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सीबीआई खोलेगी फर्जीवाड़े का राज, होगा पर्दाफाश

9 वर्ष पहले
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रायपुर। फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकों से साढ़े तीन करोड़ रुपए के बैंक लोन देने के मामले की जांच सीबीआई करेगी। फर्जीवाड़े में बैंक प्रबंधन की भूमिका संदेह के घेरे में है। जांच एजेंसी जालसाजों से सांठगांठ करने वाले बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों को बेनकाब करेगी।
सीबीआई के अधिकारियों ने इस मामले में विशेष अनुसंधान सेल से जानकारी मांगी है। सेल अभी-भी तथ्य जुटा रहा है। सेल के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद पूरा मामला सीबीआई को सौंप दिया जाएगा।
दैनिक भास्कर द्वारा बैंकों में हुए इस फर्जीवाड़े को उजागर करने के बाद सीबीआई हरकत में आई है। विशेष अनुसंधान सेल की अब तक की जांच में फर्जीवाड़े के सात ऐसे केस सामने आए हैं। इनमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन लेने की कोशिश की गई। जालसाज चार बैंकों से लोन स्वीकृत कराने में कामयाब भी रहे।
तेलीबांधा के दो निजी बैंकों से क्रमश: 70 लाख व सवा दो करोड़ निकाले जा चुके हैं। इसके अलावा देवेंद्रनगर स्थित बैंक से 60 लाख व सिविल लाइंस से 20 लाख रुपए का लोन सैंक्शन कराया जा चुका है।
इसलिए बैंकों की भूमिका है जांच के घेरे में
3 बैंकों के लोन पास करने की प्रक्रिया में पुलिस को प्रबंधन की भूमिका पर शक है। विशेष सेल की जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि कमीशन खाकर फर्जी दस्तावेजों की अनदेखी की गई। बाद में उनके आधार पर लोन स्वीकृत कर दिया गया। 70 लाख व सवा दो करोड़ के लोन में दो सीए की फर्जी बैलेंस शीट और आईटी रिटर्न जमा किए गए। उसके बाद भी लोन स्वीकृत कर दिया गया। एक केस में लोन मांगने वाले ग्राहक का पैनकार्ड और वोटर आईडी फर्जी निकल चुकी है।
घपला 50 लाख से ज्यादा तो सीबीआई जांच
केंद्रीय विभागों और एजेंसी के साथ-साथ राष्ट्रीयकृत बैंकों में गड़बड़ी होने पर सीबीआई जांच करती है।
50 लाख रुपए से ज्यादा लोन देने-लेने या आर्थिक धांधली पर भी जांच की जिम्मेदारी सीबीआई पर आ जाती है।
इससे कम के मामलों में अगर पुलिस के पास एफआईआर नहीं की गई, तो शिकायत होने पर आरबीआई भी जांच करती है।
इन मामलों में दर्ज हुई एफआईआर
कर्नाटक बैंक ने जांजगीर-चांपा से 17 लाख का लोन दिया। बाद में उसी व्यक्ति को 60 लाख रुपए का दूसरा लोन दे दिया। बैंक से पैसे लेकर लोन लेने वाला आरोपी फरार।
आईडीबीआई बैंक ने टेकओवर के चक्कर में अनिल और सुनील अग्रवाल को दूसरा लोन दे दिया। यह लोन गिरवी रखे जाने वाले मकान का दस्तावेज लिए बिना ही जारी कर दिया गया।
दिसंबर-2011 में पंजाब नेशनल बैंक ने सीए अनुराग अग्रवाल के नाम से फर्जी बैलेंस शीट व लाखों के फर्जी आईटी रिटर्न के नाम से शिवेंद्र सिंह ठाकुर को 70 लाख का लोन जारी किया।
फरवरी-2012 में रचना एग्रो सीड्स के नाम से राजकुमार ने सीए महेंद्र अग्रवाल के नाम की फर्जी बैलेंस शीट दिखाकर पंजाब नेशनल बैंक में 40 लाख रुपए के लोन की अर्जी लगाई, जो बाद में पकड़ा गया।
जनवरी-2012 में महेंद्र कुमार अग्रवाल के नाम का फर्जी बैलेंस शीट जारी कर आरोपी शिवेंद्र ने अपना नाम शिवेंद्र दीक्षित बताकर 70 हजार के लोन की अर्जी लगाई थी, जिसे बाद में पकड़ा गया।
जानकारी मंगाई है..
राष्ट्रीयकृत बैंकों में गड़बड़ी की जांच सीबीआई करती है। मैंने लोन सेंक्शन करने के मामले की जानकारी मांगी है। रिपोर्ट प्राप्त होने पर जांच की जाएगी।
-एके मांझी, एसपी, सीबीआई
गड़बड़ी है तो कार्रवाई होगी
गड़बड़ी की अभी मेरे पास शिकायत नहीं आई है। लिखित शिकायत के बाद इन मामलों की जानकारी ली जाएगी। गड़बड़ी हुई है तो इस मामले में कार्रवाई होगी।
-निर्मल चंद,जीएम, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया(छग)
धांधली मिलीभगत से
मामले की जांच कर पुलिस ने बैंकों के खिलाफ ढेरों तथ्य जुटा लिए हैं। बैंकों की मिलीभगत के बाद ही लोन मंजूर करने में गड़बड़ी उजागर हुई है।
-आईएच खान, एएसपी, विशेष अनुसंधान सेल