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जेल में रहने मांगे जाते थे पैसे, किया जाता था प्रताड़ित, भागे तो फिर पकड़ लाई पुलिस

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर. तीन दिन पहले सेंट्रल जेल के टायलेट का छप्पर तोड़कर भागे बंदियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से एक जंगल मिला तो दूसरे को घर पहुंचते ही गौरेला पुलिस ने पकड़ लिया। दोनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बंदियों ने बताया कि जेल में रहने, खाने-पीने के लिए उनसे पैसे मांगे जाते थे। पैसे न दे पाने पर प्रताड़ित किया जा रहा था।
सेंट्रल जेल के टायलेट का छप्पर निकालकर २३ जनवरी को अपहरण व दुष्कृत्य के आरोपी बंदी कौशल गंधर्व व राजू सिंह भाग निकले थे। पुलिस को संदेह था कि दोनों अपने गांव कारीआम के आसपास ही मिलेंगे। जंगल में सर्चिग चल रही थी। रविवार को दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। राजू को जंगल से पकड़ा गया। कौशल जंगल से घर आया ही था कि ताक पर बैठी गौरेला पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
दोनों को पकड़कर गौरेला, फिर बिलासपुर लाया गया। पूछताछ में उन्होंने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जेल में खाने-पीने व सोने के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। पहरेदार व लंबरदार घर से रकम मंगाने के लिए उनसे मारपीट करते थे। रातभर सोने नहीं दिया जा रहा था और न ही खाना मिल रहा था। इन सबसे परेशान होकर दोनों ने भागने की योजना बनाई।
एक उसलापुर गया, दूसरा पुल से कूदकर कोनी पहुंचा
जेल की दीवार कूदने के बाद राजू गंधर्व सरकंडा की ओर गया, वहीं कौशल उसलापुर की ओर चला गया। राजू ने इंदिरा सेतु पर पुलिस को देख लिया था। वह बचने के लिए पुल के नीचे कूद गया था। इसके बाद नदी के रास्ते वह कोनी पहुंच गया। यहां देवनगर में कौशल के रिश्तेदार के घर गया और रातभर यहीं ठहरा। सुबह १क् बजे पैदल रतनपुर की ओर गया और करीब १क् किमी आगे जाकर बस का इंतजार करता रहा। दोपहर २.३क् बजे उसे आशीष बस मिली, जिसमें वह पहले हेल्पर था। बस से वह गांव कारीआम चला गया। पुलिस के डर से वह घर नहीं गया। गांव के पास ही जंगल में रात बिताई। इधर कौशल सीधा उसलापुर गया और पटरी के रास्ते आगे बढ़ता गया। वह भी गांव के करीब जंगल में जाकर छिप गया। खोजबीन करते पहुंची पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया।
ऐसे भागे थे चाचा-भतीजा
बंदियों की गिरफ्तारी के बाद एसपी बीएन मीणा ने पत्रकारों को बताया, २३ जनवरी की रात दोनों बंदी टायलेट गए। यहां से उन्हें भागने का रास्ता नजर आया। टायलेट की छत खपरैल की थी। दोनों ने इसे अंदर से खोला। राजू इसी रास्ते ऊपर चला गया। कौशल चुपचाप अपनी बैरक में आ गया। इधर ऊपर चढ़ते ही राजू ने खुले छप्पर को खपरैल से ढंक दिया। कुछ देर बाद मौका पाकर कौशल टायलेट पहुंचा तो ऊपर बैठे राजू ने फिर से खपरैल निकाली और उसे ऊपर चढ़ाया। छप्पर से 6 फीट की दूरी पर जेल की बड़ी दीवार है। दोनों जंप लगाकर दीवार से बाहर कूद गए। राजू और कौशल रिश्ते में चाचा-भतीजा हैं।
पता नहीं था, तार में करंट है
जेल की मुख्य दीवारों के ऊपर चारों ओर कांटा तार का घेरा है। इसमें २४ घंटे ४४क् वोल्ट का करंट होता है। भागते समय दोनों को तार में करंट होने की जानकारी नहीं थी। हालांकि वे करंट के संपर्क में नहीं आए।
कूदते देखा, पर ध्यान नहीं दिया
घटना के दिन एक बंदी को सरकंडा पुलिस ने इंदिरा सेतु से नीचे कूदते देख लिया था। इसके बाद भी पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। सरकंडा पुलिस नदी के रास्ते उसकी खोजबीन करती तो संभवत: वह उसी रात पकड़ा जाता। बंदी रातभर कोनी में ठहरा। दूसरे दिन करीब १क् बजे वहां से निकला। पुलिस ने नाकेबंदी की, फिर भी वह आराम से भाग निकला। दोपहर ढाई बजे तक वह रतनपुर रोड में रहा।