फोटो- प्रिंसिपल की कुर्सी पर अग्रवाल और बगल में बैठे चक्रवर्ती
बिलासपुर। सीएमडी कॉलेज में शनिवार को कुर्सी के लिए फिर दोनों प्राचार्य डॉ. एसएन अग्रवाल और डीके चक्रवर्ती के बीच जोरदार विवाद हुआ। कुर्सी नहीं मिलने से नाराज अग्रवाल को प्रशासन की दहलीज तक जाना पड़ा। लौटे तो प्राचार्य के दफ्तर में दोनों के बीच जुबानी जंग चली। उधर, प्रबंधन और प्राचार्य के बीच रोज-रोज के विवाद से छात्राें की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। प्रोफेसर भले ही चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन वे इस कदर तनाव में हैं कि ढंग से क्लास तक नहीं ले पा रहे हैं। इससे स्टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी बीच छात्रनेताओं को नेतागिरी भुनाने का मौका मिला और तोड़-फोड़ तक होने लगी है। कॉलेज में धीरे-धीरे डीपी विप्र कॉलेज जैसे हालात बनते जा रहे हैं, जहां ऐसी ही नौबत आने पर प्रशासक बैठाया गया था।
सीएमडी कॉलेज में विवाद की शुरुआत छात्रसंघ चुनाव के समय से हो गई थी। चुनाव के दौरान अभाविप और एनएसयूआई समर्थक उम्मीदवारों के लिए कांग्रेस और भाजपा नेता आपस में भिड़े थे। असंतुष्टों की ओर से नए नाम से पैनल भी खड़ा कर दिया गया। अपना-अपना वजन और रुतबा दिखाने की होड़ लगी रही है। अभी यह विवाद थमा भी नहीं है कि प्राचार्य की कुर्सी को लेकर घमासान शुरू हो गया। इसमें प्रबंधन और शासन से नियुक्त डॉ. एसएन अग्रवाल के बीच विवाद चल रहा है। दूसरी ओर इस दौरान छात्रनेता भी तोड़-फोड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। हद तो यह है कि कॉलेज छात्रसंघ के पदाधिकारी भी उनका ही साथ दे रहे हैं। बीता सप्ताह कॉलेज के लिए खासा हंगामेदार रहा, जब कॉलेज के हालात रोज बदलते रहे। अंचल का सबसे बड़ा काॅलेज होने से यहां की गतिविधियों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
दोनों ओर से सेंके रहे रोटी
सीएमडी कॉलेज के हालात डीपी विप्र कॉलेज की तरह बन रहे हैं। विवाद को लंबा खींचने, घटनाक्रम को पेचीदा बनाने के लिए सीधे तौर पर परदे के पीछे के लोग जिम्मेदार हैं। वे नहीं चाहते कि सीएमडी काॅलेज के विवाद का जल्द अंत हो। यही वजह है कि दोनों ओर से खंदक की लड़ाई लड़ी जा रही है।
और शाम को 35 प्रोफेसरों के वेतन का रास्ता साफ
पांच महीने से प्रोफेसरों को वेतन नहीं मिल पा रहा था। राज्य शासन के पास फाइल भेजी गई थी, लेकिन सीनियाॅरिटी पर बात अटकने से फाइल भी लटकी हुई थी। मामला कोर्ट में जाने के बाद शासन ने कॉलेज के ही सीनियर प्रोफेसर डॉ. एसएन अग्रवाल को सैलरी बिल पर दस्तखत करने का अधिकार दिया। शनिवार को सभी प्रोफेसरों के सैलरी बिल पर दस्तखत हो गए। उन्हें जल्द ही पांच महीने का वेतन मिल जाएगा।
शनिवार को दिनभर चला ड्रामा : जिसे भी खाली मिली वही जम गया
शनिवार को सुबह जब प्राचार्य डॉ. एसएन अग्रवाल प्राचार्य कक्ष पहुंचे, तो वहां चेयर पर प्रो. डीके चक्रवर्ती बैठे हुए थे। डाॅ. अग्रवाल ने उनसे कुर्सी से उठने के लिए कहा। चक्रवर्ती ने इनकार कर दिया। कुछ देर तक डॉ. अग्रवाल वहां बैठे रहे, फिर इसकी सूचना अपर कलेक्टर नीलकंठ टेकाम को दी। टेकाम ने प्राचार्य डॉ. अग्रवाल को कलेक्टर के नाम पर आवेदन देेने के लिए कहा। अग्रवाल कलेक्टोरेट गए, लेकिन सेकेंड सेटरडे की छुट्टी थी। वे एसडीएम दफ्तर आ गए। वहां आवेदन देने के बाद कॉलेज आए, जहां उन्हें प्राचार्य कक्ष में कुर्सी खाली मिली। वे तत्काल इस पर बैठ गए। कुछ देर बाद प्रो. चक्रवर्ती भी आए और बगल वाली कुर्सी पर बैठ गए। इस दौरान कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. विभा ठाकुर वहां मौजूद थीं। उनसे भी डॉ. अग्रवाल का विवाद हुआ।
अब कह रहे तोड़-फोड़ से वास्ता नहीं
शुक्रवार को कॉलेज में हुई तोड़-फोड़ में अभाविप और एनएसयूआई दोनों ने शामिल होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि यह प्रबंधन और प्राचार्य के बीच का मामला है। उनका इस मामले से लेना-देना नहीं है। जबकि तोड़-फोड़ के दौरान इनमें से ही कुछ छात्रनेताओं को देखा गया था। इस मामले में प्रबंधन ने भी कोई संज्ञान नहीं लिया है।
प्रिंसिपल रूम में हुई जुबानी जंग: डीवीआर चोरी की बात पर बिफरे
प्रो. चक्रवर्ती: कोर्ट के आदेश में साफ है कि आप सिर्फ स्टाफ सैलरी पर सिग्नेचर करेंगे। पॉलिसी मैटर डिसाइड नहीं करेंगे।
डॉ. अग्रवाल: मैं कहां पॉलिसी मेटर डिसाइड कर रहा हूं
प्रो. चक्रवर्ती: देखिए, कोई स्टूडेंट एडमिशन के लिए आ रहा है, कोई किसी कारण से। यह पॉलिसी मैटर नहीं तो और क्या है?
डॉ. अग्रवाल: मैं कोर्ट और शासन के आदेश से ही यहां बैठा हूं।
प्रो. चक्रवर्ती: चाबी उनके पास थी तो डीवीआर चोरी हो गया।
डॉ. अग्रवाल: चार साल से लगाए गए आरोप तो साबित नहीं कर पाए। अब कहने लगे कि यहां का सारा समान एसएन अग्रवाल ही लेकर गया है।
प्रो. चक्रवर्ती: आप बेकार की बात कर रहे हैं।
डॉ. अग्रवाल: मैं कोई बेकार की बात नहीं कर रहा हूं।
(इस बीच कुछ मीडियाकर्मी कक्ष में पहुंचे और दोनों शांत हो गए।)