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डाउनलोड करेंरायपुर. राजधानी में हाईकोर्ट की खंडपीठ को लेकर अधिवक्ता अड़ गए हैं। उन्होंने अब किसी भी सूरत में खंडपीठ हासिल करने की ठान ली है। वकीलों के तेवर उग्र हैं। जरुरत पड़ने पर वकील सड़क पर उतरने के लिए भी तैयार हैं। फिलहाल वकील सरकार के सामने खंडपीठ की मांग रखना चाहते हैं। शासन पर यह दबाव डाला जाएगा कि वे केंद्र को राजधानी में खंडपीठ के लिए प्रस्ताव भेजें। मुख्यमंत्री से मिलने के बाद वकील आगे की रणनीति तैयार करेंगे।
राजधानी के वकील छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से ही खंडपीठ के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वकीलों का मानना है कि राज्य निर्माण के बाद राजनीतिक नफे-नुकसान के कारण रायपुर को हाईकोर्ट से वंचित कर दिया गया है। अब खंडपीठ की मांग कर रहे वकील यह तर्क दे रहे हैं कि बिलासपुर में सुविधाओं की कमी के ही कारण अन्य राज्यों के जस्टिस छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट आने में रुचि नहीं लेते हैं। बिलासपुर में एयरपोर्ट की सुविधा नहीं है। फ्लाइट पकड़ने के लिए रायपुर ही आना पड़ता है। देश के ज्यादातर महानगरों से बिलासपुर पहुंचने के लिए भी पहले रायपुर उतरना पड़ता है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि केंद्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली ने रायपुर प्रवास के दौरान आश्वासन दिया था, लेकिन उन्होंने इसके लिए राज्य शासन से प्रस्ताव भेजने के लिए कहा था। उन्होंने खंडपीठ देने में कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही थी। वकील यह भी तर्क दे रहे हैं कि भोपाल, त्रिवेंद्रम और रायपुर को छोड़कर शेष राज्यों की राजधानी में हाईकोर्ट या खंडपीठ है।
रायपुर के वकील पक्ष में तो बिलासपुर के वकील विपक्ष में खड़े
राजधानी में खंडपीठ को लेकर वकीलों की जमात में मतभेद पैदा हो गए हैं। राजधानी के अधिवक्ता खंडपीठ के पक्ष में तो विपक्ष में बिलासपुर के वकीलों की जमात है। जगदलपुर के वकीलों ने अपनी मांग रखकर नया पेंच ला दिया है।
इस बारे में वकीलों की राय-
रायपुर में सभी तरह की सुविधाएं हैं। लगभग सभी राजधानियों में हाईकोर्ट या खंडपीठ है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट है। ऐसी दशा में खंडपीठ देना ही होगा। यह शहर की जरुरत और अधिकार है।
कोषराम साहू, सदस्य स्टेट बार काउंसिल रायपुर
हम खंडपीठ को लेकर सकारात्मक है। यह आम जनता के हित का विषय है। इस पर किसी को भी विरोध नहीं करना चाहिए। रायपुर में खंडपीठ मांगने के कई आधार हैं। शासन-प्रशासन से हम इसके लिए मांग रख रहे हैं और रखेंगे।
केके शुक्ला, सदस्य स्टेट बार काउंसिल रायपुर
बिलासपुर में ज्यादातर आयोगों या उनके खंडपीठ स्थापित हो चुके हैं। यहां अब कोई कमी नहीं है। जगह-जगह हाईकोर्ट की खंडपीठ देने से अपराधियों के दिलों में हाईकोर्ट का डर खत्म हो जाएगा।
नूपुर पाल, अधिवक्ता बिलासपुर
शासन पर होने वाले करोड़ों के खर्च और जनहित को देखते हुए राजधानी में खंडपीठ जरूरी है। दो बड़े आयोगों ने भी इसकी सिफारिश की है। प्रचलित सिस्टम के अनुसार ही खंडपीठ मांगी जा रही है।
रामनारायण व्यास, पूर्व अध्यक्ष रायपुर बार एसोसिएशन
अधिकारियों को हर केस के लिए बिलासपुर जाना पड़ता है। इस पर साल में लाखों खर्च हो रहा है। खंडपीठ होने से पैसा बचेगा। फायदा आम जनता को मिलेगा। भौगोलिक दृष्टि से रायपुर उपयुक्त है।
ठाकुर आनंद मोहन सिंह, अधिवक्ता रायपुर
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है कि 200 किलोमीटर के दायरे में हाईकोर्ट की खंडपीठ नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट की अपनी एक गरिमा है। सब जगह हाईकोर्ट होने से उसका महत्व कम हो जाएगा।
इंदिरा त्रिपाठी, अधिवक्ता बिलासपुर
जगदलपुर में जिला न्यायालयों की व्यवस्था चाकचौबंद करने की जरूरत है। यहां जजों की भारी कमी है। न्यायिक स्टाफ भी पर्याप्त नहीं हैं। उसके बाद खंडपीठ पर विचार हो।
एनके देवांगन, अधिवक्ता जगदलपुर
बस्तर संभाग में रेलवे, वन और जन उपयोगी मामलों के लिए अलग न्यायालय नहीं हैं। राज्य सरकार यहां घोषणाएं करती हैं, लेकिन वह पूरा नहीं होता। इसलिए पहले यह जरूरी है।
विक्रमादित्य झा, पूर्व अध्यक्ष जगदलपुर बार
अभी विभिन्न घटनाओं की जांच के लिए हाईकोर्ट के जस्टिस जगदलपुर में अपनी सेवाएं देने आते हैं। एक दिन यहां केस की सुनवाई कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
सुधीर पांडे, अधिवक्ता जगदलपुर
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