जगदलपुर.रायपुर. देश में नक्सलियों का सबसे बड़ा गढ़ समझे जाने वाले अबूझमाड़ में सुरक्षा बलों ने जबरदस्त अभियान चलाया। तीन हजार जवानों ने बड़ी गोपनीयता के साथ इसे अंजाम दिया। इसके चलते नक्सलियों को अपने स्थापना दिवस आयोजन की जगह बदलनी पड़ी जिसमें उनके बड़े नेता शामिल होने वाले थे। अभियान के दौरान नक्सलियों का एक ट्रेनिंग कैंप भी ध्वस्त कर दिया गया। आगे ऐसे अभियान और चलाए जाएंगे।
नक्सलियों के इस आयोजन और बड़े लीडरों के पहुंचने की खबर पर पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा, एसटीएफ ने सीमावर्ती महाराष्ट्र की पुलिस के सहयोग से अबूझमाड़ में 20 सितंबर से हफ्ते भर तक अभियान चलाया। बस्तर रेंज के आईजी एसआरपी कल्लूरी ने शनिवार शाम पत्रवार्ता में बताया कि एहतियात के तौर पर अभियान पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था। जवानों के सुरक्षित लौटने के बाद ही इसकी जानकारी दी जा रही है।
पूरी मुहिम के दौरान नक्सलियों से कई जगहों पर छिटपुट मुठभेड़ हुई। पूरे अभियान के दौरान केवल एक असिस्टेंट कमांडेंट ही घायल हुए। नक्सली अपनी ही मांद में कहीं पुरजोर हमला नहीं कर सके। इलाके में लगातार हो रही बारिश और खराब मौसम के चलते नक्सलियों की पतासाजी के लिए यूएवी का इस्तेमाल नहीं हो सका।
केवल रसद व अन्य सहायता पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया।
एलमागुड़ा में हुआ आयोजन अबूझमाड़ में बड़ी तादाद में सुरक्षा बलों के घुसने पर नक्सली तयशुदा जगह पर स्थापना दिवस का आयोजन नहीं कर सके। रस्म अदायगी के तौर पर सुकमा जिले के दूरदराज के इलाके एलमागुड़ा में नक्सलियों ने आनन-फानन में स्थापना दिवस मनाया जिसमें 200 नक्सली नेताओं समेत करीब 2000 ग्रामीण पहुंचे थे।
इस बात की सूचना देर से मिलने और बारिश में नदी-नाले उफान पर होने की वजह से पुलिस समय पर मौके तक नहीं पहुंच पाई। अभियान के दौरान गट्टाकाल में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों का ट्रेनिंग कैंप ध्वस्त किया। यहां से नक्सली साहित्य समेत कई दस्तावेज भी बरामद हुए जिनसे नक्सलियों की लेवी वसूली की कई जानकारियां मिली हैं। आईजी ने बताया कि बीते 4 माह में 180 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। जिसके चलते इनका संगठन काफी हद तक कमजोर हुआ है। यही वजह है कि नक्सली अपनी ही मांद में भी मात खा गए। बारिश के बाद और भी बड़े अभियान चलाए जाएंगे।
कुतूल नक्सलियों की राजधानी
अबूझमाड़ के कुतूल में पहुंची सुरक्षा बलों की टुकड़ी को ग्रामीणों ने बताया कि इस इलाके को नक्सलियों ने अपनी राजधानी घोषित कर रखा है। स्कूली छात्रों से नारे लगवाए जाते हैं कि कुतूल हमारी राजधानी है । कुतूल आश्रम शाला में बच्चों की तादाद बढ़ी है जो यह दर्शाती है कि लोग नक्सलियों से अलग रखने अपनी मर्जी से बच्चों को आश्रम में भेज रहे हैं। अबूझमाड़ के लोग भी अब मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं। यही वजह है कि यहां लोगों ने सुरक्षा बलों से इलाके में सड़क, पुल की मांग की।