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अंग्रेजों के समय से दी जा रही है गलत जानकारी, उठा पर्दा तो सामने आई सच्चाई

8 वर्ष पहले
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भिलाई। छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों में से एक शिवनाथ नदी को लेकर छात्रों को गलत जानकारी दी जा रही है। सरकारी स्कूलों और प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों में शिवनाथ नदी का उद्गम स्थल राजनांदगांव जिले में अंबागढ़ चौकी के पास पानाबरस पहाड़ी को बताया गया है, जबकि यह महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के गोडऱी गांव से निकलती है।

आश्चर्य की बात यह भी है कि राज्य सरकार के संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने शिवनाथ नदी का अध्ययन करवा कर 'संस्कृति सरिता शिवनाथ' पुस्तक भी प्रकाशित की थी। पिछले साल मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इसका विमोचन किया। इसके बावजूद यह गलती जारी है।

अंबागढ़ चौकी और पानाबरस के लोगों में इस तथ्य को लेकर कभी भ्रम नहीं रहा कि शिवनाथ नदी गोडऱी से निकलती है। पानाबरस के 74 वर्षीय कोटवार बाबूदास मानिकपुरी बताते हैं कि उन्होंने भी 40 के दशक में कक्षा चौथी के भूगोल में यही पढ़ा था कि शिवनाथ नदी पानाबरस की पहाडिय़ों से निकलती है।

क्या लिखा है किताब में
छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12 वीं की किताब 'प्रबोध भूगोल' की इकाई 10 पृष्ठ 329 में लिखा है-'शिवनाथ का उद्गम राजनांदगांव जिले के अंबागढ़ तहसील से 625 मीटर ऊंची पानाबरस पहाड़ी से हुआ है, जो अपने उद्गम स्थल से 40 किमी की दूरी तक उत्तर की ओर बहकर बिलासपुर जिले की सीमा में पूर्व की ओर बहते हुए शिवरी नारायण के निकट महानदी में विलीन हो जाती है।'

यह है सच्चाई
शिवनाथ नदी गढ़चिरौली जिले की कोटगुल तहसील में गोडऱी गांव के समीप खेतों से निकलती है। अंबागढ़ चौकी से गोडऱी करीब 40 किमी की दूरी पर है और राजनांदगांव से इसकी दूरी 90 किमी के आसपास है। फिलहाल इस मौसम में उद्गम स्थल बिल्कुल सूखा है।19 वीं शताब्दि की शुरूआत में नदियों के उद्गम स्थल को लेकर गंभीरतापूर्वक अध्ययन नहीं हुआ था। इसलिए अंग्रेजी शासन काल में शिवनाथ नदी का उद्गम स्थल त्रुटिवश अंबागढ़ चौकी के समीप पाना बारस पहाड़ी दर्ज किया गया।
प्रो. लक्ष्मीशंकर निगम,भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व के ज्ञाता

मैं नहीं बता पाऊंगा कि हमने किस आधार पर शिवनाथ नदी का उद्गम पानाबरस की पहाड़ी लिखा है। पुस्तक में शिवनाथ के 40 किमी बह कर बिलासपुर में मिलने वाला तथ्य त्रुटिवश आ गया है।
डॉ. राजशेखर, 'प्रबोध भूगोल' के एक लेखक

गलती की यह है वजह
दरअसल अंग्रेजों के शासनकाल में चंद्रपुर से दुर्ग तक का क्षेत्र चांदा तहसील में आता था। तब पानाबरस और कोटगुल की जमींदारी को एक माना जाता था। इसलिए कोटगुल से निकलने वाली शिवनाथ नदी को पानाबरस में दर्ज किया गया।

सुधारी जाए गलती
पानाबरस की पहाडिय़ों से ही शिवनाथ नदी निकलती है। इस संबंध में कोई भ्रम नहीं है। यह गलती सुधारी जानी चाहिए।
कामता प्रसाद वर्मा, 'संस्कृति सरिता शिवनाथ' के लेखक