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अपनों ने जिन्हें ठुकराया, उनके दामन को खुशियों से भरेगा एक विकलांग जोड़ा

8 वर्ष पहले
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रायपुर। कोटा के संजीवनी वृद्धाश्रम में शनिवार शाम शहनाइयां गूंजेंगी। महेश और रामकली वृद्धाश्रम में सात फेरे लेंगे। शादी की सारी रस्में आश्रम के आंगन में ही पूरी की जाएंगी। फेरों के बाद रामकली का कन्यादान वृद्धाश्रम के बुजुर्ग करेंगे। बेटी को विदाई भी आश्रम से ही दी जाएगी। महेश और रामकली पैरों से विकलांग हैं। उनका वृद्धाश्रम से कोई नाता तो नहीं है, लेकिन उन्होंने वृद्धाश्रम के बुजुर्गों को सम्मान देने की यह अनूठी पहल की है।

रामकली और महेश खेमानी का परिवार विवाह और उनके फैसले से सहमत है। शादी के दिन रामकली सुबह से आश्रम पहुंच जाएगी। एक ओर उसेस जाने-संवारने की तैयारी होगी तो दूसरी ओर विवाह की वेदी सजेगी। शाम छह बजे लगन का समय तय किया गया है। एक घंटे पहले बारात आश्रम पहुंचेगी। शादी में आश्रम के वृद्ध घरातियों की तरह शरीक होंगे। महेश खेमानी का परिवार रायपुर का रहने वाला है।

महेश के परिवार ने शादी के निमंत्रण पत्र में लगन का स्थान संजीवनी वृद्धाश्रम लिखा है। सभी रिश्तेदारों को विवाह में शामिल किया जा रहा है। महेश के बड़े भाई पहलाज चिमनदास खेमानी ने बताया कि महेश और रामकली अंतरजातीय विवाह कर रहे हैं। विकलांगों ने एक तरफ अंतरजातीय विवाह कर समाज को जाति प्रथा से मुक्त होने का संदेश दिया है, वहीं वे वृद्धाश्रम में शादी कर अनूठी पहल कर रहे हैं।

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