रायगढ़. रायगढ़ प्रशासन परेशान है क्योंकि उसे भगवान जगन्नाथ को 3 करोड़ रु. देने हैं लेकिन भगवान हैं कि मिलते नहीं! ये सच है। सरकार ने अपने कामों के लिए जमीन का अधिग्रहण किया और मुआवजा दिया। इस दौरान कई मंदिरों की जमीन ली गई, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में मंदिरों की जमीन का मालिक भगवान को बना दिया। प्रशासन ने मुआवजे के लिए 3 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है, लेकिन भगवान नहीं मिले। अब कलेक्टर ने सरकार को पत्र लिखकर पूछा है, क्या करें?
इसलिए हो रहा असमंजस
मंदिर किसी व्यक्ति या ट्रस्ट के नाम पर नहीं है। कई साल पहले दान में मिली जमीन में मंदिर तो बना दिए गए, पर वारिस का नाम न होने से और मंदिर होने की वजह से इसे उस मंदिर के भगवान की जमीन माना जा रहा। मंदिर समितियों या ट्रस्ट का अध्यक्ष कलेक्टर होता है। ऐसे में इन मंदिरों के भगवान को जारी होने वाली राशि कलेक्टर के अधीनस्थ राजस्व खाते में जमा है।