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कांगेर है छत्तीसगढ़ का मसूरी, आइए जाने कुछ रोचक बातें

7 वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़ का नाम भारत के उन प्रदेशों में आता है जिन्हें पर्यावरण और प्राकृतिक की दृष्टी से पूरिपूर्ण माना जाता है। यहां वर्षभर देश-विदेश से पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। पर्यटक छत्तीसगढ़ घूमने आए और उनकी लिस्ट में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान का नाम न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। कांगेर घाटी प्रदेश के प्रांत बस्तर जिले में है।
प्रकृति ने कांगेर घाटी को एसा उपहार सौंपा है, जहां वन देवी अपने पूरे श्रृंगार में मंत्रमुग्ध कर देने वाली दृश्यावलियों को समेटे, भूमिगार्भित गुफाओं को सीने से लगाकर यूं खड़ी होती है मानो आपके आगमन का इंतजार कर रही हो। कांगेर घाटी का दर्शन एक संतोषप्रद अवर्णनीय एवं बेजोड़ प्राकृतिक अनुभव का उदाहरण है।
आइए हम आपको इस घाटी की विशेषताओं से परिचित कराते हैं..
तीरथगढ़ जल प्रताप
तीरथगढ़ जल प्रताप छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा के लिए भी विशोष है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिला से मात्र 27 किमी की दूरी पर स्थित है। रायपुर जिला से लगभग 330 किमी की दूरी पर है। यह उत्तर पश्चिम किनारे पर तीरथगढ़ जलप्रपात से प्रारंभ होकर पूर्व में ओडिशा की सीमा कोलाब नदी तक फैला है। कांगेर नदी इसके बीचो-बीच इठलाती हुई चलती है। इसकी औसत चौड़ाई 6 किमी एवं लम्बाई 48 किमी है। इसका क्षेत्रफल 200 वर्ग किमी है। इसकी सीमा 48 गांवों से घिरी है।
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