रायपुर। डाक्टरी के कोर्स में इबोला व स्वाइन फ्लू को भी शामिल किया जा रहा है। एमबीबीएस के कार्स में इसके अलावा हेपेटाइटिस बी व सी के इलाज के बारे में पढ़ाया जाएगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया(एमसीआई)एमबीबीएस के साथ ही पीजी के सिलेबस को भी संशोधित किया जा रहा है। एमसीआई ने इसके लिए देश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन से सुझाव मांगे हैं। यह कवायद पांच साल की जा रही है।
पिछले कुछ वर्षों में विषाणुजनित रोग स्वाइन फ्लू व हाल में इबोला सामने आए हैं। मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यक्रम में इन दोनों रोगों का जिक्र नहीं है। इसी वजह से इन्हें कोर्स में शामिल करने की तैयारी है। सिलेबस में शािमल होने से मेडिकल छात्रों को इनके बारे में शुरू से जानकारी मिल सकेगी। अभी हालांकि इनके बारे में पढ़ाया जाता है लेकिन सिलेबस में शामिल नहीं होने के कारण सतही स्तर पर जानकारी दी जाती है। गौरतलब है कि इबोला अभी कुछ महीने पहले ही चर्चा में आया है। एमबीबीएस की नई किताब में यह सिलेबस में शामिल होने से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे छात्रों को फायदा होगा।
नया सिलेबस अगले साल मई में जारी होगा। नए सत्र यानी अगस्त से छात्र स्वाइन फ्लू व इबोला के बारे में पढ़ने लगेंगे। हेपेटाइटिस बी व सी बीमारी को शामिल करने से भी चिकित्सा छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद इनकी पहचान कर इलाज करने में आसानी होगी। अभी एमबीबीएस डॉक्टर इसकी पहचान नहीं कर पाते हैं।
मरीजों को होती है परेशानी
विशेषज्ञों का मानना है सिलेबस में नई महत्वपूर्ण बीमारियों की पढ़ाई नहीं होने के कारण मरीजों को परेशानी होती है। सरकारी हेल्थ सेंटरों में एमबीबीएस क्वालिफाइड डॉक्टर ही ज्यादा होते हैं। सिलेबस में नहीं पढ़े होने के कारण उन्हें नई बीमारियों के बारे में जानकारी ही नहीं होती। ऐसे में वे मरीजों का इलाज या कुछ बताने के बजाय सीधे मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज देते हैं।
ईसीजी की विस्तृत पढ़ाई
एमबीबीएस के नए सिलेबस में सोनोग्राफी व ईसीजी रिपोर्ट बनाने की पढ़ाई कराने की तैयारी है। कई स्तर पर रिसर्च के बाद यह बात सामने आई कि सरकारी हेल्थ सेंटरों में सेवाएं देने वाले एमबीबीएस डाक्टर सोनोग्राफी व ईसीजी की रिपोर्ट को समझ नहीं पाते। िलेबस में शामिल होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ एमबीबीएस डॉक्टर रिपोर्ट देखकर इलाज कर सकेंगे।
पीजी के सिलेबस में भी होगा बदलाव
एमसीआई पोस्ट ग्रेजुएट के सिलेबस में भी बदलाव करने जा रहा है। इसके लिए देशभर के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों के डीन से सुझाव मांगे गए हैं। इसमें एडवांस तकनीक व इलाज के तरीकों को जोड़ा जाएगा।
एमबीबीएस के सिलेबस में इबोला को जोड़ने से स्टूडेंट को बड़ा फायदा होगा। नए डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर इलाज कर पाएंगे। एमसीआई समय-समय पर सिलेबस में बदलाव कर एमबीबीएस व पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर को फायदा पहुंचा सकता है।
डॉ. एके चंद्राकर, डीन मेडिकल कॉलेज