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तीन करोड़ कैश, ज्वैलरी जब्त बोगस कंपनी का फूटा भांडा

7 वर्ष पहले
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रायपुर. आयकर विभाग ने बुधवार को राजनांदगांव में बड़े कारोबारियों को घेरा। एबिस ग्रुप की करीब 20 कंपनियों में जांच के दौरान फर्जी कंपनी का भी भांडा फूटा। अफसरों ने तीन करोड़ रुपए, सात लॉकर, बोगस बिल पकड़े। देर रात तक बड़ी मात्रा में मिली ज्वैलरी का मूल्यांकन जारी था। आयकर विभाग की इंवेस्टिगेशन विंग ने यह कार्रवाई की। छापे की कार्रवाई में एमपी और सीजी के 150 अधिकारी शामिल हैं। ज्वाइंट डायरेक्टर इंवेस्टिगेशन संजय कुमार के नेतृत्व में आयकर दफ्तर से अल सुबह निकली 20 टीमों ने करीब साढ़े आठ बजे राजनांदगांव में एबिस ग्रुप पर धावा बोला। खास बात यह रही कि राजनांदगांव के लोकल अफसरों को छापे में शामिल नहीं किया गया।
कंपनी का पोल्ट्री, दूध, तेल, साल्वेंट प्लांट, राइस आइल आदि का बड़ा कारोबार है। कंपनी लंबे समय से छत्तीसगढ़ में व्यवसाय कर रही है। ग्रुप में आर्थिक गड़बडिय़ों और गोरख धंधे की शिकायतें 4-5 सालों से आ रही थीं। आयकर विभाग को सबूत जुटाने में काफी वक्त लगा। सूत्रों के मुताबिक ग्रुप खर्च के बोगस बिल बनाकर आयकर चोरी कर रहा था। मौके तलाश रहे विभाग ने आज ग्रुप के दफ्तर, फैक्ट्रियों, संचालकों के बंगलों समेत 20 ठिकानों पर जांच शुरू की। ग्रुप के संचालक बहादुर अली व सुलतान अली बताए गए हैं। जांच में लगे अफसर तब दंग रह गए जब ग्रुप में ऐसे दस्तावेज मिले जिनमें कोलकाता की जाली कंपनी से 150 से 200 करोड़ रुपए का कारोबार दिखाया गया। कंपनी ने शो किया कि कोलकाता की इस कंपनी से उसने करोड़ों रुपए का कैपिटल व शेयर लिए। संचालकों के राजनीतिक कनेक्शन भी तलाशे जा रहे हैं। अफसरों ने कहा कि विभाग को छापे में सफलता मिली है। अभी जांच जारी है और तथ्य सामने आने की संभावना है।
एबिस ग्रुप की मुख्य फर्म - एबिस एक्सपोर्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, इंडियन एग्रो इंडस्ट्री, एबिस ब्रायलर प्राइवेट लिमिटेड, एबिस हैचरी प्राइवेट लिमिटेड, अजीज पोल्ट्री समेत 15 सिस्टर्स कंसर्न।
ये मिला
तीन करोड़ रुपए एक्सेस कैश
बड़ी मात्रा में घरों से ज्वैलरी
सात लाकर - एचडीएफसी बैंक व एक्सिस बैंक
चेक बुक बड़ी मात्रा में
कोलकाता की फर्जी कंपन से संबंधी
जाली कंपनी से 200 करोड़ का कारोबार
बोगस पर्चेसिंग के दस्तावेज
लेन-देन वाली डायरी व खाते
कई बैग भरकर कारोबारी दस्तावेज
दो संस्थानों में मिली 1.40 करोड़ की अघोषित संपत्ति
बिलासपुर| पेंड्रारोड के अनाज कारोबारियों के दो संस्थानों पर इनकम टैक्स के अधिकारियों को जांच में 1.40 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति मिली है। कारोबारी इसे तकनीकी चूक बता रहे हैं, जबकि अधिकारियों ने इसे टैक्स चोरी का मामला बताया है। एक दिन पहले ही नौ आयकर अफसरों की टीम ने दोनों संस्थानों में दबिश दी थी। मंगलवार को पेंड्रारोड के अनाज कारोबारी फकीरचंद अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल और आशीष अग्रवाल के संस्थानों में एसएम मौलाना, अमित कुमार, केसी दास सहित इनकम टैक्स के नौ अफसरों की टीम ने दबिश दी थी। शाम से देर रात तक जांच की जाती रही। अधिकारियों को संस्थान में अघोषित संपत्ति होने की शिकायत मिली थी। अधिकारियों को जांच की शुरुआत में ही लाखों रुपए की अघोषित संपत्ति होने की जानकारी मिली।लेकिन जांच खत्म होते-होते आंकड़ा 1.40 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
यश इंडस्ट्री में 80 लाख रुपए तो यश मार्डन प्रोडक्ट में 60 लाख रुपए की अघोषित आय अधिकारियों को मिली। अधिकारियों ने इस संबंध में कारोबारियों से पूछताछ की तो पता चला कि सभी एक संयुक्त परिवार में रहते हैं और सभी की मिली-जुली संपत्ति है। कारोबारियों ने अधिकारियों को तकनीकी खामी बताते हुए आयकर नियमों का पालन करने और नियमानुसार आयकर जमा करने की बात कही। लेकिन अधिकारियों ने स्टॉक व कैश का हिसाब नहीं मिलने व कर जमा नहीं करने का हवाला देते हुए इसे अघोषित संपत्ति माना। तब कारोबारियों ने जल्द ही कर जमा करने की सहमति दी। इधर, अधिकारियों ने इसे रूटीन सर्वे तो बताया लेकिन यह भी माना कि इन संस्थानों में अघोषित संपत्ति मिली है। जल्द ही कुछ और अनाज कारोबारियों के संस्थानों में इनकम टैक्स की जांच हो सकती है।
हम पूरा टैक्स देते हैं, ये तकनीकी खामी है

हम पूरा टैक्स देते हैं, लेकिन अगर इनकम टैक्स के अधिकारियों को लगता है कि नहीं देते तो वे इसमें सुधार कर सकते हैं। यह उनका अधिकार है। अधिकारियों ने 1.40 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति होने और इसका टैक्स पेड नहीं होने की बात कही है। ऐसा तकनीकी चूक की वजह से हुआ होगा। हम टैक्स देने को तैयार हैं। - गोपाल अग्रवाल, कारोबारी