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चंदूलाल में एमबीबीएस की फीस होगी आठ लाख

8 वर्ष पहले
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रायपुर. दुर्ग में इस साल से शुरू हो रहे चंदूलाल चंद्राकर निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के लिए सरकारी कोटे की सीट पर भी मोटी रकम खर्च करनी होगी। कॉलेज प्रबंधन ने एमबीबीएस प्रथम वर्ष की फीस आठ लाख रुपए रखने का प्रस्ताव राज्य शासन के पास भेजा है। विनियामक आयोग ने निजी मेडिकल कॉलेज की सीटों के लिए अब तक फीस तय नहीं की है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक साल की मेडिकल पढ़ाई के लिए छात्रों को सिर्फ 30 से 35 हजार रुपए ही खर्च करने पड़ते हैं। यह राशि निजी मेडिकल कॉलेज की प्रस्तावित फीस से 24 गुना कम है।

स्टेट कोटे की सीटों पर फीस तय नहीं होने से छात्र असमंजस में हैं। शुक्रवार को एमबीबीएस में चयनित छात्र-छात्राओं की प्रोविजनल सूची वेबसाइट पर जारी कर दी गई है। इन्हें 29 जुलाई से दो अगस्त तक आवंटित कॉलेजों में एडमिशन लेना है। दुर्ग स्थित चंदूलाल चंद्राकर निजी मेडिकल कॉलेज में स्टेट कोटे की 63 सीटें हैं। शुक्रवार को जारी प्रोविजनल सूची में इसमें से 59 सीटें भर चुकी हैं। हालांकि एडमिशन लेने वाले छात्रों को यही नहीं मालूम कि उन्हें कितनी फीस जमा करनी है। दैनिक भास्कर को मिली जानकारी के अनुसार कॉलेज प्रबंधन ने फीस विनियामक आयोग को आठ लाख रुपए प्रति वर्ष के हिसाब से फीस का प्रस्ताव दिया है। इस पर अभी शासन ने कोई निर्णय नहीं लिया है। निजी मेडिकल कॉलेज में मैनेजमेंट कोटे की 64 सीटों के लिए बुकिंग शुरू हो चुकी है। इसमें सरकार द्वारा तय फीस के अलावा मोटी रकम ली जा रही है। एमबीबीएस का कोर्स साढ़े चार साल का होता है। देश में मेडिकल की सबसे ज्यादा फीस मणिपाल बेंगलुरू और डीवाय पाटील कॉलेज मुंबई की है। राजधानी के कई छात्र इस समय वर्धा मेडिकल कॉलेज में हैं। वर्धा में इस साल एमबीबीएस की एक सीट की बुकिंग 25 लाख रुपए में हुई है।
राजधानी के कुछ डॉक्टर बताते हैं कि रिक्त सीटों के लिए 50 से 60 लाख रुपए लिए जा रहे हैं।

रायपुर मेडिकल कॉलेज की केवल एक सीट खाली
प्रोविजनल सूची के अनुसार रायपुर मेडिकल कॉलेज में स्टेट कोटे की 124 सीटों में केवल एक सीट खाली है। नया कॉलेज रायगढ़ में भी 41 में एक ही सीट रिक्त है। बिलासपुर में 82 में तीन व जगदलपुर में 77 में एमबीबीएस की छह सीटें खाली हैं। राजधानी स्थित सरकारी डेंटल कॉलेज में चार, छग डेंटल कॉलेज राजनांदगांव में दो, रूंगटा कॉलेज भिलाई में दो, मैत्री कॉलेज अंजोरा में एक, त्रिवेणी कॉलेज बिलासपुर में तीन व न्यू होराइजन कॉलेज में बीडीएस की दो सीटें रिक्त हैं। सूची पर शनिवार की शाम 5 बजे तक डीएमई कार्यालय में दावा-आपत्ति की जा सकती है। शुक्रवार शाम तक चार स्टूडेंट्स ने दावा-आपत्ति का आवेदन जमा किया।


फीस सरकार तय करेगी
॥निजी मेडिकल कॉलेज की फीस शासन तय करेगा। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अभी छुट्टी पर हैं। सोमवार को वे आ जाएंगे तो संभवत: फीस के बारे में जानकारी मिल जाएगी। निजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने वालों को मालूम है कि उन्हें कितनी फीस जमा करनी पड़ सकती है।ञ्जञ्ज
डॉ. सुबीर मुखर्जी, डीएमई