बिलासपुर. बिलासपुर से 15 किलोमीटर दूर काठाकोनी के एक फॉर्म हाउस में बिजली का करंट लगाकर दो जंगली सूअरों का शिकार किया गया है। वन विभाग के उड़नदस्ते ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। शनिवार को इन्हें रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में पेश किया जाएगा।
फाॅर्म हाउस के चौकीदार ने अपराध से साफ इंकार कर दिया, लेकिन जांच के दौरान खून लगी बोरी और मांस के सड़ने की बदबू का अहसास हुआ तो उड़नदस्ता टीम का शक यकीन में बदल गया। बिलासपुर वन मंडल में जंगली सूअर के शिकार की यह दूसरी घटना है। इससे पहले सीपत के सोंठी में शिकार की घटना सामने आई थी।
जलसो निवासी सुखराम सूर्यवंशी काठाकोनी में राजा सरकार के फॉर्म हाउस में चौकीदारी करता है। वहां अक्सर जंगली सूअर आते थे। उसे जंगली सूअर का मांस खाने की इच्छा हुई। 17 सितंबर को उसने हाई टेंशन बिजली तार के जरिए फॉर्म हाउस की फेंसिंग में करंट लगा दिया। सुबह उठते ही उसने बारबेट वायर में दो सुअरों को मृत पाया। इसके बाद उसने भिलौनी और तखतपुर के अपने साथियों गणेश केंवट, राकेश कुमार कौशिक, लतेलराम केंवट और देवारी केंवट को सूअर का मांस खाने की दावत दी। इसकी सूचना उड़नदस्ता टीम को मिली।
टीम ने शामिल फाॅरेस्ट गार्ड हफीज खान, बीके गौतम, बहोरनलाल साहू और राजकुमार मिश्रा ने वहां छापा मारा। पूछताछ में चौकीदार ने शिकार से इनकार कर दिया, लेकिन खून लगी बोरी और मांस की बदबू के चलते उन्हें यकीन हो गया कि जंगली सूअर का शिकार किया गया है। सख्ती बरतने पर चौकीदार ने सारी घटना बयां कर दी। सुखराम ने बताया कि उन्होंने एक सूअर का मांस पका कर खा लिया है और दूसरे को ठिकाने लगाने के लिए गड्ढा खोदकर जमीन में गड़ा दिया। उड़नदस्ता ने पके हुए मांस के अलावा सूअर का मांस काटने और पकाने के लिए उपयोग में लाए गए बर्तन, हसिया बरामद कर लिए हैं।
तीन साल की सजा का प्रावधान
जंगली सूअर के शिकार के मामले में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत जुर्म दर्ज किया गया है। जंगली सूअर शेड्यूल दो के तहत संरक्षित श्रेणी का वन्यजीव है। इसके शिकार पर तीन साल की कैद और 25 हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। सूअर की शिनाख्त के लिए कानन पेंडारी स्मॉल जू के चिकित्सक
पीके चंदन को बुलवाया गया। उन्होंने मांस के सैंपल लिए।
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