रायपुर. खतरनाक किस्म के अपराधी आने वाले दिनों में किसी बड़े होटल के मास्टर शेफ या बड़े पार्लर के ब्यूटी एक्सपर्ट के रूप में नजर आ सकते हैं। ऐसा होने पर जरा भी हैरान न हों, क्योंकि जेल में जल्द ही कैदियों को शेफ और ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद कैदी मास्टर शेफ और ब्यूटीशियन बनकर जेल से बाहर निकलेंगे। उनके पास बाकायदा मानव संसाधन मंत्रालय की डिग्री रहेगी। उसे दिखाकर वे कहीं भी नौकरी पा सकेंगे।
शेफ और ब्यूटीशियन का कोर्स करने वाले बंदियों को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। यह इंस्टीट्यूट मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से संचालित किया जा रहा है। देश के कई शहरों में इसके सेंटर हैं। कुछ दिनों पहले ही राजधानी में इसका रीजनल सेंटर खुला है। अभी प्रदेश के किसी भी शहर में इसका इंस्टीट्यूट शुरू नहीं हुआ है।
जेल विभाग ने सबसे पहले इसके सेंटर के लिए आवेदन दिया। शासन से पांच सेंट्रल जेलों में सेंटर शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। रायपुर के अलावा बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर की सेंट्रल जेलों में सबसे पहले सेंटर शुरू किया जाएगा। जेल विभाग के डीआईजी डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि अभी जिन जेलों में इंफ्रास्ट्रक्चर हैं, वहीं सेंटर शुरू किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके बेहतर परिणाम आने पर इसका दायरा बढ़ाया जाएगा।
बंदियो से मंगवाया जा रहा बायोडाटा
जेल विभाग कैदियों का बायोडाटा मंगवा रहा है। कोर्स के हिसाब से शैक्षणिक योग्यता तय की गई है। इसके लिए न्यूनतम 8वीं पास होना अनिवार्य है। किसी कोर्स के लिए कक्षा 12वीं और किसी के लिए 10वीं पास होने की योग्यता तय है। इंस्टीट्यूट में छह माह से लेकर एक साल तक का कोर्स कराया जाएगा। इसी के अनुसार ट्रेनिंग कार्यक्रम तय किया जाएगा। प्रत्येक कोर्स के लिए 10-10 सीटें निर्धारित की गई हैं। जेल विभाग इसी आधार पर प्रत्येक जेल से कैदियों के नाम मंगवा रहा है।
कंप्यूटर, एसी सहित बहुत कुछ सिखाया जाएगा
इंस्टीट्यूट में कंप्यूटर, रेडियो, टीवी, वाशिंग मशीन और फ्रिज बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसके अलावा टेलरिंग, मैकेनिकल सहित कुल 20 अलग-अलग विधाओं की ट्रेनिंग मिलेगी। जेल में यह इंस्टीट्यूट शुरू करने के उद्देश्य के बारे में अधिकारियों ने बताया कि जेल को सुधार गृह के रूप में बदला जा रहा है। यह उसी दिशा में एक प्रयास है, ताकि कैदी जेल से बाहर निकलने के बाद अपने पैरों पर खड़े हो सकें। उन्हें रोजगार के लिए भटकना न पड़े।