एक-एक बूंद का ऑनलाइन हिसाब

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

रायपुर. शहर में अब पानी की हर बूंद का हिसाब रखा जाएगा। ऐसा संभव होगा, सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन सिस्टम (स्काडा) से जो फिल्टर प्लांट से 30 टंकियों और वहां से घरों तक पहुंच रहे पानी की मॉनीटरिंग करेगा। इससे टंकी ओवरफ्लो और लीकेज के कारण रोजाना बर्बाद होने वाले लाखों लीटर पानी को भी बचाया जा सकेगा। चंडीगढ़ और अहमदाबाद समेत देश के कुछ शहरों में पहले से यह सिस्टम काम कर रहा है। रावाभांठा के फिल्टर प्लांट में स्काडा का कंट्रोल रूम बनाया जाएगा।


छह करोड़ रुपए की लागत वाले इस अत्याधुनिक सिस्टम से पानी का रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज होता जाएगा। टंकियों में पानी का लेवल क्या है, मेन राइजिंग पाइप लाइन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन में प्रेशर कितना है, इसकी जानकारी अपडेट होती रहेगी। फिल्टर प्लांट से टंकियों में पहुंच रहा पानी ओवरफ्लो होता है तो प्रेशर से वॉल्व खुद-ब-खुद बंद हो जाएंगे। डिस्ट्रीब्यूशन लाइन में पानी का प्रेशर कम होने की जानकारी भी तत्काल मिलेगी।


ओवरफ्लो और लीकेज से पानी की बरबादी रुकेगी

सालाना बचाएंगे करोड़ों रुपए का पानी

अफसरों का दावा है कि स्काडा सिस्टम लगने के बाद फिल्टर प्लांट से जितना पानी टंकियों के लिए रिलीज हुआ, उतना ही पाइप लाइन से घरों तक पहुंचेगा। यानी किसी स्तर पर बर्बादी की गुंजाइश नहीं। स्काडा सिस्टम हर साल करोड़ों रुपए की बचत करवाएगा। फिल्टर प्लांट से टंकियों में भेजा जा रहा 32 लाख लीटर पानी बिना लीकेज, मेन राइजिंग लाइन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के माध्यम से नलों तक पहुंचेगा। पानी की बचत से गर्मियों में शहर की प्यास बुझाने के लिए टैंकरों की जरूरत नहीं पड़ेगी। गौरतलब है कि टैंकरों से पानी सप्लाई पर इस साल दो करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। तीन साल पहले यह राशि छह करोड़ रुपए थी


इन टंकियों की होगी निगरानी
बैरनबाजार, ईदगाहभाटा, देवेंद्र नगर, गुढिय़ारी, राठौर चौक, डंगनिया, राजेंद्र नगर, तेलीबांधा, शंकर नगर, खमतराई, गंज, तिलक नगर, टिकरा पारा, भनपुरी, मोवा, मठपुरैना, लालपुर, अमलीडीह, खम्हारडीह, सड्ढू, दलदल सिवनी, भाटागांव, चंगोराभाठा, सरोना, टाटीबंध, कबीर नगर, कोटा, गोगांव और जरवाय बस्ती। ये वे क्षेत्र हैं जहां पर नगर निगम की पानी टंकी बनी हुई हैं।


कम से कम साल भर का वक्त तो लग ही जाएगा

पानी के घटते-बढ़ते दबाव को देख वॉल्व से उसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसी महीने होने वाली मेयर इन काउंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जा रहा है। इस सिस्टम को तैयार करने और उसके संचालन का काम भी निजी एजेंसी को दिया जाएगा, क्योंकि फिलहाल निगम के पास तरह के संसाधन नहीं हैं। निगम के सूत्रों का कहना है कि अगर मंजूरी मिल भी जाती है, तो भी सिस्टम चालू करने में साल भर लग जाएगा।


छह करोड़ का प्रोजेक्ट
॥ छह करोड़ का स्काडा प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इससे पता चलेगा कि टंकियों में किस लेवल तक पानी जा रहा है। टंकी से पानी ओवरफ्लो होने पर वॉल्व तत्काल बंद हो जाएंगे। पानी के प्रेशर से लेकर हर बूंद की जानकारी मिल जाएगी। बेहतर मॉनीटरिंग से ओवरफ्लो और लीकेज के कारण होने वाली पानी की बर्बादी को रोकने में मदद मिलेगी।""
एके मालवे, कार्यपालन अभियंता, जल विभाग, नगर निगम