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ड्रोन से पीछा कर दबोचा लुटेरों को, पहली बार मॉक ड्रिल

6 वर्ष पहले
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रायपुर. ऑल पेट्रोलिंग...डीडीनगर में लूट हो गई...बाइक वाले रिंग रोड की ओर भागे हैं...पुलिस कंट्रोल रूम से शहर के वायरलेस सैट गूंजे और थाने अलर्ट हो गए। डीडीनगर मोबाइल का सेट पर प्वाइंट चला - डीडीनगर पेट्रोलिंग ड्रोन-1...रिंग रोड पर भेजें। ड्रोन कंट्रोलर ने रायपुरा में गश्त कर रहे ड्रोन का रुख रिंग रोड की ओर मोड़ा।
पेट्रोलिंग ड्रोन-1 से भेजे जा रहे वीडियो पर पुलिस की नजरें थम गईं। लुटेरों का जो हुलिया बताया गया, बाइक पर वैसे ही दो लोग भागते दिखे तो ड्रोन पीछे लग गया। करीब 20 मिनट की जद्दोजहद के बाद बाइक सवार सुंदरनगर मोड़ पर दबोचे गए। पता चला लुटेरे वही थे।
यह है उस मॉक ड्रिल के अंश, जो आउटर में ड्रोन से निगरानी के नतीजों का विश्लेषण करने के लिए पुलिस ने की। डीडीनगर इलाका इसलिए चुना क्योंकि छह महीने में लूट तथा हिट एंड रन जैसी दर्जनभर वारदातें इसी इलाके में हुईं। गोल चौक पर सुबह 9.30 पैदल जा रही महिला से बाइक सवार दो युवक पर्स छीनकर भागे और मॉक ड्रिल शुरू हो गई।
रायपुर पुलिस को एक कंपनी ने ड्रोन से पेट्रोलिंग का प्रस्ताव दिया था। इसी के डिमांस्ट्रेशन के लिए लूट की वारदात प्लान की गई और मॉक ड्रिल कराई गई। वारदात के बाद करीब चार किमी तक भागे लुटेरों की ड्रोन ने पुलिस के गश्ती दलों को इतनी परफेक्ट लोकेशन और तस्वीरें दीं कि कुछ मिनट में अपराधी दबोच लिए गए।
राजधानी में ड्रोन के साथ पहली बार हुई इस मॉक ड्रिल को दैनिक भास्कर ने लाइव कवर किया। एएसपी ट्रैफिक बलराम हिरवानी के मुताबिक भागते लुटेरों का पीछा करने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल का प्रस्ताव रायपुर की ही एयरोबोट सप्लायर कंपनी ने दिया था।
रात में भी गश्त संभव
डिफेंस में पीएचडी तथा एयरोमॉडल इंस्ट्रक्टर डा. अरुणा राणा ने बताया कि जिस ड्रोन का मॉक ड्रिल में इस्तेमाल हुआ, उसे नाइट विजन कैमरे लगाकर रात में गश्त करने लायक भी बना सकते हैं। बैटरी बैकअप बढ़ाने से छह घंटे लगातार उड़ सकता है। जीपीएस लगाकर स्मार्ट फोन से कनेक्ट किया जा सकता है, ताकि लाइव तस्वीरें देखी जा सके या मौके के लिए तुरंत रवाना किया जा सके।
क्या हुआ
रोहिणीपुरम गोल चौक से ड्रोन से मॉक ड्रिल की गई। बाइक सवार फर्जी लुटेरे ड्रोन की मदद से चार किमी पीछा करने के बाद पकड़े गए।
क्यों हुआ
तीन महीने के भीतर आउटर में लूटपाट की कई वारदातें हुईं। लुटेरों ने रिंगरोड और उससे जुड़ी सड़कों का इस्तेमाल किया। इसीलिए वहीं मॉक ड्रिल की।
हजार फीट ऊंचाई तक
एयरोबोट कंपनी के जयदीप सिन्हा ने बताया कि इस ड्रिल में इस्तेमाल ड्रोन दरअसल क्वाडकॉप्टर है। यह ऑटो पायलट मोड में एक हजार फीट ऊंचाई तक (100 मंजिली इमारत जितना) बैटरी के हिसाब से 20 मिनट से छह घंटे तक उड़ सकता है। कुछ मिनट तक इसे एक जगह स्थिर रख सकते है।
आगे की स्लाइड में पढ़िए फोटो के साथ वीडियो भी।