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'आश्रम' में बच्चियों संग जब हो गया दुराचार तब कहीं जाकर जागा विभाग

9 वर्ष पहले
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रायपुर। कांकेर जिले के ग्राम झलियामारी में स्कूली छात्राओं के साथ बलात्कार की घटना से ट्राइबल विभाग सकते में हैं। विभाग के मंत्री केदार कश्यप व सचिव मनोज पिंगुआ विदेश दौरे पर हैं। समझा जा रहा है कि वे दौरा रद्द कर वापस लौट सकते हैं।
इधर, विभाग के अधिकारी गल्र्स हॉस्टलों में सुरक्षा सिस्टम को लेकर मंथन में जुट गए हैं। जल्दी ही सुरक्षा के नए दिशा-निर्देशों का फरमान जारी किया जाएगा।
आदिवासी हॉस्टल में छात्राओं के साथ बलात्कार की घटना ने पूरे प्रदेश में आग का काम किया है। इस वजह से प्रशासन
विशेष सतर्कता बरत रहा है। राज्य में विभाग के 1050 आदिवासी छात्रा हॉस्टल हैं।
मंत्रालय में न सिर्फ आदिम जाति कल्याण विभाग बल्कि उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, महिला पॉलीटेक्निक समेत उन सभी विभागों के बारे में नीति बना रहा है, जिनके हॉस्टलों में छात्राएं रहती हैं। उनके लिए नए सिरे से नियम-शर्तें बनाने विचार-विमर्श शुरू हो गया है। इनमें छात्रा हॉस्टलों में केवल महिला स्टाफ की नियुक्ति सबसे अहम बदलाव होगा। कहीं भी पुरुष कर्मचारी नहीं रखा जाएगा। हॉस्टल में रात में कोई भी पुरुष किसी भी वजह से नहीं ठहर सकेगा। नए ड्राफ्ट को अनुमोदन के लिए मुख्य सचिव के जरिए मुख्यमंत्री तक भेजा जाएगा।
अफसरों का मानना है कि सिस्टम में दोष की वजह से ही यह घटना घटी। हॉस्टलों की मॉनिटरिंग तक उच्च अधिकारी नहीं कर रहे थे। हालांकि उनका मानना है कि इस मामले में सीधे तौर पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार जो भी सख्त कार्रवाई की जा सकती थी वह कर दी गई है। आगे कानून को अपना काम करना है।
अफसरों ने सरकार को इसी बिंदु पर भरोसा दिलाया है। यह भी बताने की कोशिश की है कि मामले में पीड़ित व आरोपी सभी एक ही वर्ग के हैं। उनके समाज को भी प्रकरण की जानकारी थी।
मामला जैसे ही सरकार के सामने आया कड़ी कार्रवाई की गई है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस को घर बैठे भले ही बड़ा मुद्दा मिल गया है, लेकिन सरकार की तरफ से हुई त्वरित कार्रवाई से वह ज्यादा दिनों तक इसे गरम रखकर राजनीतिक लाभ नहीं उठा पाएगी।