पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बवाल से बचने छोड़ा कांग्रेस भवन, आरकेसी में बनाई लिस्ट

बवाल से बचने छोड़ा कांग्रेस भवन, आरकेसी में बनाई लिस्ट

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस ने टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विवाद और विरोध के कारण चुनाव समिति की बैठक की जगह बदल दी। रविवार को राजकुमार कालेज में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के निवास पर बैठक हुई। यही नहीं जिला चयन समितियों की बैठक भी अलग-अलग जगह की गई। कांग्रेस भवन में शुक्रवार की रात जोगी और बघेल समर्थकों के बीच गालीगलौज और धक्कामुक्की हुई थी। बताते हैं कि अप्रिय स्थिति न पैदा हो, इसलिए कांग्रेस नेताओं ने एहतियातन ऐसा किया।
कांग्रेस भवन में हंगामे के कारण पार्टी ने बैठक की जगह बदल दी। भीड़ से बचने के लिए शनिवार को रायपुर नगर निगमों के पार्षदों की टिकट पर मंथन महापौर किरणमयी नायक के निवास में किया गया। वहीं प्रदेश चुनाव समिति की बैठक आरकेसी में की गई। हालांकि कांग्रेस भवन में मौजूद कार्यकर्ताओं को शाम तक इसकी भनक नहीं लगी थी। कुछ लोग शंकरनगर में बैठक होने की बात कह रहे थे तो कुछ भूपेश बघेल के निवास पर। शाम को जब नगर पालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्षों की सूची जारी की गई तो कार्यकर्ताओं को इसका पता चला।
सुरक्षा के लिहाज से उपयुक्त

आरकेसी सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त है। आरकेसी का कैंपस 100 एकड़ में फैला है, जिसमें चारों ओर बाउंड्रीवाल है। यही नहीं तीनों गेट में सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। किसी भी व्यक्ति को बिना पहचान के भीतर नहीं जाने दिया जाता। नेता प्रतिपक्ष सिंहदेव आरकेसी बोर्ड के अध्यक्ष हैं। उन्हें राज्य शासन से शंकरनगर में बंगला आबंटित किया गया है, लेकिन सिंहदेव अपने आरकेसी के निवास में ही रहते हैं।
शुक्ल भवन में होती थी बैठक
कांग्रेस भवन टिकट वितरण के दौरान विरोध और हंगामा आम बात है। प्रदेश के नेता भी इसे स्वीकार करते हैं। 2009 के नगरीय निकाय चुनाव में भी चुनाव समिति की बैठक कांग्रेस भवन में नहीं की गई थी। तब पूर्व मंत्री अमितेश शुक्ल के खम्हारडीह स्थित बंगले में बैठक की गई थी।
आरक्षण पर ही दिया टिकट
कांग्रेस ने जो वार्ड सामान्य थे वहां से किसी भी आरक्षित व्यक्ति को टिकट नहीं दिया गया है। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने पहले ही तय कर लिया था कि सामान्य वार्ड से सामान्य को ही टिकट दिया जाएगा। यही वजह है कि 28 सामान्य वार्डों में एक भी आरक्षित वर्ग के व्यक्ति को टिकट नहीं दिया गया।