रायपुर. शंकरनगर स्थित रॉयल होम्स की पार्किग में खड़ी कार में मृत मिले डॉ. दिनेश सेठिया के शरीर में एनेस्थेटिक दवा का ओवरडोज पाया गया है। हालांकि, पुलिस अभी तक इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है कि डॉ. सेठिया ने आत्महत्या की है या फिर उनकी मौत की कोई और वजह है?
सिविल लाइंस पुलिस ने डॉ. सेठिया का लैपटॉप और मोबाइल जांच के लिए भेजा है। उनके लैपटॉप में क्या-क्या मिला है, इसका खुलासा नहीं किया गया है। पुलिस ने मोबाइल के कॉल डिटेल भी निकलवाए हैं। इसमें मंगलवार की सुबह से दोपहर तक जिन लोगों से डॉक्टर की बात की, उनसे पूछताछ की जाएगी।
इधर, पुलिस ने बताया है कि डॉक्टर के हाथ में जो वेंस ड्रिप लगी थी, उसके जरिए ही उनके शरीर में बेहोशी की दवा गई। ट्रोपोफॉल सॉल्ट (न्यूरॉफ) नाम की यह दवा आमतौर पर ऑपरेशन से पहले बेहोशी करने में इस्तेमाल होती है। डॉ. सेठिया इसी दवा के एक्सपर्ट थे। उन्हें यह बेहतर तरीके से पता था कि दवा की कितनी मात्रा कितनी देर के लिए बेहोशी लाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उनके शरीर में यह दवा जाने के बाद महज पांच मिनट में उन्हें गहरी बेहोशी से मौत आ गई।
सीरिंज के फिंगरप्रिंट से होगा खुलासा
पुलिस ने डॉक्टर के हाथ में लगी ड्रिप और इंजेक्शन की सीरिंज को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा है। अगर इसमें डॉ. सेठिया की उंगलियों के निशान होंगे तो पुलिस यह मान सकेगी कि उन्होंने आत्महत्या की है। हालांकि, घर वालों से इस बारे में बातचीत की गई है। उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं लग रहा कि डॉ. सेठिया खुदकुशी जैसा कदम उठा सकते थे।