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आरडीए कॉलोनियों में लीज रेंट हाउसिंग बोर्ड से चार गुना

8 वर्ष पहले
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रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) और हाउसिंग बोर्ड, दोनों ही सरकारी एजेंसियां हैं और लोगों को मकान तथा प्लाट उपलब्ध कराती हैं, लेकिन आरडीए कमल विहार में लीज रेंट के मामले में लोगों से वसूली के सारे रिकार्ड तोड़ने जा रहा है। हाउसिंग बोर्ड जहां 3 हजार वर्गफीट बंगले का लीज रेंट 208 रुपए महीना ले रहा है, तो कमल विहार में सबसे छोटे (550-665 वर्गफीट) प्लाट का लीज रेंट या भू-भाटक करीब 14 सौ रुपए महीना पड़ेगा।
रायपुर. आरडीए के ड्रीम प्रोजेक्ट कमल विहार प्लाट खरीदने वालों की जेब भू-भाटक के नाम से काटी जाने वाली है। आरडीए ने प्लाट बेचने का जो फार्मूला तय किया है, उसमें जमीन खरीदने के बाद भी लोगों को सालों तक भू-भाटक के रूप में तगड़ा किराया देना होगा। सबसे छोटे अर्थात 550-665 वर्गफीट के प्लाट का हर महीने का किराया 1333 रुपए वसूला जाएगा। 10 हजार फीट वाले प्लाट के लिए लोगों को 22 हजार 700 रुपए महीना लीज रेंट के रूप में देने होंगे। अगर लीज रेंट नहीं अदा करना है तो प्लाट की तय कीमत अर्थात 1335 रुपए फुट के साथ फ्री-होल्ड के रूप में तुरंत 280 रुपए फुट और जमान करने होंगे, अर्थात प्लाट की कीमत 1615 रुपए फीट हो जाएगी। इसकी तुलना में हाउसिंग बोर्ड की कालोनियों में मकान खरीदनेवालों का तनाव कई गुना कम है। जैसे, हाउसिंग बोर्ड की बोरियाकला कालोनी में 3 हजार फीट के बंगले के लिए लोगों को महज 208 रुपए भू-भाटक ही चुकाना है।
कमल विहार में आरडीए लीज रेंट, प्रीमियम लोकेशन और फ्रीहोल्ड के पैसों से ही 335 करोड़ रुपए की कमाई कर रहा है। जबकि आरडीए के कोटे की 59 लाख वर्गफीट जमीन बेचने पर प्राधिकरण के पास 1100 करोड़ रुपए से अधिक की राशि आएगी। प्रोजेक्ट बनाने के लिए प्राधिकरण ने 500 करोड़ का लोन लिया है। लोन पर 300 करोड़ रुपए का ब्याज जोड़ने पर भी 800 करोड़ रुपए ही देने होंगे। आरडीए के पास 300 करोड़ रुपए प्लाट बेचने के बाद बचेंगे। आरडीए ने लीज रेंट का जो फार्मूला तैयार किया है, उसके हिसाब से सबसे छोटे प्लाट 550 वर्गफीट में आबंटित व्यक्ति को 1333 रुपए महीना लीज रेंट देना होगा। सबसे बड़े दस हजार वर्गफीट के उपर के प्लाट में 22700 रुपए महीना लीज रेंट का किराया लगेगा।
कमल विहार के प्लाट खरीदनेवालों पर भू-भाटक की तगड़ी मार
-सबसे छोटे प्लाट का लीज रेंट देना होगा 1333 रुपए महीना
-हाउसिंग बोर्ड भी सरकारी एजेंसी, वहां भू-भाटक एक चौथाई
कीमत से डेढ़ गुना-
कमल विहार के ग्रुप-ए में 546 वर्गफीट से 665 वर्गफीट के प्लाट की औसत कीमत सात लाख से 9 लाख के बीच रखी गई है। दो प्रति. लीज रेंट पर 1333 से 1500 महीने का लीज रेंट होगा। फ्रीहोल्ड कराने पर प्लाट की कीमत 280 बढ़कर 1615 हो जाएगी। प्लाट कार्नर या प्रीमियम लोकेशन का है तो 200 का अतिरिक्त जुड़ेंगे और प्लाट का रेट ही 1815 रु. फीट होगा। जाएगा।
लोगों को पड़ेगा महंगा-
आरडीए 1600 एकड़ की कमल विहार योजना में सिर्फ 10 फीसदी जमीन ही बेच सकता है। शेष 90 फीसदी जमीन उनकी है, जिनसे आरडीए ने भूखंड लेकर उसे डेवलप करने के बाद 35 फीसदी वापस किया है। जमीन के जानकारों का कहना है कि इनमें से कई लोग अपने प्लाट को आरडीए से कम कीमत में बेचने तैयार हैं।
144 प्लाट 12 ग्रुप में-
ग्रुप ए में 546 से 665 वर्गफीट के 14 प्लाट।
ग्रपु बी में 665 से 800 वर्गफीट के 12 प्लाट।
ग्रुप सी में 800 से 900 वर्गफीट के 10 प्लाट।
ग्रुप डी में 980 से 1200 वर्गफीट के 12 प्लाट।
ग्रुप ई में 1200 से 1500 वर्गफीट के 13 प्लाट।
ग्रुप एफ में 1500 से 2 हजार वर्गफीट क 7 प्लाट।
ग्रुप जी में 2 हजार से 2750 वर्गफीट के 12 प्लाट।
ग्रुप एच में 2750 से 3800 वर्गफीट के 10 प्लाट।
ग्रुप आई में 3800 से 5200 वर्गफीट के 28 प्लाट।
ग्रुप जे में 5200 से 7 हजार वर्गफीट के 17 प्लाट।
ग्रुप के में 7 हजर से दस हजार वर्गफीट के 7 प्लाट।
ग्रुप एल में 10 हजार वर्गफीट के केवल 2 प्लाट।
लीज रेंट बोझ नहीं-
हाउसिंग बोर्ड की बोरियाकला योजना में तीन हजार वर्गफीट के मकान की लागत लगभग 50 लाख रुपए के आसपास है। इनमें .05 प्रतिशत का ग्राउंड रेंट के हिसाब से सालाना केवल 2500 रुपए ही लीज रेंट देय होगा। यानी 208 रुपए महीना ही लीज रेंट देना होगा।
लीज रेंट बेहद कम -
हाउसिंग बोर्ड के मकानों में आरडीए के मकानों की तुलना में लीज रेंट काफी कम है। आरडीए की योजनाओं में हर साल दो प्रतिशत भूभाटक देना पड़ता है, वहीं हाउसिंग बोर्ड के मकानों में 11 साल का एकमुश्त भूभाटक लिया जाता है। बोर्ड का 11 साल का लीज रेंट 30 साल तक प्रभावी रहता है, जबकि आरडीए पूरे 30 साल 2 प्रतिशत के हिसाब से लीज रेंट वसूलाता है। हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर सोनमणी बोरा ने बताया कि लीज रेंट की राशि बोर्ड के मकानों में एकमुश्त लेने का ही प्रावधान है।
दो फीसदी लीज रेंट-
ग्राउंड रेंट शासन के नियमों के अनुसार ही लिया जा रहा है। आरडीए की हर योजना में मूल लागत के दो फीसदी लीज रेंट लिया गया है। कमल विहार में भी लिया जा रहा है। अगर इससे मुक्ति चाहिए तो फ्रीहोल्ड का विकल्प भी है। उसमें एकमुश्त राशि देकर फ्रीहोल्ड कराया जा सकता है।
-अमित कटारिया, सीईओ आरडीए