(फोटो- 12 व 13 सितम्बर को दैनिक भास्प्रकर में काशित खबर)
रायपुर। मेडिकल व डेंटल की ऑनलाइन काउंसिलिंग में गड़बड़ी करने वाला चिकित्सा शिक्षा विभाग बैकफुट पर आ गया है। तकरीबन तीन माह में तीन दौर की काउंसिलिंग के बाद गुरुवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अचानक दाखिले बंद किए और 73 एमबीबीएस तथा 12 बीडीएस छात्रों के या तो दाखिले रद्द किए या कालेज बदल दिए।
दैनिक भास्कर ने जैसे ही इसका खुलासा किया, प्रदेशभर में बवाल मच गया। उम्मीदवारों ने मेडिकल सीटों के आवंटन में घोटाले के आरोप लगाए तो शासन सक्रिय हो गया। दो दिन के भीतर, शनिवार को पुरानी सूची थोड़े संशोधन के साथ फिर मान्य कर दी गई है। इस आधार पर जारी की गई नई सूची में एमबीबीएस के 468 तथा बीडीएस के 13 स्टूडेंट्स के नाम हैं। इसमें पुरानी सूची के दो एमबीबीएस व दो डेंटल सीटों का आवंटन रद्द किया गया है। इसके अलावा दो नए उम्मीदवारों को मेडिकल सीट मिली है तथा दो का कॉलेज बदला है। इसके बावजूद, यह सवाल बरकरार है कि आखिर काउंसिलिंग अफसरों ने दो दिन पहले सूची में भारी फेरबदल आखिर क्यों किया था?
मेडिकल काउंसिलिंग में भारी गड़बड़ी से पूरे स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा राज्य के प्रशासनिक गलियारे में भी खलबली मच गई थी। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के पीएस डॉ. आलोक शुक्ला ने डीएमई प्रताप सिंह व डिप्टी डीएमई डॉ. सुमीत त्रिपाठी को विवादित सूची जारी करने के लिए जमकर फटकारा था। इसके बाद पुरानी सूची पर दो दिन मंथन चला। आला अफसरों ने ऐसा रास्ता निकालने की ताकीद की थी कि जिनका दाखिला हो गया, उनका अहित न हो। इस आधार पर लंबे एक्सरसाइज के बाद शनिवार की शाम नई सूची फिर जारी की गई। लेकिन पूरे मामले ने चिकित्सा शिक्षा विभाग और पीएमटी की काउंसिलिंग करनेवाले अफसरों की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा दिए हैं। नई सूची में भी चार लोगों की सीटों में बदलाव क्यों हुए? इस सवाल का जवाब डीएमई व डिप्टी डीएमई के पास नहीं है।
सर्वर बंद कर बनाई थी विवादित सूची, सवाल कायम कि ऐसा क्यों?
कंप्यूटर की गड़बड़ी का बहाना
तीसरे चरण की काउंसिलिंग में मेडिकल सीटों के अलाटमेंट में साफ्टवेयर में गड़बड़ी बताकर रायगढ़ कॉलेज के नौ स्टूडेंट के एमबीबीएस की सीट रद्द कर डेंटल की सीट दे दी गई थी। वहीं आठ उम्मीदवारों को रायगढ़ से निजी मेडिकल कॉलेज की सीट री-अलाट की गई थीं। यही नहीं, चंदूलाल चंद्राकर निजी मेडिकल कालेज जिन 53 उम्मीदवारों को अलाट किया गया था, उनका दाखिला भी रद्द कर दिया गया। इससे गुस्साए स्टूडेंट व परिजनों ने शुक्रवार को जमकर हंगामा किया था। काउंसिलिंग प्रभारी व डिप्टी डीएमई त्रिपाठी को एक घंटे तक घेरे रखा था। डीएमई प्रताप सिंह तो दफ्तर ही नहीं गए थे।
उम्मीदवार और उनके परिजनों ने इस मामले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए थे
वरना कहीं का नहीं रहते
डॉ. त्रिपाठी ने शुक्रवार को कहा था कि बेशक हमसे गलती हुई है, लेकिन हमने समय रहते गलती सुधार ली है। ओबीसी केटेगरी के 50 फीसदी से कम अंक वाले उम्मीदवारों को एडमिशन देते तो आयुष विवि नामांकन ही नहीं करता। इससे वे परीक्षा से वंचित हो जाते। हालांकि उम्मीदवारों ने डा. त्रिपाठी के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि एमसीआई ने ओबीसी के लिए कटऑफ 40 फीसदी तय किया है। ऐसे में विवि को नामांकन करना ही पड़ता। उम्मीदवारों ने इस पूरे मामले के पीछे डा. त्रिपाठी की भूमिका पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले हुई किरकिरी
एमसीआई ने ओबीसी के लिए कट आफ 40 फीसदी तय किया है। डेढ़ माह पहले सरकार ने इसे 50 फीसदी कर दिया था। यह निर्णय एसटी उम्मीदवारों को एमसीआई से राहत नहीं मिलने के कारण हुआ था। डीएमई ने हालांकि यह दावा करते हुए 6 सितंबर को विवादित सूची जारी की थी कि इसमें ओबीसी का कटऑफ 50 फीसदी है, लेकिन सूची के अध्ययन के बाद छात्रों ने दावा किया कि कई 50 फीसदी से कम नंबर वाले भी थे।
इसलिए बदला निर्णय
50 फीसदी से कम वाले ओबीसी उम्मीदवारों को एडमिशन नहीं दिया जाता तो मेडिकल की सीट नहीं भर पातीं। 30 सितंबर के बाद खाली सीटें लैप्स हो जातीं, जो प्रदेश के लिए बड़ा नुकसान होता। इस बार एआईपीएमटी में सबसे ज्यादा ओबीसी के उम्मीदवारों ने क्वालिफाइड किया है। एसटी केटेगरी के 136 सीटों को कन्वर्ट करना पड़ा। इससे सीटों को भरने के लिए एमसीआई के नियम के अनुसार एडमिशन देना ही पड़ा।
इनका बदला कॉलेज
यामिनी वर्मा रायपुर से सिम्स बिलासपुर
आशुतोष कुमार रायपुर से सिम्स बिलासपुर
डीएमई गए उत्तराखंड
मेडिकल सीटों के आवंटन में भारी गड़बड़ी तथा बवाल चल रहा है और चिकित्सा शिक्षा संचालक (डीएमई) प्रताप सिंह छुट्टी पर उत्तराखंड चले गए हैं। उन्होंने इसकी पुष्टि की और बताया कि गृह राज्य आए हैं।
हाई रैंक वालों का चयन क्यों नही?
नई सूची में स्टेट में 115वीं रैंक वाली शिमाली पाटले व 489वीं रैंक वाले धनंजय राठौर का नाम है। 6 सितंबर की विवादित सूची में इनका नाम नहीं था। दोनों को ही रायपुर में एमबीबीएस की सीट मिली है।
सवाल ये उठाया जा रहा है कि हाई रैंक था तो पहले चयन क्यों नहीं हुआ। अफसरों का कहना है कि इन्होंने एक च्वाइस ही भरी थी। लेकिन इस सफाई को जानकारों ने ये कहकर खारिज कर दिया कि दोबारा अलाटमेंट दिया ही क्यों गया?