रायपुर। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। राइटर मनोज मुंतशिर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। करीब डेढ़ साल मुंबई के अंधेरी में रातें फुटपाथ पर कटीं। कई दिनों तक भूखे भी रहना पड़ा। मगर
अमिताभ बच्चन से एक मुलाकात ने इनका जीवन बदल दिया। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मनोज ने अपनी लाइफ के उन दिनों को शेयर किया।
तेरी गलियां... और आमिर की अपकमिंग मूवी
पीके का दिल दरबदर लिखने वाले राइटर मनोज साहित्य सम्मेलन में हिस्सा लेने रायपुर पहुंचे थे। महोत्सव के बारे में उन्होंने कहा कि एक
खूबसूरत सी दुनिया मुक्तांगन में बसाई गई है। मैं इससे पहले भी कई दफा यहां आया हूं। यहां लोगों में साहित्य की समझ है, देखकर अच्छा लगता है। अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में उन्होंने बताया
अक्षय कुमार स्टारर बेबी,
अमिताभ बच्चन की वजीर, वेलकम बैक और मिस्टर एक्स जैसी फिल्मों में उनके लिखे गाने लोगों को सुनने को मिलेंगे। इसके अलावा उन्होंने अपने अब तक के फिल्मी सफर के बारे में भी बताया।
ऐसे बदली जिंदगी
मनोज कहते हैं, इतनी सफलता के बावजूद अमिताभ बेहद सहज व्यक्ति हैं। साल 1999 में स्टार टीवी के एक अधिकारी ने मेरे काम देखे थे। एक दिन उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन से मिलोगे, मैंने सोचा ये मजाक कर रहे हैं। वो मुझे एक होटल लेकर गए, सामने बच्चन साहब बैठे थे। वहां 20 मिनट की मुलाकात रही होगी, तब से आज तक
केबीसी में दर्शक जो सुनते हैं वो शब्द मेरे ही लिखे होते हैं। अमिताभ मेरी लिखी स्क्रिप्ट पर कई बार रिहर्सल करते हैं, मैं उनके साथ ही होता हूं। रायपुर में हुई शूटिंग की स्क्रिप्ट भी मैंने ही लिखी थी, रात में हमने काफी देर रिहर्सल भी की थी।
टिके रहिए होंगे कामयाब
मनोज ने कहा कि अगर हम डॉक्टरी या इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हैं तो ये पता होता है कि पांच साल बाद हम इंजीनियर या डॉक्टर बन जाएंगे। लेकिन फिल्म जगत में आप कब चमकेंगे कोई नहीं कह सकता। इतना जरूर है कि अगर आप मेहनत कर रहे हैं और अपना वक्त दे रहे हैं तो आपका मौका आएगा। बस ये देखने की जरूरत होती है कि जब आपका वक्त आया तो उसे लेने आप मौजूद हैं या नहीं। अगर डेढ़ साल मुश्किल भरे दौर से घबराकर मैं घर लौट गया होता तो मुझे भी कामयाबी नहीं मिलती। ये बात जिंदगी पर भी लागू होती है।
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