रायपुर. राजधानी में मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटी खोवे से मिठाई बनाने का खेल चल रहा है। मिलावटखोर दूध पाउडर मिलाकर खोवा बना रहे हैं। बाद में इसकी मिठाई बनाकर बेची जा रही है। खाद्य एवं औषधि विभाग की जांच में मिलावटखोरों की हकीकत सामने आ गई।
खाद्य विभाग को लंबे समय से मिलावटी खोवे से मिठाई बनाने की शिकायत मिल रही थी। 21 मार्च को पक्की सूचना मिलने के बाद तेलीबांधा चौक स्थित सिब्बल कोल्ड स्टोरेज में छापा मारकर 35 हजार किलो खोवा जब्त किया गया। पूरे माल को स्टोरोज में ही सील कर दिया गया था।
उसमें कई व्यारियों का खोवा रखा था। कुछ दिनों तक कोई भी व्यापारी खोवा लेने नहीं आया। बाद में एक-एक कर कमल स्वीट्स बढ़ईपारा, कलकत्ता स्वीट्स अश्वनी नगर, दास स्वीट्स रायपुरा चौक और अप्पू स्वीट्स संजय नगर के संचालक अपना-अपना खोवा लेने पहुंचे। उसके बाद उन कारोबारियों के माल का सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच करवाई गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी डा. अश्वनी देवांगन ने बताया कि इन सभी व्यापारियों का चार हजार किलो खोवा कोल्ड स्टोरेज में रखा है।
इनके अलग-अलग 9 खेप के खोवे में पांच खेप का माल मिलावटी निकल गया है। शक्कर और घी में भी मार दी डंडी : जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि दूध पाउडर वाले मिलावटी खोवे में शक्कर और घी का अनुपात भी निर्धारित मापदंड से बेहद कम था। यानी घी और शक्कर की मात्रा में भी डंडी मार दी गई थी। खाद्य विभाग की भाषा में इसे सब स्टैंडर्ड या अमानक पाया जाना कहा जाता है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि व्यापारी अपनी ही दुकान में खोवा बनाते हैं। त्योहारों से पहले बड़ी मात्रा में खोवा बनाकर उसे कोल्ड स्टोरेज में रख दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर उसे लेकर वे मिठाई आदि बनाते हैं। अभी भी करीब 31 हजार किलो खोवा कोल्ड स्टोरेज में रखा है।
72 लाख का खोवा था जब्त
अधिकारियों ने 35 हजार किलो खोवा जब्त किया था। इसकी कीमत करीब 72 लाख रुपए बताई जा रही है। कोल्ड स्टोरेज से खोवा जब्त होने के बाद व्यापारी इसकी सुपुर्दगी लेने नहीं पहुंचे। यही वजह है कि खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने खोवे को स्टोरेज में ही सील कर दिया। स्टोरेज प्रबंधन को निर्देश दिया गया था कि खोवा ले जाने के लिए पहुंचने पर व्यापारियों की सूचना खाद्य विभाग को दी जाए।
आगे क्या : जिन व्यापारियों के खोवे के सैंपल फेल हुए हैं, उन्हें सेंट्रल लेबोरेटरी दिल्ली में अपना खोवा जांच के लिए भेजने की अनुमति दी जाएगी। व्यापारी अगर तैयार हो गए तो लेबोरेटरी में खोवा भेजा जाएगा। वहां सेंपल फेल होने पर एडीएम के न्यायालय में केस दायर किया जाएगा। यदि व्यापारी सेंट्रल लेबोरेटरी में सेंपल भेजने को तैयार नहीं हुए तो अभी केस दायर कर दिया जाएगा।