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उच्च शिक्षा में बदलाव, निजी कंपनियों की मदद से चलाएंगे सरकारी कॉलेज

6 वर्ष पहले
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रायपुर। राज्य सरकार अब ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी कॉलेजों को निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। चयनित कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर िनजी संस्थाओं और कंपनियों को अगले सत्र से दिया जा सकता है। इसका ऐलान बजट के साथ विस में सरकार कर सकती है।

छत्तीसगढ़ राज्य का गठन होने के बाद से सरकारी कॉलेजों में क्वालीफाइड शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इस कारण सरकार को अपनी वर्तमान व्यवस्था में बड़ा बदलाव करना पड़ रहा है। इसके तहत उच्च शिक्षा विभाग ने साल 2015-16 में उच्च शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिए एक हजार करोड़ की महती योजना बनायी है। दूर-दराज के जिला मुख्यालयों में स्थापित कॉलजों में प्रयोग के तौर पर बदलाव किया जाएगा। इनमें सुकमा नारायणपुर, दंतेवाड़ा, भोपालपट्‌टनम, बीजापुर जिले के कॉलेज चिन्हित किए गए हैं। राज्य में ऐसा पहली बार होगा। इसकी घोषणा बजट में होने के संकेत हैं। इसी तरह से जगदलपुर, कांकेर, राजनांदगांव, दुर्ग व रायपुर में एक-एक आवासीय मॉडल कॉलेज खोले जाएंगे। इसके लिए केंद्र ने 12-12 करोड़ रु. मंजूर किए है।
इन कॉलेजों के लिए पद राज्य के बजट से दिए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के 250 से अधिक शासकीय कॉलेजों में लैब व लायब्रेरी को भी मजबूत किया जाएगा। विशेषज्ञों के व्याख्यान सीडी एवं पेन-ड्राइव के जरिए विद्यार्थियों को दिए जाएंगे।
26 विषयों में वोकेशनल कोर्स
प्रदेश के कॉलेजों में बीए, बीकॉम, बीएससी के परंपरागत पाठ्यक्रम के अलावा 3 वर्षीय बैचलर इन वोकेशनल कोर्सेस शुरू किये जाएंगे। इसमें 26 विषयों के पाठ्यक्रम शामिल किए जा रहे हैं।
एक वर्षीय
कोर्स में उत्तीर्ण को डिप्लोमा 2 वर्षीय को एडवांस डिप्लोमा
तथा 3 वर्ष में डिग्री दी जाएगी। प्रवेश 12 वीं के बाद ही दिया जाएगा।
पीपीपी मॉडल क्यों
राज्य के कॉलेजों में शिक्षकों के सैकड़ों पद रिक्त है। लैब व लाइब्रेरी में संसाधनों की कमी है। दूरस्थ इलाकों के कॉलेजों में शिक्षक तबादलों में जाना नहीं चाहते। पीपीपी मॉडल के तहत सारे संसाधनों की व्यवस्था अनुबंधित संस्थान को करनी होगी। इसके एवज में सरकार एक मुश्त राशि संस्थान को देगी।