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अंबेडकर की एमआरआई मशीन सुधारने में 40 लाख होंगे खर्च

7 वर्ष पहले
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रायपुर. अंबेडकर अस्पताल में स्ट्रेचर हादसे से एमआरआई मशीन में बड़ी खराबी आ गई है। स्कैनिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा है। इसे सुधारने के लिए 40 लाख का खर्च आएगा। इंजीनियरों की टीम ने मशीन की जांच के बाद खर्च का ब्योरा अस्पताल प्रशासन को सौंप दिया है। इतना भारी भरकम खर्च सुनकर अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। उनके पास मशीन सुधरवाने के लिए बजट नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज को मशीन सुधरवाने के लिए चिट्ठी लिख दी है।
अंबेडकर अस्पताल की एमआरआई मशीन हालांकि अभी वारंटी पीरियड में है। इसके बावजूद कंपनी ने फ्री सर्विस देने से मना कर दिया है। इंजीनियरों की टीम ने मशीन का परीक्षण करने के बाद कह दिया कि मशीन का हेड क्वाइल स्ट्रेचर के टकराने के कारण खराब हुआ है। उसी की वजह से स्कैनिंग नहीं हो रही है। यह लापरवाही का मामला है इसलिए मशीन को सुधारने की जिम्मेदारी कंपनी की नहीं है। अभी तक अस्पताल प्रशासन के अफसरों को यह उम्मीद थी कि मशीन की फ्री सर्विसिंग हो जाएगी। इस वजह से सभी बेफिक्र थे। अब अफसरों ने मशीन को सुधरवाने के लिए लिखा पढ़ी शुरू कर दी है। मेडिकल कॉलेज के डीन को चिट्ठी लिखकर हालात की जानकारी देने के साथ मशीन सुधरवाने का आग्रह किया गया है।
20 दिनों से बंद है मशीन, 50 दिन का वेटिंग नंबर मिल रहा
अंबेडकर अस्पताल की एमआरआई मशीन पिछले 20 दिनों से बंद है। इससे पूरा लोड अस्पताल की दूसरी मशीन पर आ गया है। वह मशीन करीब 10 साल पुरानी है। उसमें जांच करने में देरी होती है। दिनभर में 10-12 मरीजों की ही जांच हो पा रही है। इससे वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है। शनिवार को जिन मरीजों को एमआरआई के लिए लिखा गया, उन्हें 50 दिन का वेटिंग नंबर दिया गया है। इससे मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है।
कैसे खराब हुई करोड़ों की एमआरआई मशीन
8 सितंबर को न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती रामकुमारी की एमआरआई जांच के बाद वार्ड ले जाने को कहा गया। उसके पति साथ आए थे। वे कक्ष के बाहर रखा लोहे का स्ट्रेचर कमरे के भीतर ले गए। स्ट्रेचर को कमरे में ले जाते ही वह उसके पति के हाथ से छूटा और मशीन से चिपक गया। मशीन के पॉवरफुल चुंबक ने उसे खींच लिया। यह सबकुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को समझ नहीं आया। महिला उस समय मशीन पर लेटी हुई थी। वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे इलाज के लिए दिल्ली एम्स भेजना पड़ गया। अभी वह दिल्ली में है।
क्यों हुआ था ऐसा
एमआरआई मशीन में पॉवरफुल मैग्नेटिक रहता है। मशीन वाले कक्ष में किसी भी तरह का लोहे का सामान ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है। वहां व्हील चेयर और स्ट्रेचर भी प्लास्टिक की उपयोग की जाती है। यहां लापरवाही पूर्वक लोहे की स्ट्रेचर भीतर ले जाई गई और इतना बड़ा हादसा हो गया। एक ओर महिला की जान पर बन आई और दूसरी ओर मशीन खराब हो गई, इससे दर्जनों लोग प्रभावित हो रहे हैं।