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डाउनलोड करेंभिलाई. बोकारो स्टील प्लांट में 15 कर्मियों की भर्ती में हुए फर्जीवाड़े मामले में बीएसपी के रिटायर्ड जीएम आरके नरूला भी फंस गए हैं। धनबाद सीबीआई मामले में जिन 20 से अधिक लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षडयंत्र करने व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का अपराध दर्ज किया है, उनमें आरके नरूला भी हैं। सीबीआई की टीम ने मंगलवार को भिलाई में उनके सेक्टर-9 निवास में तलाशी ली। दिनभर चले तलाशी अभियान में टीम को क्या हाथ लगा इसका पता तो नहीं चल पाया है। सूत्रों की माने तो कुछ दस्तावेज जब्त किए गए हैं जिन्हें धनबाद भेजा जाएगा।
बोकारो प्लांट के दिल्ली व मुंबई में भी दफ्तर हैं। बताया गया कि इन दफ्तरों में प्रोजेक्ट डिवीजन में कर्मियों की आवश्यकता बता कर वर्ष 2006-07 में बोकारो प्लांट प्रबंधन की ओर से दो अलग-अलग केटेगरी में कुल 15 पदों के लिए मुंबई व दिल्ली के एक अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया गया।
विज्ञापन में कहीं भी सेल का जिक्र नहीं था। पोस्ट बाक्स नंबर भी गलत दिया गया। इसके चलते 16 लोग ही सही पते पर आवेदन भेज सके। ये वही आवेदन थे जिन्हें नौकरी में रखने के लिए सारी कवायद की गई थी। बाद में इंटरव्यू के लिए कमेटी का गठन भी किया गया। कमेटी से 15 अभ्यर्थियों के चयन को हरी झंडी मिलने पर बोकारो प्लांट में उन्हें ज्वाइन करा दिया गया।
बताया गया कि भर्ती की पूरी प्रक्रिया इतने चुपके से की गई थी कि बोकारो के बेरोजगारों को इसकी भनक भी लगी। यहां तक बोकारो के एमडी के बाद के बड़े अधिकारियों तक को इस भर्ती की जानकारी नहीं थी। जब अभ्यर्थी ज्वाइन करने बोकारो प्लांट पहुंचे तब प्लांट के अधिकारियों को भर्ती की जानकारी हुई।
विजिलेंस देख चुकी है
बताया गया कि गुपचुप भर्ती का मामला सामने आने के बाद सेल ने विजिलेंस इंक्वायरी भी कराई। इसमें फर्जीवाड़े की बात सही पाए जाने पर दोषी अधिकारियों का इंक्रीमेंट भी रोका गया था। इसके बाद मामला रफा-दफा हो गया।
नरूला ऐसे आए जद में
जिस समय बोकारो प्लांट में भर्ती की प्रक्रिया चल रही थी उस दौरान जीएम पीएंडए आरके नरूला थे। चयन प्रक्रिया से संबंधित फाइलों में उन्होंने भी हस्ताक्षर किए हैं। इसके चलते सीबीआई ने चयनित अभ्यर्थियों के साथ सेल के जिन अधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया उनमें आरके नरूला को भी आरोपी बनाया गया।
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