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अवैध होर्डिग में बड़ा खेल नियम रख दिए ताक पर

8 वर्ष पहले
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रायपुर. राजधानी में अवैध होर्डिग्स को लेकर बड़ा खेल चल रहा है। निगम की नाक के नीचे विज्ञापन एजेंसियों ने सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर होर्डिग तान दिए हैं। सब कुछ जानते हुए भी निगम दबाव और दूसरी वजहों से प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा। निगम के रिकार्ड में शहर में केवल 334 होर्डिग ही वैध हैं, जबकि इनकी वास्तविक
संख्या एक हजार से भी ज्यादा है।
अवैध होर्डिग्स पर कार्रवाई की बात तो दूर निगम के पास यही रिकार्ड नहीं है कि शहर में अवैध होर्डिग हैं कितने। होर्डिग को अनुमति देने से लेकर उनसे टैक्स वसूली का काम राजस्व विभाग करता है। पर आज तक एक भी विज्ञापन एजेंसी के खिलाफ अवैध होर्डिग मामले में कार्रवाई नहीं की गई। दबाव बढ़ने पर होर्डिग को निकालकर निगम खानापूर्ति कर लेता है। कुछ दिनों बाद उसी जगह पर दोबारा होर्डिग लग जाती हैं।
राज्य सरकार ने इसी गोलमाल को काबू करने के लिए चार साल पहले होर्डिग पॉलिसी लागू की थी। निगम ने इसे लागू करने का फैसला तो किया, पर अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने इसकी फाइल दफना दी। अब जाकर निगम इसे दोबारा लागू करने की बात कर रहा है। राज्य शासन के दबाव के बाद निगम ने मंगलवार को दोबारा अवैध होर्डिग्स हटाने की कवायद शुरू की।
मंगलवार को हटाए सिर्फ 14 होर्डिग
मंगलवार को निगम ने जीई रोड पर जोरा से वीआईपी रोड तक 20 बाय 5 फीट के 14 बड़े अवैध होर्डिग हटाए। ये जमीन पर खंभे गाड़कर सिक्स लेन सड़क के किनारे लगे हुए थे।
अवैध होर्डिंग के रिकार्ड भी अधूरे
निगम के डाटा के मुताबिक शहर में केवल 334 होर्डिग ही वैध हैं। ये होर्डिग निगम में पंजीकृत 26 विज्ञापन एजेंसियों के माध्यम से लगे हैं। यहां हैरान करने वाली बात यह है कि इन वैध होर्डिग के स्ट्रक्चर की मजबूती का प्रमाणपत्र आज तक निगम के राजस्व विभाग को नहीं मिला। जबकि होर्डिग पालिसी में इस बात का साफ जिक्र है कि बिना इस प्रमाणपत्र के किसी भी होर्डिग को लगाने की अनुमति ही नहीं दी जा सकती।
क्योंकि कमजोर होर्डिग लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन प्रमाणपत्रों के नहीं आने की चिंता भी किसी अफसर ने नहीं की। हाल में हुई बैठक में इसका खुलासा होने के बाद निगम ने नोटिस जारी की।
होर्डिग से इस तरह हुई कमाई
-2010 में 40 लाख
-2011-12 में एक करोड़ 40 लाख
-2012-13 में एक करोड़ 40 लाख
होर्डिग से कैसे बढ़ी आय
निगम के कुछ अफसरों का दावा है कि होर्डिग्स से आय बढ़ी है। पर इस बात पर अफसर चुप्पी साध लेते हैं कि यह किस अनुपात में बढ़ी। विज्ञापन कारोबार से जुड़े लोग भी मान रहे हैं कि जिस रफ्तार से शहर में होर्डिग बढ़े हैं, उन हिसाब से निगम की कमाई नहीं बढ़ी। 70 फीसदी से ज्यादा होर्डिग अवैध होने की वजह से निगम को टैक्स के रूप में एक धेला भी नहीं मिल रहा, जबकि विज्ञापन एजेंसियां इससे मोटी कमाई कर रही हैं।
सड़क के किनारे लगने वाले छोटे होर्डिग अब डिवाइडरों पर लगे बिजली के खंभों पर लगने लगे हैं। विज्ञापन एजेंसियों को इससे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें खंभों की मजबूती का प्रमाण पत्र नहीं देना पड़ता। दूसरा सड़क पर उसकी विजिबिलिटी अच्छी होती है। तीसरा, उसकी कीमत भी अधिक मिलती है। एजेंसियों के साथ इनसे निगम को भी अच्छी आय होती है। पिछले साल डिवाइडर पर लगे विज्ञापनों से निगम को 70 लाख रुपए की आमदनी हुई।