रायपुर. धान खरीदी में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए इस बार हर अफसर की जिम्मेदारी तय की जा रही है। सरकार इस बार हर किसान से प्रति एकड़ धान खरीदी की सीमा तय करने पर विचार कर रही है। इसलिए हर किसानों को पहले से पंजीयन फार्म भरवाया जा रहा है। धान बेचने वाले किसानों के पंजीयन में अनियमितता हुई तो सरकार पटवारी, ग्राम सेवक और समिति सेवक के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराएगी। खाद्य विभाग ने तीनों अधिकारियों की ड्यूटी किसानों के पंजीयन के लिए लगाई है।
अगर पंजीयन में फर्जीवाड़ा हुआ तो उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी दोनों कार्रवाई की जाएगी। किसानों के पंजीयन फार्म की जांच सोसाइटी में अपना पंजीयन फार्म जमा कर रहे हैं। इसके बाद पटवारी किसान द्वारा दर्ज किए गए रकबे (जमीन) को सत्यापित कर रहे हैं तो ग्राम सेवक यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसान ने उस जमीन में धान लगाया है या नहीं। वहीं समिति सेवक किसान द्वारा पिछले पांच सालों में बेचे गए धान को सत्यापित करते हैं। तीनों अधिकारियों के हस्ताक्षर के बाद ही इसे साफ्टवेयर में दर्ज किया जाता है।
कैसी-कैसी होती रही है गड़बड़ी
- 2013 में जांजगीर जिले के किसान रामप्रसाद ने 1700 क्विंटल धान बेचा था, जबकि उसके पास कुल जमीन 20 एकड़ ही थी। जबकि उसके खेतों में 500 क्विंटल से अधिक धान नहीं हो सकता था।
- प्रदेश में प्रति एकड़ उत्पादन औसतन 22 से 25 क्विंटल है, लेकिन जांजगीर के किसानों ने 85 क्विंटल तक धान एक एकड़ में बेचा था।
- बोनस के लिए किसानों के खाली पर्ची में बिचौलिए हस्ताक्षर करवा लेते हैं। देवभोग के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में इस तरह की गड़बड़ी मिली थी।
पिछले साल मिली गड़बड़ी
दूसरे राज्यों से आया धान – 20 प्रकरण – 14416 क्विंटल
धान का अवैध परिवहन – 109 प्रकरण – 1068 क्विंटल
फर्जीवाड़ा रोकने की कोशिश
धान खरीदी के लिए 2007 में पहली बार साफ्टवेयर तैयार किया गया था। तब उम्मीद जताई गई थी कि किसानों के नाम और रकबा दर्ज होने के बाद फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी लेकिन धान बेचने वाले किसानों के रकबा साफ्टवेयर में बढ़ाकर लिख दिया जाता है, जिससे एक ही किसान निर्धारित मात्रा से अधिक धान बेच पाता है। इसी के जरिए पड़ोसी राज्यों से आए धान को खपाया गया। साथ ही राइस मिलरों द्वारा भी इसी तरह की गड़बड़ी की गई। इसे रोकने के लिए सरकार ने तीन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। पटवारी, ग्राम सेवक और समिति सेवक के बाद तहसीलदार की जिम्मेदारी तय की गई है। जिन किसानों का पंजीयन नहीं होगा, वे तहसीलदार के समक्ष अपील कर सकेंगे।