तलाक लेने आए थे अदालत, साथ रहने का वादा करके वापस लौटे

8 वर्ष पहले
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रायपुर. मेगा लोक अदालत में शनिवार को देवेंद्रनगर का एक परिवार टूटने से बच गया। शक के चक्कर में पड़कर पति-पत्नी तलाक की कगार में पहुंच गए थे। उनका केस लोक अदालत में पेश किया गया। तलाक की वजह जानने के बाद अदालत ने उन्हें समझाया। दोनों को बात समझ आ गई। एक साल से चल रहा झगड़ा मिनटों में सुलझ गया। पति ने अदालत के सामने शक करने से तौबा कर ली। पत्नी भी नरम पड़ गई। उसने कहा- जैसा कहेंगे वैसा ही करूंगी और तलाक लेने आई दंपत्ति एक होकर लौटी।

रायपुर के न्यायालय में आयोजित लोक अदालत में करीब 14 हजार मामले पेश किए गए। इनमें रायपुर देवेंद्रनगर के राठौर परिवार का किस्सा दिलचस्प था। परिवार के बेटे का विवाह 2003 में हुआ था। शादी के बाद दो बच्चे हुए। साल भर पहले पति-पत्नी के बीच अचानक ही वो का चक्कर आ गया। पति को पत्नीके चरित्र पर शक होने लगा। उसे गलतफहमी हो गई कि उसकी पत्नी का झुकाव पड़ोसी की ओर बढ़ रहा है। इस बात को लेकर उनके बीच झगड़े होने लगे। रोज-रोज नोकझोंक होने लगी। नाराज पत्नी मायके चली गई। उसके रूठकर जाने के बाद रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों ने सुलह के प्रयास किए गए, लेकिन बात बनने की बजाए और बिगड़ गई। नौबत तलाक तक पहुंच गई। उनका मामला लोक अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों की उपस्थिति में बातें सुनी और उन्हें समझाया गया। दोनों ने अपनी गलती मानते हुए साथ रहने की सहमति दी।

14 हजार मामले आए

कोर्ट में पारिवारिक मामलों के अलावा क्राइम, बैंक, बीमा, बिजली, दुर्घटना दावा के लगभग 14 हजार मामले पेश किए गए। करीब साढ़े 12 हजार मामले प्री-लिटिगेशन के थे। आपसी सुलह के जरिये उन्हें सुलझाया।

लोक अदालत क्यों

लोक अदालतों का आयोजन आमतौर पर कोर्ट की पेंडेंसी कम करने के लिए किया जाता है। इसमें सालों से लंबित छोटे-छोटे मामलों को आपसी सुलह-समझौतों के जरिए निपटाया जाता है।

इससे एक तरफ पक्षकारों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर से छुटकारा मिलता है और कोर्ट में लंबित केस भी कम होते हैं।

16 करोड़ का दावा, 67 लाख मिले : मेगा लोक अदालत में बिजली से संबंधित दिलचस्प मामले पेश हुए। पावर कंपनी ने बिलों के बकाया और वसूली से संबंधित दस हजार से ज्यादा मामले लोक अदालत में पेश किए गए। बिजली कंपनी को 16 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी। ऐसा नहीं हो सका। दिनभर में केवल 591 मामलों में ही सुलह हो सकी और कंपनी को केवल 67 लाख ही मिल सके।