रायपुर/जगदलपुर. नक्सलियों ने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात छत्तीसगढ़ में पहली बार दूरदर्शन के रिले सेंटर को निशाना बनाया। हमले में सेंटर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन छत्तीसगढ़ आम्र्ड फोर्स (सीएएफ) के तीन जवान शहीद हो गए। गंभीर रूप से घायल एक जवान को इलाज के लिए हेलिकॉप्टर से रायपुर भेजा गया है। घटना संभागीय मुख्यालय से 11 किमी दूर बड़े मारेंगा में हुई।
राष्ट्रीय राजमार्ग से 400 मीटर दूर स्थित दूरदर्शन केंद्र के उच्च शक्ति ट्रांसमिशन केंद्र पर रात करीब पौने दो बजे कुछ हलचल हुई। केंद्र के बाजू की दीवार पर लगे तार की जाली के जोड़ को खोल कर कुछ लोग अंदर घुसे। इससे पहले उन्होंने संतरी की ड्यूटी कर रहे एलेक्जेंडर लकड़ा को निशाना बनाया।
लकड़ा ने मौत से पहले अपने इंसास राइफल से जवाबी कार्रवाई भी की। नक्सली फिर गार्ड रूप में घुसे और वहां तैनात जवानों पर गोलियां दाग दीं। गोलीबारी में प्रधान आरक्षक सिलवानुस एक्का और आरक्षक वासुदेव साहू की मौत हो गई, जबकि जवान मजहर खान सीने में गोली लगने से घायल हो गया।
नक्सल हमले की सूचना मिलने के करीब घंटे भर बाद पुलिस मारेंगा पहुंची और इसके बाद घायल जवान को जगदलपुर लाया गया। शहीद जवानों में अलेक्जेंडर जशपुर का, सिलवानुस एक्का अंबिकापुर का और वासुदेव साहू बालोद के रहने वाले थे। घायल जवान मजहर धमतरी का बताया गया है।
नहीं लूट पाए हथियार
नक्सली करीब पौन घंटे तक परिसर में मौजूद रहे, लेकिन किसी भी जवान के हथियार ले जाने में कामयाब नहीं हो सके। घटनास्थल परपा पुलिस थाने से महज 4 किमी दूर है, इसके बावजूद सुरक्षा बलों को पहुंचने में घंटा भर का समय लग गया।
शहर के आसपास नक्सली गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। हालांकि खुफिया तंत्रों ने नक्सली हमले की आशंका जरूर जताई गई थी, लेकिन शहर के इतने करीब वारदात कर चले जाएंगे यह नहीं सोचा था। शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे एडीजी (नक्सल आपरेशन) मुकेश गुप्ता ने कहा कि इस बार नक्सलियों ने वारदात करने का तौर-तरीका बदला है।
उनका पहला मकसद हथियार लूटना है, फिर वे यहां अत्याधुनिक शस्त्रों को छोड़ गए हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस अभी यह मान कर चल रही है कि यह नक्सल वारदात है, लेकिन कुछ अन्य बिंदुओं पर भी जांच की जाएगी। पिछले कुछ समय से चल रहे नक्सली गतिविधियों पर नजर डाली जाए तो वे तेजी से शहर के आसपास अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हुए हैं। वारदात की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पहले परपा थाने से गश्ती वाहन को रवाना किया, जो वहां पहुंच तो गया, लेकिन आगे आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। इसके बाद जब फोर्स आई तब जाकर जवान हरकत में आए।
पेट्रोलिंग वाहन जब ट्रांसमिशन केंद्र के बाहर खड़ी थी, तभी एक मोटरसाइकिल भी वहां से गुजरी जिसे रोकने का इशारा पुलिस ने किया लेकिन वे भाग निकले।
गार्ड रूम पर हैं गोलियों के ताजा निशान : नक्सलियों ने गार्ड रूम के बाहर से ताबड़तोड़ फायरिंग की है। पश्चिमी दीवार की ओर से उन्होंने भीतर प्रवेश के लिए ऐसे स्थान को चुना जहां सुरक्षा के लिए लगाए गई जाली का ज्वाइंट था। बाहरी दीवार पर बने पैर के निशान को देखने से लगता है कि दीवार फांदकर जाने वालों की संख्या एक या दो ही रही होगी। गार्ड रूम की खिड़की के दो कांच को भेदते हुए निकल गई। वहीं दीवार पर भी करीब 8 स्थानों पर एके 47 की गोलियों के निशान हैं। वारदात के बाद फोर्स के पहुंचने की सूचना के बाद हथियार लूटने का इरादा नक्सलियों ने छोड़ दिया और वहां निकल भागे।
दुबका रहा प्राइवेट सुरक्षा गार्ड : दूरदर्शन केंद्र की सुरक्षा में पहले जिला पुलिस बल का एक-चार के गार्ड लगाए जाते थे। बाद में यह जिम्मा सीएएफ को सौंप दिया गया। जिसके बाद एक हवलदार और तीन कांस्टेबल की ड्यूटी लगती है। इन पर चौबीसों घंटे निगरानी की जिम्मेदारी होती है। केंद्र की ओर से एक निजी सुरक्षा गार्ड कैलाश कश्यप गेट के पास बने पोस्ट पर तैनात था। गोलियां चलनी शुरू हुई तो वह पोस्ट के निचले हिस्से में कंबल ओढ़ कर दुबक गया। काफी देर बाद जब पुलिस आई और गेट खोलने को कहा तो भी वह डर के मारे उठ नहीं पाया। पुलिस किसी तरह गेट फांद कर भीतर घुसी और इसके बाद गार्ड को जगा कर गेट खोला गया।
रात सवा बजे बंद हुआ था प्रसारण : वारदात के वक्त सीनियर अभियांत्रिकी सहायक प्रवीण एस मेश्राम दूरदर्शन के ट्रांसमिशन केंद्र में ही मौजूद थे। उन्होंने कहा कि रात करीब सवा बजे के आसपास प्रसारण बंद होने के बाद अन्य स्टाफ गाड़ी से वापस जगदलपुर चले गए थे। उनकी ड्यूटी सुबह 5 बजे से फिर से थी, तो उन्होंने सोचा कि दो घंटे के लिए घर जाकर कोई मतलब नहीं है इसलिए वे केंद्र में ही ठहर गए। हमले का वक्त भी नक्सलियों ने यही चुना था। गोलीबारी के बाद वे सहम गए थे। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने न तो गाली गलौज की और न ही हल्ला कर रहे थे। इतना ही नहीं वे आपस में बात भी नहीं कर रहे थे। मुख्य दरवाजे पर ताला लगे होने से वे बाहर क्या हो रहा है इसकी जानकारी ही नहीं ले पाए।
सभी उपकरण सुरक्षित हैं दूरदर्शन के : उच्च शक्ति प्रसारण केंद्र प्रभारी सहायक अभियंता अशोक कुमार साहू ने बताया कि हमले का केंद्र परिसर में एक ओर बना एकमात्र गार्ड रूम ही रहा। हमलावरों ने सुरक्षा बलों को ही निशाना बनाया है। दूरदर्शन केंद्र के किसी भी उपकरण को कोई क्षति नहीं पहुंची है। प्रसारण यथावत चल रहा है।
पहले 25 फिर 18 और अब 11 किमी पास
पिछले डेढ़ साल में नक्सलियों ने शहर के आसपास अपनी पकड़ और भी मजबूत कर ली है। पंडरीपानी, मारेंगा और तोकापाल के आसपास पोस्टल आदि लगा कर अपनी मौजूदगी बताने के बाद 21 अक्टूबर 2011 को नक्सलियों ने शहर से 25 किमी के फासले पर नेतानार के निकट पुलिस बल को बारूदी विस्फोट से उड़ा दिया था।
फायरिंग के बाद इस घटना में टीआई समेत छह पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। इसके बावजूद नक्सली हथियार लूटने में कामयाब नहीं हो सके थे। इसी मार्ग पर 7 किमी पहले इसी अप्रैल में नक्सलियों ने बोदल में वन विभाग के डिपो और भवन में आगजनी की थी। यहां से शहर सिर्फ 18 किमी के फासले पर है। इसके बाद बीती रात नक्सलियों ने शहर से सिर्फ 11 किमी दूर एक बड़ी घटना को अंजाम दिया और तीन जवानों की बलि ले ली।
बाइक पर आए थे नक्सली
गोलीबारी की आवाज गांव के लोगों ने भी सुनी लेकिन कोई भी बाहर नहीं निकला। वारदात स्थल पर कोई भी ऐसा व्यक्तिनहीं रहा जो यह बता सकें कि नक्सली कहां से आए थे और किस ओर गए। लेकिन यह समझा जा रहा है कि वे भेजरीपदर, एर्राकोट होते हुए मिचनार और फिर मारडूम की ओर चले गए हैं। एक आशंका यह भी जताई जा रही है कि मारेंगा से चिंगपाल होते हुए वे दरभा की ओर निकल गए हों।
घटनास्थल के आसपास दूर-दूर तक जंगल न होने से इस बात को बल मिलता है कि नक्सली मोटरसाइकिल पर ही आए हों और इनकी संख्या भी सीमित रही हो। यह भी समझा जा रहा है कि नक्सलियों की स्माल एक्शन टीम ने इस घटना को अंजाम दिया, लेकिन फोर्स के आने की सूचना पर हथियार लूटने में कामयाब नहीं हो सके और सुरक्षित निकलने में ही अपनी भलाई समझी।
गोलियों के 19 खोखे मिले
गार्ड रूम के आसपास से पुलिस ने एके 47 की गोलियों के 19 से ज्यादा खाली खोखे बरामद किए हैं। वहीं सुरक्षा बलों को दिए सौ कारतूस में से 94 ही मिल सके हैं। छह राउंड फायर किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। संतरी के इंसास राइफल की मैग्जीन भी टूट गई है। जवानों के पास दो इंसास, एक एके 47 और एक इंसास एलएमजी राइफल के साथ ही ग्रेनेड व कारतूस भी थे, जिन्हें लूटने में नक्सली कामयाब नहीं हो सके।
तिमेलवाड़ा में भी हमला, एक जवान शहीद
तिमेलवाड़ा के सीएएफ कैंप में तैनात जवानों पर रविवार की सुबह ६.५क् बजे नक्सलियों ने हमला कर दिया। इसमें समयलाल कंवर शहीद हो गए। जवानों ने भी मोर्चा लेकर ताबड़तोड़ गोलीबारी की। इसके बाद नक्सली जंगल की ओर भाग निकले। तिमेलवाड़ा में सीएएफ कैंप खुलने के बाद से नक्सली कई दफे गोलीबारी कर चुके हैं। इसके बावजूद नक्सली आसानी से घटना को अंजाम देकर भाग निकले।