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पंद्रह दिन तक नहीं मिल रहे सिलेंडर, ऑनलाइन के बाद सप्लाई गड़बड़ाई

7 वर्ष पहले
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रायपुर. रसोई गैस सिलेंडरों की बुकिंग जब से मोबाइल के जरिये शुरू की गई है तब से सप्लाई का पूरा सिस्टम ही ध्वस्त हो गया है। 15-15 दिन लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। ऑन लाइन बुकिंग शुरू करने के साथ ही 48 घंटे के भीतर सिलेंडर ग्राहक के घर पहुंचाने के लिए कागजों में फूलप्रूफ प्लान बनाया गया। लेकिन हकीकत बिलकुल अलग है। दो-दो, तीन-तीन बार बुकिंग करवाने के बावजूद छह-सात दिन से पहले सिलेंडर घर में नहीं पहुंच रहे हैं। भास्कर ने शहर की सभी 32 गैस एजेंसियों के वेब पोर्टल की जांच की। उनके वेब पोर्टल का रिकार्ड ही दावों की पोल खोल रहा है कि एक भी एजेंसी 48 घंटों में सिलेंडर लोगों के घर नहीं पहुंचा रही है। पेट्रोलिंग कंपनियां सिस्टम बनाकर चुप बैठी है और प्रशासन के पास मॉनीटरिंग का कोई फार्मूला नहीं। गैस एजेंसी वाले मनमानी कर रहे और लोग सिलेंडरों के लिए तरस रहे हैं।
भास्कर ने ऑन लाइन सिस्टम की पड़ताल की इस दौरान कई ऐसी जानकारी सामने आई जो ग्राहकों को मालूम ही नहीं है। पेट्रोलियम कंपनी ने यह प्रावधान रखा कि सिलेंडर की बुकिंग करवाने के थोड़ी ही देर बाद ही ग्राहक के मोबाइल पर एसएमएस के जरिये बुकिंग नंबर आ जाए। यह सिस्टम इसलिए बनाया गया कि लोगों को यह मालूम हो जाए कि उनके घर सिलेंडर कब पहुंचेगा।
एक-दो एजेंसी को छोड़कर किसी भी एजेंसी के द्वारा लोगों को एसएमएस के जरिये बुकिंग नंबर नहीं दिया जा रहा है। निर्धारित समय पर सिलेंडर नहीं मिलने पर लोग जब शिकायत करते हैं तो उन्हें सही जवाब भी नहीं दिया जाता। भास्कर ने खुद एक-दो एजेंसियों में कॉल किया। फोन उठाने वाले ने दो टूक में कहा-बुकिंग हो गई है सिलेंडर घर पहुंच जाएगा, लेकिन कब पहुंचेगा इसका जवाब वे भी नहीं देते। समय पर सिलेंडरों की डिलीवरी नहीं होने की वजह से पूरे हाईटेक सिस्टम पर ही अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

सुविधा के लिए बनाया गया यह सिस्टम अब कई मुसीबतें खड़े कर रहा है। पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से गोदाम से सिलेंडरों के डिलीवरी बंद कर दी गई है, इसलिए लोग सीधे वहां जाकर भी सिलेंडर हासिल नहीं कर पा रहे हैं।
पहुंचकर करवानी पड़ रही है बुकिंग
जिले की एक भी एजेंसी ने अपने शत-प्रतिशत ग्राहकों का मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नहीं किया है। पता चला है कि रायपुर शहर सहित ग्रामीण इलाकों के 20 फीसदी ग्राहक अभी भी एजेंसी के दफ्तर पहुंचकर सिलेंडर की बुकिंग करवा रहे हैं।
प्रशासन चुप बैठकर देख रहा
गैस एजेंसी वाले एसएमएस बुकिंग के बाद ग्राहकों को कब और कितने सिलेंडर की डिलीवरी कर रहे हैं इसकी निगरानी करने का खाद्य विभाग के पास कोई सिस्टम नहीं है। ऑनलाइन बुकिंग की मॉनिटरिंग और सर्वर का काम पेट्रोलियम कंपनियों के मुंबई मुख्यालय से होने की वजह से खाद्य विभाग के अफसरों को मालूम ही नहीं होता है कि लोगों को सिलेंडर बुकिंग के कितने दिनों के बाद मिल रहा है।
आगे की स्लाइड में पढ़िए कलेक्टर का आदेश रद्दी में।