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डाउनलोड करेंरायपुर। बीपीएल परिवारों को बांटे जा रहे आटे की बोरियों से इल्लियां निकल रही हैं। आटा लंबे समय तक डंप पड़ा रहने के बाद उसमें इल्लियां पड़ती हैं। आशंका है कि मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना की आड़ में कुछ कारोबारी गोदामों में जाम पड़ा आटा खपाने का खेल खेल रहे हैं। शहर के कुछ इलाकों में बंटे आटे की बोरियों से इल्लियां निकलने से यही संकेत मिले रहे हैं।
दैनिक भास्कर ने मंगलवार को अमलीडीह इलाके का सर्व किया। घरों का दरवाजा खटखटाकर लोगों से आटे के पैकेट दिखाने को कहा गया। इस दौरान कुछ परिवार वालों ने आटे के पैकेट में भरी इल्लियां दिखाईं। कुछ ऐसे परिवार वाले भी मिले जिन्होंने इल्ली निकलने के बाद आटे का पैकेट ही फेंक दिया था। ऐसे परिवार भी मिले जिनके आटे से इल्लियां तो नहीं निकली लेकिन आटा खाने योग्य नहीं था।
उन्होंने बताया कि रोटी बनाने के बाद उसका स्वाद ऐसा है, जैसे घुन लगा हो। बड़े तो बड़े बच्चे भी उस आटे से बनी रोटी नहीं खा रहे हैं। सर्वे के दौरान यह चौंकाने वाली हकीकत भी सामने आई कि कुछ पीडि़त परिवारों ने इल्लियां निकलने की शिकायत जिला खाद्य विभाग के अफसरों से भी की।
क्या है योजना : मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता योजना के अंतर्गत जिले के बीपीएल परिवारों को इसी महीने से दस किलो आटे का पैकेट दिया जा रहा है। दो रुपए किलो से मिलने वाली इस बोरी के लिए बीपीएल परिवारों को केवल 20 रुपए देने पड़ते हैं। राशन दुकानों में आटे की बोरी सप्लाई करने का काम खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम कर रहा है।
एक बार बनाई रोटी फिर फेंक दिया आटा तेलीबांधा तालाब से हटाए गए ज्यादातर परिवार अमलीडीह में रह रहे हैं। वहां रहने वाली महिलाओं ने बताया कि आटे से बेस्वाद रोटियां बनने से उन्होंने एक बार ही रोटी बनाई बाकी आटा फेंक दिया।
ऐसी महिलाओं में शामिल अमलीडीह की राजकुमारी ने बताया कि राशन दुकान से मिली आटे की बोरी से जब आटा निकाला तो उसमें इल्लियां दिखीं। दुर्गा महानंद ने कहा कि आटे को छलनी में छानो तो दर्जनों इल्लियां दिखाई देती हैं। इसकी शिकायत भी की गई पर कोई फायदा नहीं हुआ।
बोरी में मिला आटा खाने के लायक भी नहीं है।
सीधी बात
इसके लिए ये हैं जिम्मेदार
सवाल: मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के अंतर्गत बंटने वाले आटे में इल्लियां निकल रही हैं? क्या आपको पता है?
जवाब: नहीं, यह बात तो आप से मालूम हो रही है।
सवाल: अब आप क्या करेंगे।
जवाब: हां ये तो गंभीर मामला है। ऐसा हो रहा है तो तत्काल उसकी जांच के आदेश देता हूं।
सवाल: इसी महीने बंटे आटे से इतनी जल्दी इल्लियां कैसे निकल सकती हैं?
जवाब: आपूर्ति निगम गेहूं देकर निजी कंपनी से आटा पिसवाता है। कंपनी ही उसे पैकेट में पैक करती है।
सवाल: आपूर्ति निगम के अफसर बिना किसी जांच के आटे की बोरियों का वितरण करवा रहे हैं।
जवाब: नहीं ऐसा नहीं है। निगम के अफसर पूरी योजना की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। किसी भी परिस्थिति में खराब आटे की पैकिंग नहीं हो सकती। सारा काम अफसरों के सामने होता है।
सवाल: आगे क्या कदम उठाएंगे?
जवाब: पहले तो खराब आटे की जांच करवाई जाएगी। कहां और किस-किस इलाके में ऐसा आटा बंटा। लोगों को बेहतर क्वालिटी का आटा उपलब्ध कराया जाएगा। उसके बाद जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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