रायपुर| यह तस्वीर देश के किसी अन्य मेट्रो िसटी की नहीं बल्कि हमारे अपने नये रायपुर की है। योजनाकारों ने इसे अगले 5 वर्षों में देश के
खूबसूरत ग्रीन-क्लीन के साथ-साथ स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना बनायी है। इस पर 7 हजार करोड़ रु. खर्च किए जाएंगे। 41 गांवों के 8 हजार हेक्टेयर के विशाल भू-भाग में विकास का पहला चरण इस समय तेजी
से जारी है।
इस चरण में शासकीय दफ्तरों के साथ-साथ आबादी की बसाहट को तवज्जो दिया गया है। दूसरे चरण में नये शहर के पुराने गांवों का विकास और तीसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास होगा। ग्रीन सिटी मास्टर प्लान के तहत नये रायपुर में विश्व स्तरीय नागरिक सुविधाओं के साथ 2032 तक 5 लाख की आबादी की वसाहट का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए नये शहर के कुल 26 सेक्टरों को रेसिडेंशियल घोषित किया गया है। औसतन 150-150 एकड़ में फैले इन आवासीय सेक्टर में 3-3 हजार मकान बनाए जाएंगे।
ये आवास, सरकारी उपक्रम गृह-निर्माण मंडल के अलावा निजी क्षेत्र के बिल्डर डेवलपर्स द्वारा बनाए जाएंगे। गृ-निर्माण मंडल द्वारा सेक्टर 27 और 29 में 1100 करोड़ रु. की लागत से पहले चरण की आवासीय कॉलोनियां विकसित कर ली गयी है। सेक्टर 27 में 2665 बहुमंजिले एवं स्वतंत्र आवास बनाए गए है। वहीं सेक्टर 29 में आम आदमी के लिए 884 डूप्लेक्स और 2128 ईडब्ल्यूएस प्लफैट्स का निर्माण जारी है। अस्पताल, दुकान, स्कूल, क्लब हाऊस, लायब्रेरी, बैंक, डाकघर जैसी सुविधाओं के साथ पूरा शहर ग्रीन कॉरीडोर का स्वरूप लिए होगा। नये शहर के सभी सेक्टरों को जोड़ने वाली नहर नाली के दोनों ओर 100-100 फीट तक फल फुलदार 40 लाख वृक्ष लगाकर ग्रीन कॉरीडोर तैयार किया जा रहा है। शहर को वाहनों के प्रदूषण से मुक्त रखने सेक्टर -टू -सेक्टर पहुंच के लिए पैडल-पाथ-वे का कांसेप्ट लागू किया गया। है। ग्रीन सिटी की इसी परिकल्पना को मूर्तरूप देने नया रायपुर विकास प्राधिकरण ने सभी कॉलोनियों में 30 प्रतिशत ओपन स्पेश रखा है। बिजली-पानी-मल निकासी की पूरी व्यवस्था भूमिगत ही रखी गयी है।