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सालों में बहुत कुछ बदला लेकिन नहीं बदला 'पढ़ाई का ढर्रा'

9 वर्ष पहले
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रायपुर। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) आठ साल से हाई और हायर सेकंडरी का पाठ्यक्रम अपडेट नहीं कर सका है। लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा सत्र 2007 में तैयार किया गया पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जा रहा है। जबकि इतने अर्से में शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव हो चुके। प्रतियोगी परीक्षाओं के मापदंड भी बदल गए हैं। छत्तीसगढ़ बोर्ड से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को पुराना पाठच्यक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं झटका दे सकता है।
हालांकि माशिमं के तयशुदा मापदंडों के अनुसार हर पांच साल में 9वीं से 12वीं तक के पाठच्यक्रम को अपडेट करने का प्रावधान है। पिछली बार 2007-08 में पाठच्यक्रम अपडेट किया गया था। उस लिहाज से कोर्स को शिक्षासत्र 2011-12 में अपडेट किया जाना था। माशिमं के अधिकारी इस मामले में तीन साल पिछड़ गए।
2011 के शिक्षा सत्र तो दूर पाठ्यक्रम को अब तक अपडेट नहीं किया जा सका है। कोर्स अपडेट करने के ताजा हालात की छानबीन करने से पता चला है कि 16 जून से चालू होने वाले आगामी शिक्षा सत्र में भी हाई और हायर सेकंडरी के विद्यार्थियों को पूरा कोर्स ही पढ़ना पड़ेगा। माशिमं के अधिकारी विशेषज्ञों के माध्यम से कोर्स को अपडेट करने का काम पूरा ही नहीं करवा सके हैं।
अफसरों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में पिस रहे विद्यार्थी
माशिमं के कुछ अधिकारियों को समिति के सदस्यों से चर्चा करने पर पता चला कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की आपसी खींचतान का खामियाजा विद्यार्थी भुगत रहे हैं। इसकी शुरुआत 2010 में हुई।
तत्कालीन शिक्षा सचिव नंद कुमार ने एक आदेश जारी कर हाई और हायर सेकंडरी स्कूल के पाठच्यक्रम लेखन का सिस्टम बदल दिया। उन्होंने माशिमं से पाठ्यक्रम लिखने का अधिकार छीनकर राज्य शैक्षणिक अनुसंधान परिषद को दे दिया था। यह माशिमं के एक्ट के खिलाफ है।
सचिव के आदेश का तत्कालीन माशिमं अध्यक्ष विजयेंद्र ने विरोध किया। सचिव ने उनकी बात नहीं मानी। उसके बाद चिट्ठी-पत्री का दौर शुरू हुआ और यह किस्सा आगे बढ़ गया। इसी चक्कर में इतना समय गुजर गया। दो साल पहले माशिमं के अधिकारियों ने पाठ्यक्रम अपडेट करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करनी शुरू कीं। वह प्रक्रिया अब तक चल रही है।
गौरतलब है कि माशिमं को केवल पाठ्यक्रम बनाने का अधिकार है। पुस्तक लेखन का कार्य अनुसंधान परिषद करेगा।
आगामी सत्र में भी अपडेट होने की गुंजाइश नहीं
2013-14 शिक्षासत्र में भी पाठच्यक्रम बदलने की कोई गुंजाइश नहीं है। बोर्ड ने अभी पाठ्यक्रम तैयार नहीं किया है। बोर्ड पाठ्यक्रम बनाने के बाद पुस्तक लिखने के लिए अनुसंधान परिषद को भेजेगा। किसी भी पाठच्यक्रम की पुस्तक जल्दबाजी में नहीं लिखी जा सकेगी। पुस्तक लिखने के बाद परिषद उसकी सीडी बनाकर पाठ्य पुस्तक निगम को छपाई कराने के लिए सौंपेगा।
बोर्ड के लगभग पांच लाख विद्यार्थियों के लिए किताबें छापकर आने वाला सत्र शुरू होने के पहले स्कूलों तक पहुंचाना संभव नहीं है। इसी वजह से यह तय है कि आने वाले सत्र में भी विद्यार्थियों को पुराना पाठच्यक्रम पढ़ना होगा।
विसंगति
आठ साल से पुराना कोर्स पढ़ रहे विद्यार्थी, आगामी सत्र में भी अपडेट नहीं होगा पाठच्यक्रम। प्रतियोगी परीक्षाओं के मापदंड भी बदल गए, लेकिन माध्यमिक शिक्षा मंडल अपने पुराने र्ढे पर चल रहा है। हर पांच साल में 9वीं से 12वीं तक के पाठच्यक्रम को अपडेट करने का प्रावधान है। अधिकारियों के आदेश में उलझा हुआ है अपग्रेडेशन।
अंतिम रूप दे रहे
बोर्ड ने अपने स्तर पर प्रयास किए हैं। एक-दो कार्यशाला में पाठच्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उसके बाद कोर्स लिखने के लिए अनुसंधान परिषद को भेज दिया जाएगा।
-संजय जोशी,परीक्षा एवं परीक्षाफल समिति सदस्य