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केबीसी के पास बांटे किसी और ने लेकिन घमासान सरकार में

7 वर्ष पहले
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रायपुर. कौन बनेगा महाकरोड़पति के शो में अमिताभ बच्चन ने पूरे राज्य को अभिभूत कर दिया, लेकिन उनके कार्यक्रम से ही वीवीआईपी पास को लेकर जो बवाल शुरू हुआ था, वह अब घमासान में तब्दील हो गया है। कार्यक्रम से पहले ये बात जमकर फैलाई गई थी कि पास देने का काम सरकार ने सीधे अपने हाथों में रखा है, इसलिए इसमें हुई गड़बड़ी के लिए एक बड़ा तबका सरकार को ही जिम्मेदार मान रहा है। लेकिन अब सच भी सामने आ रहा है।
जानकारों के मुताबिक केबीसी के आयोजकों ने राज्यभर में 2200 पास बांटे, जबकि सरकार को सिर्फ 825 पास ही दिए गए। इसके बाद एक वर्ग ने अफवाह फैलाई कि पूरे पास सरकार के पास हैं। फिर वही वर्ग मनमाने ढंग से आयोजकों की ओर से पास बांटता रहा। यहां तक कि सरकार के पास बेचने की भी बातें पहुंच रही हैं। सूत्रों के अनुसार पास बांटने में गड़बड़ी की शिकायतों से ताकतवर सत्ताधारी भी खफा हैं। शासन के आला नुमाइंदों को यह निर्देश भी हुआ है कि वे ऐसे कार्यक्रमों में हस्तक्षेप से बचें। विचार यह भी चल रहा है कि हर शो के आयोजक को पास वितरण के बजाय टिकट बेचने के निर्देश दिए जाएं, ताकि सरकार झंझट से बचें और मनोरंजन कर भी वसूला जाए।

सरकार का एक वर्ग इसलिए परेशान है क्योंकि राज्य में सचिव स्तर के आईएएस अफसरों तथा डीआईजी स्तर के आईपीएस के अलावा विधायकों तक को सामान्य हरे पास दिए गए। कुछ मंत्री भी इक्का-दुक्का वीआईपी पास भेजने से इतने नाराज हुए कि कार्यक्रम तक से दूरी बना ली। जबकि वीवीआईपी रेड पास के साथ कई ऐसे लोग कुर्सियों पर नजर आए, जिनकी पात्रता को लेकर शहर में जमकर चर्चा है।
किसने फैलाई अफवाह

जिस दिन तय हुआ कि रायपुर में 28 सितंबर को केबीसी होगा और अमिताभ आएंगे, उसी दिन से एक वर्ग ने अफवाह फैला दी कि शो सरकार ने अपने हाथों में ले लिया है। चर्चा को बल देने के लिए कहा गया कि एक कद्दावर मंत्री के भाई इस शो को ला रहे थे, इससे सरकार नाराज हो गई और आयोजन अपने हाथों में लिया। यही वजह है कि जिन लोगों को मनमाफिक पास नहीं मिले, वे सरकार को कोस रहे हैं जबकि आयोजक बदनामी से बच गए।
पास का गणित
आयोजकों के पास 2200

- इनमें वीवीआईपी (रेड) 375
- सामान्य ग्रीन पास 1825

सरकार के पास 825

- इनमें वीवीआईपी (रेड) 150
- सामान्य ग्रीन पास 675
राज्य के हितों पर असर?

आईपीएल और आईसीएल जैसे मैचों तथा केबीसी जैसे कार्यक्रमों से रायपुर का नाम पूरे देश के नक्शे में उभरा। जानकारों के मुताबिक इन कार्यक्रमों में सरकार की रुचि भी इतनी ही है कि छत्तीसगढ़ देश के नक्शे में उभरे। लेकिन इन सभी कार्यक्रमों में पास वितरण जैसे छोटे इश्यू ने हर बार सरकार की ही किरकिरी की है। इस बार भी बची-खुची कसर निगम और सोनी के बीच पैदा हुए वसूली के मुद्दे ने पूरी कर दी।