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संगठनों की सूची दरकिनार, पार्षद टिकट नेताओं की सिफारिश पर ही

7 वर्ष पहले
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रायपुर। करीब दो माह पहले भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों ने पार्षद प्रत्याशियों के लिए जिला और शहर संगठनों के स्तर पर उम्मीदवारों के पैनल बनाने का काम शुरू किया और शुक्रवार तक इन्हें एक-दो नामों पर समेट भी लिया, लेकिन खबर है कि ऐन वक्त पर दोनों ही दलों में संगठन की ओर से तैयार सूचियां फाइलों में बंद हो गई हैं।
भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही दलों में इशारा हो गया है कि पार्षद के टिकट रायपुर की चार सीटों के विधायकों, पिछले चुनाव में हारे हुए प्रत्याशियों अथवा बड़े नेताओं की सहमति से तय किए जाएं। शुक्रवार को देर रात दोनों ही दलों ने रायपुर के 70 वार्डों की उम्मीदवारी पर विचार शुरू किया। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान संगठन और पदाधिकारियों की ओर से तैयार की गई सूची में उन्हीं नामों पर विचार किया गया, जो विधायकों अथवा हारे उम्मीदवारों तथा बड़े नेताओं की सूचियों में कॉमन थे।

राजधानी के सभी 70 वार्ड में पार्षदों के नामों के कई पैनल तैयार किए गए थे। दोनों ही दलों की ओर से पिछले दो महीने से लगातार प्रचारित किया गया कि चुनावी सर्वे, जमीनी संगठनों की रिपोर्ट तथा शहर-जिले के आला पदाधिकारियों की रिपोर्ट ही टिकट का आधार बनेगी।
इस आधार पर सभी बड़े नेता दो दिन पहले तक पार्षद के उम्मीदवारों को यही सलाह देते रहे कि वे संगठन द्वारा बनाए जा रहे पैनल में अपना नाम जुड़वाएं, तभी ऊपर विचार होगा। लेकिन शुक्रवार को दोपहर के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों में यह बात तेजी से फैली कि संगठन की सूचियां दरकिनार कर दी गई हैं तथा टिकट बांटनेवाली समितियों ने नए मापदंड तय कर दिए हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों में सहमति बन गई है कि संबंधित वार्ड के विधायकों के साथ-साथ हारे प्रत्याशियों की पसंद को तरजीह दी जाएगी।
ग्रामीण में वार्ड और विवाद, दोनों नहीं

रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में राजधानी के केवल 6 वार्ड ही आते हैं। इसलिए दोनों ही दलों में यहां विवाद की स्थिति नहीं है। ग्रामीण के विधायक सत्यनारायण शर्मा तथा उनसे चुनाव हारनेवाले भाजपा उम्मीदवार नंदे साहू की ओर से की गई अनुशंसाएं ही यहां टिकट का आधार बनेंगी। इस बीच, कांग्रेस में इस बात पर भी सिद्धांतत: सहमति बन गई है कि रायपुर के मुस्लिम बहुल वार्डों के उम्मीदवार पूर्व मंत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर की सहमति से ही तय किए जाएंगे।
43 वार्ड दो मंत्रियों के हवाले

रायपुर दक्षिण विधानसभा में सबसे ज्यादा 22 वार्ड आते हैं। पश्चिम विधानसभा में 21 वार्ड आते हैं। माना जा रहा है कि भाजपा इन वार्डों में इन मंत्रियों की पसंद को ही आधार बनाकर पार्षद के टिकट फाइनल करने जा रही है। पता चला है कि दोनों ही मंत्रियों की ओर से पूरे नाम तय कर लिए गए हैं तथा इसे विचारार्थ संगठन को सौंप दिया गया है। इसके बाद, इन क्षेत्रों से संगठन द्वारा तैयार की गई सूची भी फाइलों में बंद कर दी गई है। उधर, कांग्रेस में पश्चिम के वार्डों के लिए हारे हुए प्रत्याशी उपाध्याय ने भी सूची बनाई है। लेकिन उनकी सूची में से कई वार्डों में पार्टी के ही कई नेताओं ने सवाल उठा दिए हैं। रायपुर दक्षिण से पिछला चुनाव हारनेवाली डा. किरणमयी नायक ने भी वहां के वार्डों में अपनी पसंद-नापसंद से पार्टी को अवगत करा दिया है। पता चला है कि महापौर होने के नाते वह अपनी सूची फाइनल कराने का दबाव भी बनाए हुए हैं। कांग्रेस संगठन ने भी इस क्षेत्र की सूची तैयार की है लेकिन उसे भी बस्ताबंद किया जा सकता है।