रायपुर. कमल विहार और नया रायपुर में हाउसिंग बोर्ड प्रीकास्ट तकनीक के फ्लैट केवल पांच से आठ लाख में बनाकर बेचेगा। बीपीएल परिवारों को फ्लैट पांच लाख पचहत्तर हजार में मिलेंगे। स्कीम लांच होते ही फार्म लेने के लिए होड़ सी मच गई है। हाउसिंग बोर्ड ने अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत राज्य शासन से कमल विहार में 70 एकड़ जमीन ली है। उसी जमीन पर बीपीएल परिवारों के लिए ईडब्ल्यूएस और निम्न मध्यम आय वर्ग के लिए एलआईजी फ्लैट बनाए जा रहे हैं।
शासन ने दो महीने पहले ही हाउसिंग बोर्ड को जमीन दी है। उसके बाद ही कमल विहार के साथ नया रायपुर में बोर्ड ने मकान बनाने के लिए आवेदन फार्म जारी किए। केवल पांच दिन में तीन हजार से अधिक आवेदन दे दिया है। हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर संजय शुक्ला ने बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट की अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत राज्य शासन ने कमल विहार में 70 एकड़ जमीन बोर्ड को दी। मकान जल्दी बनाने हैं, इसलिए प्रीकास्ट तकनीक से इनका निर्माण करने के लिए टेंडर कर दिया गया है। कमल विहार और नया रायपुर दोनों जगह इस तकनीक से ईडब्ल्यूएस ओर एलआईजी फ्लैट बनाए जाएंगे।
कमल विहार में 10 हजार और नया रायपुर में 15 हजार मकान बनाए जाएंगे। बड़ी बात यह है कि इनमें उन लोगों को मकान दिए जाएंगे। जिनके पास हाउसिंग बोर्ड की अन्य किसी योजना के तहत लिया गया मकान न हो। अगर किसी अन्य योजना में हितग्राही के पास मकान होगा, तो उसे मकान अलाट नहीं किया जाएगा। हाउसिंग बोर्ड 60 प्रतिशत मकान इडब्ल्यूएस के और 40 प्रतिशत मकान एलआईजी कैटेगरी के बनाएगा।
बैंक से मिलेगा 95 प्रतिशत लोन, ब्याज में छूट भी
हाउसिंग बोर्ड 25 हजार मकान बेचेगा। लोगों को सेंट्रलाइज्ड बैंक से गठबंधन करके लोन दिलाया जाएगा। इसमें 95 प्रतिशत लोन की राशि हितग्राही को मिलेगी। केवल 5 फीसदी रकम ही शुरुआत में हितग्राही को देना होगा। ब्याज में भी 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। अगर बैंक का ब्याज 10 प्रतिशत की दर पर होगा तो सेंट्रल गवर्मेंट की हाउसिंग स्कीम के तहत उसे 5 फीसदी की छूट मिलेगी। केवल 5 फीसदी का लोन का इंट्रेस्ट ही हितग्राही को देना होगा।
6 से 9 लाख रुपए के भीतर के मकान
हाउसिंग बोर्ड ने ईडब्ल्यूएस के मकान की कीमत 5 लाख 75 हजार और एलआईजी मकान की कीमत 8 लाख 75 हजार रुपए तय की है। लगभग 600 वर्गफीट के आसपास के एलआईजी फ्लैट 8 लाख 75 हजार रुपए में हितग्राही को मिल जाएंगे।
मकान मालिकों को मिलेगी हर सुविधा
कमल विहार में रहने वाले लोगों को जो सुविधाएं आरडीए दे रहा है वो पूरी सुविधाएं इन मकानों में रहने वाले लोगों को मिलेंगी। अंडर ग्राउंड ड्रेनेज, सीवरेज, अंडर ग्राउंड इलेक्ट्रिफिकेशन, 24 घंटे पानी और बिजली की सुविधा भी इन्हें मिलेगी।
फिनलैंड, जर्मनी और ब्रिटेन में बनते है प्रीकास्ट मकान
प्रीकास्ट तकनीक से न सिर्फ रायपुर बल्कि छत्तीसगढ़ में पहली बार मकान बन रहे हैं। दुनिया इस तकनीक का उपयोग सबसे अधिक फिनलैंड, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका में होता है। भारत में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, पटना और लखनऊ की हाउसिंग बोर्ड ने चंद साल पहले प्रीकास्ट तकनीक से मकान बनाना शुरु किया है।
क्या है प्रीकास्ट तकनीक और क्यों बनाए जा रहे फ्लैट
बोर्ड के अफसरों का दावा है कि प्रीकास्ट तकनीक के मकान सामान्य की तुलना में ज्यादा मजबूत होते हैँ। चूंकि ये पूरी तरह से कांक्रीट से बनते हैं। बीम, स्लैब, कालम और दीवार तक फैक्ट्री में तैयार होती है। फैक्ट्री से बनकर आने के बाद इसे मकानों की साइट पर केवल फिट करना होता है। इस वजह से मकान का निर्माण बहुत जल्द हो जाता है। 25 हजार मकान केवल दो साल के भीतर तैयार करने की प्लानिंग की गई है।