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गॉड पार्टिकल रिसर्च जैसा भारत का सबसे बड़ा एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट तैयार

9 वर्ष पहले
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भिलाई। स्विटजरलैंड के गॉड पार्टिकल (हिग्स बोसोन) अनुसंधान परियोजना की तरह ही भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) वातावरण में मौजूद अति सूक्ष्म न्यूट्रिनो की स्थिति का पता लगाने के लिए तमिलनाडु में इंडिया न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (आईएनओ) स्थापित करने जा रहा है। देश की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में भिलाई की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसकी सुरंग बनाने के लिए उच्च क्षमता वाले साफ्ट आयरन मैग्नेटिक मटैरियल युक्त विशेष प्रकार की स्टील प्लेट का निर्माण भिलाई इस्पात संयंत्र में होगा। बीएसपी ने बतौर ट्रायल 100 टन स्पेशल प्लेट की पहली खेप बार्क को भेज भी दिया है। अब उन्हें इस पूरी परियोजना में लगने वाले 50 हजार टन प्लेट की वाणिज्यिक आपूर्ति के आदेश का इंतजार है। इस संबंध में सेल और बार्क के बीच लगभग दो साल पहले समझौता हुआ था। सेल की रांची स्थित आरडीसीआईएस (रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर ऑफ आयरन एंड स्टील) की प्रयोगशाला में बतौर परीक्षण इस स्पेशल स्टील का निर्माण किया गया। भिलाई स्टील प्लांट ने इसके औद्योगिक उत्पादन की चुनौती को स्वीकार किया। इसके बाद बार्क और मुंबई के टीआईएफआर (टाटा इंस्टीटच्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च) के विशेषज्ञों की टीम ने कई बार भिलाई स्टील प्लांट का दौरा किया। डिटेल प्रोटोकाल बनाकर प्लेट की केमेस्ट्री को अंतिम रूप दिया गया। इसके बाद बार्क ने बीएसपी प्रबंधन को एक्सपेरिमेंटल तौर पर प्लेट बनाकर सैंपल भेजने कहा था। बीएसपी ने बार्क को उनकी वांछित क्वालिटी की स्पेशल प्लेट का निर्माण कर भेज दिया है। अब प्रबंधन को फाइनल आर्डर की औपचारिकताएं पूरी होने का इंतजार है। कैसा होगा प्रोजेक्ट : आईएनओ देश का सबसे बड़ा एक्सपेरिमेंटल पार्टिकल प्रोजेक्ट होगा। ऑब्जर्वेटरी तमिलनाडु के मसीनागुड़ी से करीब पांच किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में नीलगिरी पर्वत के बीच स्थापित होगी। इसका निर्माण पहाड़ के अंदर 1300 मीटर की लंबाई में इस्पात की मजबूत दीवारों वाली एक मैग्नेटिक सुरंगनुमा गुफा के रूप में किया जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार वातावरण में मौजूद अति सूक्ष्म न्यूट्रिनो पार्टिकल्स अपनी तीव्र क्षमता के कारण सुरंग में प्रवेश कर जाएंगे। इसके बाद सुरंग में स्थापित उपकरणों की मदद से न्यूट्रिनो पार्टिकल्स का अध्ययन कर प्रकृति को जान सकेंगे। जानकार इसे स्विटजरलैंड के गॉड पार्टिकल या हिग्स बोसोन से भी आगे की परियोजना मान रहे हैं। परियोजना पूरा होने के बाद आएनओ विश्व का सबसे बड़ा मैग्नेट हाउस होगा। इसमें स्विटजरलैंड की प्रयोगशाला के सापेक्ष 12500 टन से भी चार गुना अधिक चुंबकत्व होगा। क्या है न्यूट्रिनो न्यूट्रिनो उन बुनियादी कणों में शामिल है जिनसे ब्रrांड का निर्माण हुआ है। न्यूट्रिनो इलेक्ट्रॉन से मिलता-जुलता सब एटॉमिक पार्टिकल है, लेकिन यह इलेक्ट्रॉन की तरह ऋणात्मक आवेशित कण नहीं है। यह न्यूट्रल होता है। इसकी गति प्रकाश की गति के बराबर यानी 1, 86,000 मील प्रति सेकंड है। 50 हजार टन प्लेट की जरूरत न्यूट्रीनो डिटेक्टर फेब्रीकेटिंग सुरंग के लिए 50 हजार टन उच्च क्षमता वाले साफ्ट आयरन मैग्नेटिक मटैरियल युक्त इस्पात की चादरों (प्लेट) की जरूरत होगी। एक प्लेट की मोटाई 50 मिलीमीटर होगी। पहले फेज में एक प्रोटोटाइप बनाकर उसमें परीक्षण किया जाएगा। इस विशेष प्लेट की कीमत आम प्लेट से दोगुनी होगी। आम प्लेट की कीमत करीब 40,000 रुपए प्रति टन है। आईएनओ में इस्तेमाल होने वाली प्लेट 80,000 से 1 लाख रुपए प्रति टन की होगी। चल रहा है काम न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसके लिए स्टील प्लेट की आपूर्ति के संबंध में सेल से चर्चा हुई थी। ट्रायल के तौर पर प्लेट मिली है। अभी कॉमर्शियल आर्डर नहीं दिया गया है।॥ नब के. मंडल, प्रवक्ता इंडिया बेस्ड न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी व सीनियर प्रोफेसर टीआईएफआर

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