद्र अहिरे आर्थोपेडिक्स असि. प्रोफेसर

प्रबंधन बताएगा
एंडोस्कोपी यूनिट चालू करने की खबर आई थी। यहां ऑपरेशन क्यों नहीं हो रहे हैं, इस बारे में अस्पताल प्रबंधन ही बेहतर बता पाएगा।
डॉ. अरविंद नेरल, प्रवक्ता मेडिकल कॉलेज

विभागाध्यक्षों से पूछेंगे
आयुष्मान एंडोस्कोपी सर्जरी यूनिट में ऑपरेशन के लिए अलग-अलग विभागों को आवंटित कर दिया गया है। एंडोस्कोपी से सर्जरी करने के लिए डॉक्टर प्रशिक्षित भी हैं। ऑपरेशन क्यों नहीं हो रहे हैं, इस संबंध में विभागाध्यक्षों से पूछना पड़ेगा? डॉ. विवेक चौधरी, अधीक्षक आंबेडकर अस्पताल

आयुष्मान एक नजर में

यह एंडोस्कोपी सर्जरी यूनिट है। करोड़ों रुपए की हाईटेक मशीनें लगी हैं। राज्य गठन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के शासन में यूनिट को चलाने के लिए नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल से अनुबंध हुआ था। लेकिन यह कुछ माह बाद ही खत्म हो गया था। यूनिट चालू होने के बाद मरीजों का इलाज एंडोस्कोपी पद्धति से होने लगेगा। इसमें खर्च कम होगा। समय भी बचेगा। सालभर पहले मशीन की जांच पूरी हो गई है।

ये ऑपरेशन

अपेंडिक्स
हार्निया
गाल ब्लेडर
जोड़ों की सर्जरी
कान, नाक व गला
बच्चेदानी का मुंह का कैंसर
गर्भाशय निकालना
गर्भाशय में ट्यूमर