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संकट: शहर के 40 फीसदी इलाके टैंकरों से हो रही पानी की सप्लाई के भरोसे

8 वर्ष पहले
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रायपुर. गुरुगोविंद सिंह वार्ड में रोजगार मार्गदर्शन केंद्र के पीछे दोपहर 2 बजे। आसमान से जैसे आग बरस रही है। गर्म हवा के थपेड़ों के बावजूद रोड के किनारे भीड़ जमा है। छोटे बच्चे से लेकर महिलाएं और बुजुर्ग तक उसमें शामिल हैं। किसी के हाथ में बाल्टी तो किसी के हाथ में प्लास्टिक का ड्रम है। थोड़ी देर बाद पानी टैंकर की रोड में इंट्री हुई। सब फुर्ती से उठे और दौड़ पड़े। फिर वहां पानी के लिए होड़ मच गई।
यह दृश्य सुबह से शाम तक शहर की कई पॉश कालोनियों और मोहल्लों में नजर आता है। दरअसल तेज गर्मी पड़ने से बोर तो सूख ही गए हैं, नलों से भी सप्लाई नहीं हो रही है। टैंकर के जरिये शहर के 40 फीसदी इलाकों में पानी सप्लाई हो रही है। टैंकर भी दिन में बस एक बार पहुंच रहा है।
लोगों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि टैंकर आता है तो सब इस कोशिश में रहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा पानी उन्हें मिल जाए। इस चक्कर में लोग टैंकर में लगे नल से पानी मिलने का इंतजार नहीं करते बल्कि बच्चों को ऊपरी हिस्से में चढ़ाकर अपना पाइप उसमें डलवाकर उसके जरिये अपने ड्रम या बाल्टी में पानी जमा करवाते हैं।
दैनिक भास्कर की टीम ने शुक्रवार को दोपहर 12 से 2 बजे के बीच पंडरी इलाके का सर्वे किया। इस दौरान गुरु गोविंद सिंह वार्ड में रोजगार मार्गदर्शन कार्यालय के पीछे, मंडी गेट के पास और रेलवे क्रासिंग के पास टैंकर आने के बाद पैदा होने वाले हालात का सर्वे किया। इस दौरान तीनों स्थानों पर टैंकर से पानी लेने के लिए मारा-मारी जैसी स्थिति दिखी। लोगों का कहना था कि दिन में एक बार टैंकर आता है, जितना पानी ले सकते हैं लेने का प्रयास करते हैं। हमारे पास इसके अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
ज्यादा से ज्यादा पानी जुटाने लोगों में मची होड़
यहां चल रहे टैंकर
-टाटीबंध क्षेत्र
-गुढ़ियारी
- राजेंद्रनगर
-टिकरापारा
-कुशालपुर
-सांई नगर
-श्रीनगर
-तात्यापारा
-पंडरी
-श्यामनगर
-दलदल सिवनी
-गोगांव
चार साल में टैंकरों पर करोड़ों रुपए खर्च
पहले साल 6 करोड़
दूसरे साल 3 करोड़
तीसरे साल डेढ़ करोड़
चौथे साल 2 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव
यह है कमियां
-101 टैंकरों के लिए ठेका हुआ। आठ जोनों में 74 टैंकर दौड़ रहे हैं।
-गुढ़ियारी में सबसे ज्यादा 19 टैंकर चल रहे हैं।
-नलघर से चलने वाले टैंकर से वीआईपी की मांग पूरी की जा रही है।
-शादी-ब्याह के लिए भी टैंकर भेजे जा रहे।
- निजी बोर सूख गए हैं। इससे टैंकर की मांग बढ़ गई है।
ठेकेदारों की मोनोपली
जलावर्धन योजना अधूरी रहने से इस गर्मी में भी राजधानी टैंकरमुक्तनहीं हो रही है। इस बार नगर निगम ने ठेके की बजाय टैंकर किराए पर लिया है। ठेकेदारों की मोनोपली को खत्म करने के लिए पहली बार ई-टेंडर मंगाया गया था, लेकिन यह भी कारागर नहीं रहा।
समस्या पानी के दुरुपयोग के कारण
डिमांड के हिसाब से टैंकर भेजे जा रहे हैं। शहर में कहीं भी ऐसा नहीं है कि टैंकर न पहुंच रहा हो। 74 टैंकर 740 फेरा लगा रहे हैं। पानी के दुरुपयोग के कारण भी जरूरतमंदों को पानी नहीं मिल पाता। ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
तारण प्रकाश सिन्हा, कमिश्नर नगर निगम
हम तो पूरी कर रहे हैं डिमांड
नलघर से चलने वाले टैंकर से वीआईपी की डिमांड पूरी की जा रही है। शादी-ब्याह के लिए भी टैंकर भेजे जा रहे हैं। जोन कार्यालयों से चलने वाले टैंकर आम लोगों को भेजा जा रहा है।
पी राजेश नायडू, प्रभारी नलघर नगर निगम