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निकाय चुनाव : जाति के समीकरण में फंसे कई वार्ड, पार्टियां चिंतित

7 वर्ष पहले
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(सांकेतिक फोटो)
रायपुर. नगरीय निकाय चुनाव के आरक्षण के बाद वार्डों में नया समीकरण बन गया है। आरक्षण में सामान्य होने वाले वार्डों में भले ही दावेदारों की फौज खड़े हो गई है, लेकिन सामान्य से अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित होने वाले वार्ड अभी से कांग्रेस और भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।

दरअसल इन वार्डों को लेकर किसी को कोई अनुमान नहीं था। इस वजह से आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को लेकर किसी तरह की खोजबीन नहीं की गई थी। अब इन वार्डों में उम्मीदवार को लेकर दोनों पार्टियों में मंथन शुरू हो गया है। पुराने दिग्गज पार्षदों के वार्ड आरक्षित होने के बाद उन्होंने दावेदारों के नाम आगे करने से खुद को किनारे कर लिया है। प्रारंभिक सर्वे में एक भी नाम सामने नहीं आने की वजह से दोनों पार्टियों के नेताओं के होश उड़े हुए हैं।

नगर निगम की राजनीति में खासा दखल रखने वाले पांच बार के पार्षद दीनानाथ शर्मा का दानवीर भामाशाह वार्ड सामान्य से सीधे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया है। पिछली बार यह त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। कांग्रेस से श्रीकुमार मेमन, भाजपा से विनोद अग्रवाल और शर्मा निर्दलीय चुनाव लड़े थे। बेहद संवेदनशील चुनाव में इस वार्ड से दीनानाथ ने जीत हासिल की थी। इस बार एससी के लिए वार्ड आरक्षित होने के बाद यहां से उम्मीदवारों की तलाश करने में ही महीना बीत जाएगा। दोनों ही पार्टी यहां से युवा उम्मीदवार खड़ा करने पर जोर दे रही हैं।

हर बार कड़ी टक्कर, इस बार माहौल शांत

रानी लक्ष्मी बाई वार्ड में देवेंद्र नगर का एक बड़ा हिस्सा आने के साथ ही आसपास के दो वार्डों से सीधे जुड़ा हुआ है। वार्ड में हर बार रोचक मुकाबला होता है। पिछली बार भी कांग्रेस और भाजपा दोनों को पीछे करते हुए निर्दलीय जग्गू सिंह ठाकुर ने जीत हासिल की थी। वार्ड आरक्षित होने के बाद वे राजीव गांधी वार्ड की ओर रूख कर रहे हैं। उनके बाद इस वार्ड से कौन दावेदार होगा इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एससी जाति के लोग कम होने की वजह से फिलहाल यहां कोई नाम सामने नहीं आ रहा है।
पिछली बार दो उम्मीदवार, इस बार वो भी नहीं
मुस्लिम बहुल इलाका पं. भगवती चरण शुक्ल वार्ड में पिछली बार ओबीसी महिला के लिए आरक्षित था। ये ही एकमात्र वार्ड था जहां बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर थी। यहां से किसी ने भी न तो दावेदारी की और न ही निर्दलीय चुनाव लड़ा। अनारक्षित वर्ग के लोग ज्यादा होने की वजह से दूसरी पार्टियों को यहां से महिला ओबीसी के दावेदार ही नहीं मिले। इस बार ये वार्ड एससी वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। दोनों ही पार्टियों को यहां से उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं।