रायपुर. छत्तीसगढ़ के जंगलों में लगी आग को बुझाने में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा मदद कर रहा है। वह अपने एक्वा सेटेलाइट की मदद से आग लगने की सूचना इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन हैदराबाद) को भेजता है।
फिर इसरो यही सूचना रायपुर में स्थित वन विभाग के फॉरेस्ट मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम (एफएमआईएस) को भेज देता है।
इसके बाद आग लगने की सूचना वन अधिकारियों के मोबाइल पर एसएमएस के जरिए भेज दी जाती है। अलर्ट की घंटी के साथ इसमें संबंधित क्षेत्र का पूरा ब्योरा रहता है। इससे विभाग आग को बेकाबू होने के पहले ही कंट्रोल कर लेता है। गौरतलब है कि गर्मी के मौसम में जंगल में आग लगने की घटनाएं काफी बढ़ जाती हैं।
एक छोटी सी चिंगारी भी कई हेक्टेयर क्षेत्र को अपनी चपेट में लेती है। इस अमेरिकी उपग्रह की खासियत यह है कि वह छोटी सी आग को भी तुरंत ट्रेस कर लेता है। एडिशनल डीएफओ आलोक तिवारी ने बताया कि विभाग 24 घंटे एफएमआईएस हैदराबाद स्थित इसरो के सेंटर से लगातार संपर्क में रहता है।
-एक नजर में
- छत्तीसगढ़ में कुल ग्रीन लैंड- 59,000 वर्ग किलोमीटर
- 2012 में कुल आग लगने की घटनाएं- 1389
- 2013 में अब तक आग लगने की घटनाएं- 1459
-राज्य में आग लगने के प्रमुख कारण
- महुआ कलेक्शन के लिए जंगल में रहने वाले लोग सूखी पतियों को जलाने के लिए ऐसा करते हैं।
- खेतों में फसल को नुकसान पहुंचाने वाली झाड़ियां जलाने से भी आग फैलती है।
दो जगह बुझाई आग
राजधानी के करीब लवन के सैंयाभाठा और कसडोल के अर्जुनी रेंज के जंगलों में पिछले महीने लगी आग को इसी सिस्टम से मिली सूचना के बाद बेकाबू होने से पहले ही बुझा लिया गया।
बेहतर नतीजे
छत्तीसगढ़ में इस सेवा को शुरू हुए तीन महीने हुए हैं। पहले चरण में ही बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं।
तपेष झा, मुख्य वन संरक्षक