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वीआईपी रोड का नहीं सुधरा सिस्टम कभी वन-वे तो कभी नो-पार्किंग जोन

6 वर्ष पहले
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रायपुर। सरकारी एजेंसियों ने जीई रोड से सीधे एयरपोर्ट पहुंचने के लिए 30 करोड़ रुपए की लागत से धरमपुरा फोरलेन बनवाई, लेकिन एयरपोर्ट का ट्रैफिक वहां शिफ्ट नहीं किया जा सका। अब भी रोजाना एयरपोर्ट जाने-आने वाली औसतन ढाई हजार गाड़ियां, मंत्रालय जाने वाली सैकड़ों गाड़ियां, मार्ग के दर्जनभर होटलों के मेहमान तथा लगे हुए पांच गांव के लोग वीआईपी रोड का इस्तेमाल कर रही हैं। इस मार्ग पर ट्रैफिक लगातार बढ़ा है, इसके बावजूद प्रशासन पिछले दस साल में इस सड़क की न तो चौड़ाई ही बढ़ा सका है और न ही बेतरतीब पार्किंग काबू में आ सकी है।
इस सड़क के चौड़ीकरण का प्लान 2008 में फाइनल हुआ, लेकिन राजधानी के दो दिग्गज मंत्रियों के टकराव की वजह से योजना अब लगभग ठंडे बस्ते में चली गई है। प्रशासन ने 10 दिन पहले इस मार्ग को वन-वे किया था। शनिवार को इसे नो-पार्किंग जोन घोषित कर दिया गया, लेकिन अफसर ये नहीं बता पा रहे हैं कि जिन होटलों और शादी घरों को पार्किंग के इंतजाम करने के लगातार नोटिस दिए गए, उन्होंने अपने परिसरों में पर्याप्त पार्किंग के इंतजाम किए हैं या नहीं।

वीआईपी रोड तिराहे से फुंडहर तक, तीन किमी सड़क की चौड़ाई 20 फीट से ज्यादा नहीं है। सारे होटल, शादी भवन और फार्म हाउस इसी हिस्से में हैं। इसी तीन किमी के हिस्से पर न तो ट्रैफिक की बदइंतजामी सुधर सकी है और न इसका चौड़ीकरण ही हुआ है। वीआईपी तिराहा सिक्स लेन जीई रोड पर है। तीन किमी की संकरी सड़क के बाद इस रोड का एयरपोर्ट तक का हिस्सा फोरलेन हो चुका है। सारी जद्दोजहद इसी तीन किमी सड़क के लिए है, लेकिन यही हिस्सा सबसे बदहाल है।
प्रभावशाली वर्ग नहीं चाहता
वीआईपी रोड पर तिराहे से फुंडहर तक एक दर्जन होटल और मैरिज हॉल हैं। इनका संचालन करने वाले लोग प्रभावशाली होने के साथ-साथ किसी न किसी ताकतवर नेता से सीधे जुड़े हैं। जानकारों का दावा है कि इनका ताल्लुक राज्य शासन से संबंधित ताकतवर अफसरों से भी है। जैसे ही इस सड़क के लिए कोई सिस्टम बनता है, सभी एकजुट हो जाते हैं। यही वजह है कि प्रशासन चौड़ाई बढ़ाने जैसी कवायद के बदले वन-वे और नो-पार्किंग जोन जैसे छोटे-छोटे कदम ही उठा पा रहा है।
नाम पर भी बवाल
वीआईपी रोड पर सरकार ही नहीं, कांग्रेस में भी घमासान हो चुका है। पिछले साल पूर्व महापौर किरणमयी नायक ने एमआईसी से इस रोड का नाम पं. श्यामाचरण शुक्ल के नाम पर करने का प्रस्ताव पास कर दिया। आयोजन के कार्ड तक छप गए। तब पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में इस सड़क का नाम स्व. राजीव गांधी पर रखा जा चुका है।
यह विवाद दिल्ली तक पहुंचा और आनन-फानन में समारोह रद्द करना पड़ा। जबकि उस कार्यक्रम में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी आ रहे थे, जिन्होंने ऐन वक्त पर दौरा रद्द किया।
चौड़ाई की योजना ही बंद
वीआईपी रोड के चौड़ीकरण की योजना केवल इसलिए धराशायी हो गई क्योंकि राजधानी के एक दिग्गज मंत्री चाहते थे कि सड़क की चौड़ाई के लिए बायीं ओर से जगह ली जाए तो दूसरे मंत्री दाईं ओर से। सरकारी तौर पर कोशिश शुरू हुई कि दोनों ओर चौड़ाई बढ़ा दी जाए। तब तक एक कांग्रेस नेता अदालत चले गए क्योंकि चौड़ीकरण में उनके फार्महाउस की जमीन आ रही थी।
उसके बाद से चौड़ीकरण अटका है। पीडब्ल्यूडी के एक आला अफसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि चौड़ीकरण की योजना ही बंद कर दी गई, उसी के बाद धरमपुरा मार्ग को फोरलेन में तब्दील किया गया।