रायपुर. शहर में फर्जी हस्ताक्षर के जरिये बैंकों से पैसा निकालने वाला बड़ा गिरोह सक्रिय होने संकेत हैं। इस रैकेट में फर्राटे से अंग्रेजी बोलने वाले व हैंड राइटिंग एक्सपर्ट हैं, जो किसी के भी हस्ताक्षर की नकल करने में माहिर हैं। सेंट्रल बैंक से पांच और यूनियन बैंक से 17 लाख फर्जी हस्ताक्षर के जरिये इतनी चालाकी से निकाले गए कि बैंक वाले भी गच्च खा गए।
पुलिस अब इस हाई प्रोफाइल केस की तहकीकात में जुट गई है। प्रारंभिक जांच में जो सबूत मिले हैं, उससे पुलिस के आला अफसर हैरान हैं। ऐसी आशंका है कि जालसाजों ने यूनियन बैंक से स्टील कारोबारी नरेंद्र गुप्ता के खाते से रकम उड़ाने के लिए एक दो दिन नहीं कई दिनों तक आपरेशन चलाया। उन्होंने पहले गुप्ता की कंपनी रितिका स्टील प्रावइेट लिमिटेड का लेटरपेड हासिल किया।
उस लेटरपैड में चेकबुक के लिए आवेदन किया। कंपनी का लेटरपेड होने के कारण बैंक वालों को किसी तरह शंका नहीं हुई। बैंक से स्टील कारोबारी के नाम पर चेक बुक जारी कर दी गई। चेक बुक में नरेंद्र गुप्ता के फर्जी हस्ताक्षर कर पैसे निकाले और फरार हो गए।
पुलिस ने जब बैंक अधिकारियों से पूछताछ की और यह जानना चाहा कि उन्होंने किस आधार पर गुप्ता के नाम की चेक बुक अनजान व्यक्ति के को दे दी, तब बैंक अधिकारियों ने अपनी सफाई पेश करते हुए लेटर पैड दिखाया और बताया कि लेटरपैड होने के कारण उन्होंने चेक बुक दे दी थी। य बात सामने आने के बाद ही पुलिस अधिकारियों को पुख्ता यकीन हो गया है कि यह गिरोह पूरी प्लानिंग से उन कारोबारियांे को निशाना बनाने की फिराक में है जिनका बैंक में लाखों रुपए जमा है।
अंग्रेजी में बेहद सलीके से लिखी चिट्ठी
दोनों बैंकों से खातेदारों के नाम पर चेक बुक जारी करवाने के लिए जालसाजों ने जो चिट्ठी लिखी है, उसकी भाषा बेहद सटीक है। राइटिंग भी ऐसी है कि पत्र देखकर कोई भी प्रभाव में आ जाए। गिरोह में कोई ऐसा व्यक्ति है जो थोड़ी से प्रैक्टिस के बाद किसी के भी हस्ताक्षर की हूबहू नकल कर सकता है।
सीसीटीवी को धोखा दे गया जालसाज
बैंक से चेक भुनाने आया जालसाज कैमरे को भी धोखा दे गया। पुलिस ने सीसीटीवी के फुटेज को देख लिया है। किसी में भी उसका चेहरा स्पष्ट नहीं आया है। ऐसी आशंका कि बैंक में मूवमेंट करते समय उसने जानबूझ कर ऐसी पोजीशन ली थी कि वह कैमरे की नजर में नहीं आ सके। आशंका है कि चेक से पैसे निकालने के पहले बदमाशों ने बैंक के कैमरे सिस्टम का भी अच्छे से निरीक्षण कर लिया था। उन्होंने यह चेक कर लिया था कि किस तरह की पोजीशन पर आने-जाने से वे कैमरे की नजर में नहीं आ सकेंगे।
सेंट्रल बैंक में भी ऐसे ही निकलवाया चेक बुक
गोलबाजार स्थित सेंट्रल बैंक से गुरुमीत सिंह गुरुदत्त के खाते से ५ लाख रुपए निकाले गए, उसमें भी फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग किया गया। गुरुमीत ने बताया कि बैंक में उसके नाम से चेक बुक जारी करने आवेदन दिया था। आवेदन जमा करने वाले ने खुद को उनका बेटा बताया। कारण बताया गया कि पुरानी चेक बुक गुम हो गई है।
कंपनी का स्टाफ भी आया जांच के घेरे में
इस कांड में बैंक से लेटरपैड वाला नया तथ्य सामने आने के बाद रितिका स्टील कंपनी का कुछ स्टाफ जांच के घेरे में आ गया है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने पैसों का लालच देकर कंपनी के किसी स्टाफ को अपने साथ मिलाया और उसकी मदद से लेटरपैड हासिल कर लिया। ऐसे संदिग्धों की पहचान की जा रही है।
जालसाजों ने बैंक से इसलिए जारी कराई चेकबुक
जालसाजों ने बैंक से चेक बुक जारी करवाने का जोखिम इसलिए उठाया ताकि जब चेक जमा किया जाए तो प्रबंधन को शक न हो। चेक बुक जारी करवाने के एक-दो दिन के भीतर ही पेमेंट के लिए चेक जमा कर दिया गया था। योजना कामयाब रही व बैंक वालों ने पैसे दे दिए। यानी जालसाज पूरी प्लानिंग से काम कर रहे हैं।
बैंक के तीन अधिकारियों से पूछताछ
बैंक के तीन अधिकारियों को थाने में तलब किया गया। उनका लिखित बयान दर्ज किया गया। उनसे पूछा गया है कि आखिर उन्होंने किस आधार पर 17 लाख के चेक का भुगतान किसी अनजान व्यक्ति को कर दिया। नरेंद्र गुप्ता का प्राय: हर दूसरे दिन बैंक में आना-जाना लगा रहता था। इस बात को सामने रखकर पूछा गया कि जब वे रोज आते थे तो पैसे किसी और व्यक्ति के हवाले करते समय एक बार उनसे मोबाइल पर चर्चा क्यों नहीं की गई। बैंक अधिकारी पुलिस के सवालों में उलझ गए हैं। उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया है।