रायपुर. शहर को झुग्गीमुक्त करने की योजना में अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। इसी का नतीजा है कि सर्वे के बाद भी जरूरतमंद लोगों को बीएसयूपी प्रोजेक्ट के तहत बने मकान नहीं मिल पा रहे हैं। दरअसल शहर के अंदर की बस्तियों में रहने वालों को योजना के तहत बने मकानों में शिफ्ट किया जा रहा है। इस दौरान आवंटन में गड़बड़ी हो रही है।
डीबी स्टार टीम ने पड़ताल में पाया कि जोन क्र.-3 के भोला नगर बस्ती में रहने वाले परिवारों के लिए 8 सितंबर को मकानों का आवंटन हुआ। बीएसयूपी प्रोजेक्ट के तहत बस्ती वालों को सड्ढू शिफ्ट किया जा रहा है। इसके लिए निगम ने अनुबंध के तहत 26 जून को सर्वे करवाया था। इस दौरान 130 परिवारों को मकान देने की सूची तैयार की गई। पंजीयन एवं विद्युत शुल्क के नाम पर सभी से 3,151 रुपए जमा करवाए गए। जब आवंटन की सूची जारी हुई तो उसमें मकान पाने वाले परिवारों की संख्या बढ़कर 182 हो गई।
सर्वे में शामिल पांच परिवारों को मकान अलॉट नहीं हो पाया। जबकि इनसे भी पैसे जमा करवाए गए थे। अब इनका कहना है कि अधिकारियों की मिलीभगत से इसमें गड़बड़ी हुई है। बस्ती से बाहर के लोगों को भी मकान आवंटित हुए हैं। टीम ने अधिकारियों से बात की तो कहने लगे 52 मकानों के आवंटन में गड़बड़ी हो गई है, जिसे वे सुधार रहे हैं।
पहले भी मिल चुकी है शिकायत
टीम ने पड़ताल में पाया कि तेलीबांधा, संतोषी नगर समेत अन्य बस्तियों में भी विस्थापन के दौरान अधिक संख्या में मकान आवंटित हो गए थे। अधिकारी खुद इसकी पुष्टि कर रहे हैं। एक ही परिवार को चार से पांच मकान अलॉट हो गए थे। शिकायत के बाद जांच की गई और मकान वापस लेने की कार्रवाई हुई। मदर टेरेसा वार्ड की पार्षद रेखा रामटेके ने बताया कि तेलीबांधा तालाब के सौंदर्यीकरण से पहले यहां की बस्ती में रहने वालों का सर्वे करवाया गया था। इसमें 720 परिवार मिले थे। बोरियाखुर्द में इन्हें जब शिफ्ट करने के लिए मकान आवंटित हुए तो 1,198 परिवारों के नाम शामिल हो गए। इसी तरह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड के पार्षद लेखराम सोनकर ने बताया कि लालपुर, मौदहा पारा, बैजनाथ पारा और देवपुरी के लोगों को जोन क्र.-6 के ऑफिस के पास बने बीएसयूपी मकानों में शिफ्ट किया गया। सर्वे के आधार पर जिनको मकान आवंटन हुआ, उनके अलावा भी कई लोग मनमर्जी से रहने लगे। बाद में इन्हें हटाने की कार्रवाई हुई।
बीच में ही रोक दिया था सर्वे
टीम को निगम के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश के बाद वर्ष 2007 में बायोमैट्रिक सर्वे के लिए कोलकाता की एक कंपनी से अनुबंध किया गया था। चार बस्तियों में सर्वे का काम शुरू हुआ लेकिन उसे बीच में ही छोड़ दिया गया। बाद में कंपनी को भुगतान भी नहीं किया गया।
मेनुअल सर्वे से हो रही गड़बड़ी
मकान आवंटन से पहले हितग्राहियों का बायोमैट्रिक सर्वे नहीं करवाया जा रहा है। ऐसे में एक ही परिवार को तीन-चार मकान अलॉट हो रहे हैं। केंद्र सरकार का निर्देश था कि फिंगर प्रिंट लेने के साथ आंखों की पुतलियों को भी स्कैन करना था। इसके बाद सेंट्रल डाटा तैयार करना था। इससे एक ही व्यक्ति को देश में कहीं भी दोबारा मकान मिलने की आशंका नहीं रहती। रायपुर में बीएसयूपी योजना के लिए बायोमैट्रिक सर्वे की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई। इसे बीच में ही बंद कर दिया गया। इसके बाद मेनुअल सर्वे के आधार पर ही मकान अलॉट होने लगे। इस वजह से गड़बड़ी की शिकायत मिल रही है।
किराएदारों और रिश्तेदारों के नाम सूची में डलवा रहे
26 जून को नगर निगम की तरफ से सर्वे करवाया गया था, सभी से 3,151 रुपए जमा करवाया गया। अब मकान नहीं दे रहे हैं। कहते हैं बाद में दिया जाएगा। अलॉटमेंट में गड़बड़ी की जा रही है। बस्ती के कुछ लोग किराएदारों और रिश्तेदारों के नाम भी सूची में डलवा रहे हैं। - अरविंद शर्मा, रहवासी, भोला नगर
130 मकानों की सूची तैयार हुई थी
भोला नगर में विस्थापन के लिए सर्वे करवाया गया था। वहां 130 मकानों की सूची तैयारी हुई थी। 8 और 9 सितंबर को सर्वे के बाद 182 लोगों को घर अलॉट हो गया। यह कैसे हुआ इसकी जांच की जा रही है। दस्तावेज के लिए जोन आयुक्त से संपर्क कर लीजिए। - योगेश कडु, उप-अभियंता, जोन क्र.- 3, रायपुर नगर निगम
किसी ने गलत जानकारी दी है
सर्वे में 130 नहीं 250 परिवारों की लिस्ट तैयार हुई थी। आपको किसी ने गलत जानकारी दे दी है। आप नाम बताइए मैं पूछता हूं। हमने एक प्राइवेट कंपनी से वहां सर्वे करवाया है। कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। अगर आपको दस्तावेज चाहिए तो आरटीआई लगाइए। - एसके राठौर, आयुक्त, जोन क्र.-3, रायपुर नगर निगम
सीधी बात : इसकी जांच करवाते हैं : अवनीश कुमार शरण, आयुक्त, रायपुर नगर निगम
- राजधानी में बीएसयूपी प्रोजेक्ट के तहत मकान आवंटन में गड़बड़ी हो रही है?
कैसे...
- प्रोजेक्ट के तहत बिना बायोमैट्रिक सर्वे करवाए ही हितग्राहियों को मकान दिया जा रहा है?
हां... बायोमैट्रिक सर्वे करवाने से क्या होता...
- सर्वे नहीं करवाने की वजह से एक ही परिवार को चार-पांच मकान अलॉट हो रहे हैं?
कहां हुआ है ऐसा...
- ताजा मामला जोन क्र.-3 के भोला नगर से सड्ढू में हुए विस्थापन का है?
क्या गड़बड़ी हुई है...
- सर्वे में 130 परिवार थे, मकान का आवंटन 182 परिवारों को कर दिया गया?
इसकी जांच करवाते हैं।