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स्कूलों में परीक्षा लेने के निर्देश, मगर पर्चे छपाने के लिए नहीं दिया फंड

7 वर्ष पहले
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महासमुंद, रायपुर. प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में जनरल प्रमोशन खत्म कर परीक्षा लेने की योजना पहली ही पायदान में फ्लाप दिख रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी स्कूलों को पहली त्रैमासिक परीक्षा लेने के निर्देश जारी कर दिए हैं, लेकिन परीक्षा के लिए पर्चे छपाने के लिए पैसे नहीं दिए। स्कूलों से कह दिया गया कि वे स्कूल फंड से इसकी व्यवस्था करें। अब स्कूलों के हेड मास्टर इस बात को लेकर परेशान हैं क्योंकि स्कूल फंड में पैसे ही नहीं है। जब से शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुआ है। छात्रों से किसी तरह की फीस नहीं ली जाती, लिहाजा स्कूलों में कोई फंड ही नहीं है।

प्रदेश में एक-दो जगह नहीं, बल्कि सभी जिलों में इसे लेकर असमंजस बना हुआ है। महासमुंद में परीक्षाएं नहीं हो सकी है। दुर्ग जिले के स्कूलों में 24 सितंबर से परीक्षाएं होनी है, पर अभी तक पर्चे नहीं छपाए जा सके हैं। इसी तरह की स्थिति बालोद, बेमेतरा, गरियाबंद समेत सभी जिलों की है।
विभाग ने यह निर्देश सभी डीईओ, बीईओ को जारी किए हैं। लेकिन निर्देश देते समय अधिकारी भूल गए कि स्कूलों में अब फीस नहीं ली जाती तो फंड कहां से इकट्ठा होगा। बल्कि दो साल पहले स्कूलों को राज्य शासन परीक्षा लेने के लिए फंड देती थी। प्राइमरी स्कूल के हर छात्र के लिए 100 रुपए और मिडिल स्कूल के छात्र के लिए 120 रुपए की दर से राशि दी जाती थी।
इसी राशि से स्कूल के हेड मास्टर परीक्षा के पर्चे छपाते थे, उत्तरपुस्तिकाएं खरीदते और अंकसूची तक छपाते थे। लेकिन इस बार जारी निर्देश में पर्चे छपाने से लेकर उत्तरपुस्तिकाएं और अंकसूची के लिए पैसे कहां से आएंगे, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। निर्देश में स्कूल फंड की बात जरूर कही गई है, लेकिन फंड पहले से ही खाली है। वैसे नए सिस्टम के अनुसार अगस्त में ही त्रैमासिक परीक्षा हो जानी थी। अब खानापूर्ति करने के लिए सितंबर में परीक्षाएं ली जा रही है।
क्या है क्वालिटी एजुकेशन

पिछले कुछ सालों से महसूस किया जा रहा था कि शिक्षा के स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। शिक्षा के स्तर में सुधार के साथ गुणवत्तायुक्त शिक्षा की आवश्यकता चाही गई। क्वालिटी एजुकेशन के लिए जनरल प्रमोशन को सबसे बड़ा रोड़ा मानकर प्लान तैयार किया गया कि प्रोजेक्ट एजुकेशन सिस्टम के तहत पढ़ाई और परीक्षा आयोजित की जाए। स्कूलों में आरटीई के मापदंड पूरे हों और गतिविधियों का व्यापक मूल्यांकन ग्राम सभा के माध्यम से कराई जाए। फॉर्मेटिव आकलन के लिए परिषद स्तर पर प्रश्न बैंक बनाने का भी प्रावधान तैयार किया गया है।
इन मदों पर होगा खर्च
पहली और दूसरी की कक्षा में 50 अंकों का फॉर्मेटिव आकलन किया जाना है, जिसमें बच्चों को स्क्रैप बुक देना है। एक स्क्रैप बुक की कीमत 20 से 30 रुपए है। कार्यानुभव और पोर्टफोलियो के लिए भी सादे कागज की जरूरत है और इसके लिए एक छात्र के पीछे दस रुपए का खर्च आ रहा है। { एक विषय के लिए प्रश्नपत्र के तीन सेट तैयार करने के निर्देश हैं। प्राइमरी के लिए एक प्रश्नपत्र को तैयार करने में 8 से 10 और मिडिल में 13 से 15 रुपए का खर्च आ रहा है। निर्देश जारी किया गया है कि परीक्षा में छपे हुए प्रश्न पत्र ही दिए जाएं।
स्कूलों को जो निर्देश भेजे गए हैं, उसमें स्पष्ट लिखा गया है कि फंड की व्यवस्था कहां से होगी। जिन्हें समस्या है, वे विभाग के उच्च अधिकारियों से जानकारी ले सकते हैं।- सुब्रत साहू, स्कूल शिक्षा सचिव