रायपुर । छत्तीसगढ़ में थर्ड जेंडर को अब स्त्री या पुरुष बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए बाकायदा नीति बनाई जा रही है। राज्य में उनके अंग प्रत्यारोपण का इंतजाम होने जा रहा है। अविकसित अंगों का आपरेशन कर उन्हें स्त्री या पुरुष बनाया जाएगा। वे शादी भी कर सकेंगे। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, नौकरी व अन्य बुनियादी सुविधाओं लिए भी राज्य सरकार नीति बनाने जा रही है। 16 सितंबर को होने वाली कैबिनेट की बैठक में सरकार थर्ड जेंडर से संबंधित नीतियों को मंजूरी दे सकती है। राज्य में फिलहाल 3500 ऐसे लोग हैं। इनको महिला या पुरुष की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उनके लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहल की।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से जवाब मांगा है कि वह 12 अक्टूबर तक बताए कि थर्ड जेंडर के कल्याण के लिए वह क्या कर रही है? इसी आधार पर सरकार ने छत्तीसगढ़ में अपनी कार्ययोजना तैयार की है। थर्ड जेंडर के लोगों के ऑपरेशन का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। सरकार ने समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग व सभी संबंधित विभागों से थर्ड जेंडर के कल्याण के लिए योजनाएं कैबिनेट में पेश करने के लिए कहा है। समाज कल्याण विभाग को इसका नोडल विभाग बनाया गया है।
चार लाख रुपए तक का खर्च एक ऑपरेशन में
अंग प्रत्यारोपण चिकित्सा (एसआरएस) एक जटिल आपरेशन है, जो तीन से आठ घंटे तक चलता है। इसमें 50 हजार से 4 लाख रुपए तक खर्च आने की संभावना है। आपरेशन से पहले एक कमेटी तीन से 6 महीने तक थर्ड जेंडर की काउंसिलिंग करेगी। जब वे मानिसक रूप से आपरेशन के लिए तैयार हो जाएंगे, तब उनका हारमोन टेस्ट होगा। हारमोन में कमी होने पर पहले उसे मानक स्तर तक लाया जाएगा। तब संबंधित की मर्जी के अनुसार सर्जरी होगी। आपरेशन के कुछ दिनों से दो महीने तक उसे बेडरेस्ट करना होगा। कुछ महीने दवाएं भी लेनी होगी।
संतान के बारे में राय स्पष्ट नहीं
डॉक्टर्स का कहना है कि आपरेशन के बाद थर्ड जेंडर शादी तो कर सकेंगे। पर अभी यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वे माता-पिता का सुख ले सकेंगे या नहीं।
मंत्री ने कहा पूरी मदद करेंगे -
समाज कल्याण मंत्री रमशीला साहू ने कहा कि थर्ड जेंडरों के अंग प्रत्यारोपण आपरेशन का खर्च सरकार उठाएगी। उन्हें सामान्य इंसान की तरह सभी सुविधाएं व अधिकार दिलाए जाएंगे। नौकरी व सेवा में भी उन्हें प्राथमिकता से अवसर प्रदान किए जाएंगे।
केस स्टडी -
एलिना और अमृता करवा चुकी हैं ऑपरेशन
बिलासपुर की रहने वाली और एसआरएस करवा चुकीं एलिना जैक का कहना है कि वे इस आपरेशन के बाद से फिट हैं। उन्हें किसी तरह की तकलीफ नहीं है। उन्होंने अपनी मर्जी व भविष्य के मद्देनजर यह सर्जरी करवाई थी और वे संतुष्ट हैं। वे शादी करने वाली हैं। रायपुर की अमृता का कहना है कि उन्होंने मुंबई में सर्जरी करवाई थी। वह पूर्ण स्वस्थ है। अब न सिर्फ थर्ड जेंडर बल्कि महिलाओं व बच्चों के उत्थान के लिए काम कर रही हैं।
तीन तरह की सर्जरी प्रस्तावित
अर्ध-विकसित जननांग बाहर निकालना - खर्च 50 से 60 हजार
योनी को आकार देकर उपयोगी बनाना - 70 से 80 हजार
स्त्री या पुरुष का रूप देना ताकि वे पूर्ण उपयोगी हो सकें - खर्च 2 से 4 लाख
कैसे मिला अधिकार
राइट टू हेल्थ के तहत तमिलनाडु हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी। इसमें सामान्य नागरिकों की तरह थर्ड जेंडर ने भी अपने स्वास्थ्य के अधिकार के तहत अंग प्रत्यारोपण चिकित्सा (एसआरएस) का अधिकार दिलाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में दखल दी।
सफल होते ही हैं ऑपरेशन
सर्जन डॉ. सुनील कालडा का कहना है कि सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी (एसआरएस) के आपरेशन सौ फीसदी सफल रहते हैं। राज्य में इसकी सर्जरी की वे सारी तकनीक व मशीनें हैं, जो महानगरों या विदेशों में हैं। थर्ड जेंडर को उनके मनमुताबिक कंवर्जन किया जाता है। ज्यादातर फीमेल की चाह रखते हैं।
थर्ड जेंडर : पुरुष में 36 व महिला में 38 गुण (सेल्स) होते हैं। जब इनका मिलन होता है तो पूर्ण विकसित शिशु जन्म लेता है। यदि इन हारमोन का साइकिल बिगड़ा तो अधूरा बच्चा जन्म लेता है। उसमें अननोन लिंग डेवलप होने लगता है। यह तब पता लगता है जब बच्चा 5-6 साल का होता है।